परियोजना का उद्घाटन रविवार को पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया
25 हजार से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ, 18 किलोमीटर 11 केवी केबल बिछाई गई;
खराबी होने पर दूसरे फीडर से जल्द बहाल होगी बिजली
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 6 सितंबर 2026। चंडीगढ़ की विद्युत वितरण व्यवस्था को आधुनिक और अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) ने सेक्टर-1 से 8 तक 11 केवी की ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत केबल नेटवर्क में बदल दिया है। करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से पूरी हुई इस परियोजना से उत्तरी सेक्टरों में रहने वाले 25 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
परियोजना का उद्घाटन रविवार को पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय टंडन सहित सीपीडीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रजेश कुमार और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
18 किलोमीटर लंबा भूमिगत नेटवर्क
परियोजना के तहत करीब 18 किलोमीटर लंबी 11 केवी भूमिगत विद्युत केबल बिछाई गई हैं। इसके अलावा वन क्षेत्र से गुजरने वाले चार वितरण फीडरों पर 14 एससीएडीए नियंत्रित रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) स्थापित की गई हैं। इन इकाइयों के माध्यम से बिजली आपूर्ति की निगरानी और नियंत्रण दूर से किया जा सकेगा।
इस परियोजना का लाभ पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, रॉक गार्डन और सुखना झील जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों और पर्यटन स्थलों के साथ-साथ आसपास के आवासीय क्षेत्रों को भी मिलेगा।
खराबी होने पर दूसरे फीडर से जोड़ी जा सकेगी बिजली
प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि ओवरहेड बिजली लाइनें तेज हवाओं, तूफान और पेड़ों के गिरने जैसी परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। भूमिगत नेटवर्क से इस तरह की बाधाओं में कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि आरएमयू और कमांड सेंटर के माध्यम से यदि किसी एक लाइन में खराबी आती है तो बिजली का भार दूसरे फीडर पर स्थानांतरित किया जा सकेगा। इससे खराबी वाले क्षेत्र में बिजली आपूर्ति कम से कम समय में बहाल करने में मदद मिलेगी। इससे विद्युत सुरक्षा बढ़ने के साथ बिजली चोरी पर नियंत्रण में भी सहायता मिलेगी।
कटारिया ने कहा कि अस्पताल, विद्यालय और घरों सहित सभी संस्थानों के सुचारु संचालन के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति जरूरी है। सीपीडीएल ने शहर के विद्युत नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 900 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की योजना बनाई है, जिसमें भूमिगत केबलिंग महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रॉक गार्डन और सुखना झील का सौंदर्य भी बढ़ेगा
भूमिगत विद्युत नेटवर्क से बिजली के खंभों और तारों को हटाने में मदद मिलेगी। इससे खासकर रॉक गार्डन और सुखना झील के आसपास का शहरी दृश्य अधिक साफ और व्यवस्थित दिखाई देगा। साथ ही ओवरहेड विद्युत ढांचे से प्रवासी पक्षियों और वन्यजीवों को होने वाले संभावित खतरे को भी कम किया जा सकेगा।
सीपीडीएल के सीईओ ब्रजेश कुमार ने कहा कि कंपनी प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों के माध्यम से चंडीगढ़ की बिजली वितरण व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मजबूत नेटवर्क से बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित तथा गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
पांच वर्षों में 956 करोड़ रुपये निवेश की योजना
सीपीडीएल ने शहर के विद्युत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अगले पांच वर्षों में 956 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। इसमें नेटवर्क सुधार, बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, स्मार्ट मीटरिंग, सुरक्षा और डिजिटल तकनीक से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।
1 फरवरी 2025 को चंडीगढ़ की विद्युत वितरण व्यवस्था संभालने के बाद से सीपीडीएल ने चार 20 एमवीए पावर ट्रांसफॉर्मर, 63 वितरण ट्रांसफॉर्मर और 40 आरएमयू को ऊर्जीकृत किया है। इसके अलावा 15 किलोमीटर हाई टेंशन और 25 किलोमीटर लो टेंशन सर्किट का काम पूरा किया गया है।
सेक्टर-18 स्थित सीपीडीएल का 24 घंटे संचालित इन-हाउस एससीएडीए कमांड सेंटर बिजली नेटवर्क की वास्तविक समय में निगरानी करता है। इसी प्रणाली के माध्यम से आरएमयू का दूर से संचालन और बिजली आपूर्ति का प्रबंधन किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में सीपीडीएल के वरिष्ठ सलाहकार अरुण कुमार वर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।















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