निदेशक प्रो. विवेक लाल ने स्वास्थ्य सुरक्षा और मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बताया जरूरी
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 12 सितंबर। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में 24 देशों से आए वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय वैश्विक स्वास्थ्य संवाद आयोजित किया गया। यह संवाद पीजीआईएमईआर की ओर से भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम तथा विदेश मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित 8वें जनस्वास्थ्य नीति एवं प्रबंधन कार्यक्रम के तहत हुआ।
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने विभिन्न देशों से आए स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत भारत की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहलों में से एक है, जिसके माध्यम से लाखों लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जटिल सर्जरी तथा उन्नत उपचार उपलब्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि किफायती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता ने भी देश में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रो. लाल ने कहा कि भारत दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने के लिए भी उतना ही उत्सुक है, जितना अपने अनुभव साझा करने के लिए। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमईआर जैसे संस्थान भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण ताकत हैं। प्रतिनिधियों को पीजीआईएमईआर की स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष्मान भारत, टेलीमेडिसिन, अंगदान, चिकित्सा शिक्षा और शोध सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनाई जा रही नवाचारी और अन्य स्थानों पर लागू की जा सकने वाली व्यवस्थाओं से अवगत कराया गया। उन्होंने सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और मिलकर राष्ट्रों के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
टेलीमेडिसिन से भौगोलिक दूरी की बाधा हुई कम
पीजीआईएमईआर के डीन अकादमिक्स प्रो. संजय जैन ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामूहिक प्रयासों को स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आईटीईसी से जुड़े सभी देश मिलकर ऐसे समाधान तलाश सकते हैं, जो सभी के लिए उपयोगी हों।
उन्होंने पीजीआईएमईआर की टेलीमेडिसिन पहल को तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल का उदाहरण बताया। इसके माध्यम से विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को भौगोलिक दूरी की बाधा के बावजूद जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
टेलीमेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. बिमान सैकिया और विभाग के संकाय सदस्य डॉ. अमित ने प्रतिनिधियों को संस्थान की टेलीमेडिसिन सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग देश के प्रमुख टेलीमेडिसिन केंद्रों में शामिल है और एक दिन में 4,000 तक टेली-परामर्श किए जा सकते हैं। अब तक 40 लाख से अधिक लोग इसकी टेली-परामर्श सेवाओं से लाभान्वित हो चुके हैं।
98 देशों के 1,850 से अधिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को प्रशिक्षण
कार्यक्रम के निदेशक प्रो. सोनू गोयल ने कहा कि पिछले एक दशक में जनस्वास्थ्य नीति एवं प्रबंधन कार्यक्रम ने नेतृत्व और प्रबंधन प्रशिक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने इसे भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’—विश्व एक परिवार है की भावना से जोड़ते हुए कहा कि कार्यक्रम केवल शैक्षणिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने विभिन्न देशों के बीच विश्वास, ज्ञान और मित्रता के स्थायी संबंध भी विकसित किए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से अब तक 98 देशों के 1,850 से अधिक स्वास्थ्य पेशेवरों को इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उनके अनुसार यह कार्यक्रम भारत की वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति और विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।
स्मार्ट सिटी के एकीकृत नियंत्रण केंद्र का भी दौरा
विदेशी प्रतिनिधियों ने एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) का भी दौरा किया। उन्हें बताया गया कि यह केंद्र स्मार्ट सिटी की आधारभूत व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात और नागरिक सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रतिनिधियों को अनुकूली यातायात नियंत्रण प्रणाली, ई-चालान व्यवस्था और पुलिस, अग्निशमन तथा चिकित्सा सेवाओं से जुड़े आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रबंधन की कार्यप्रणाली दिखाई गई। इसके अलावा ठोस कचरा निगरानी, स्मार्ट प्रकाश व्यवस्था और केंद्रीकृत आंकड़ा केंद्र के बारे में भी जानकारी दी गई। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से शहर के संचालन की निगरानी के साथ भविष्य की आधारभूत सुविधाओं की योजना बनाने में मदद मिलती है।
24 देशों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग
कार्यक्रम में सेशेल्स, कंबोडिया, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, घाना, तंजानिया, इराक, ट्यूनीशिया, लेबनान, आर्मेनिया, अर्जेंटीना, टोगो, रूस, मलावी, जाम्बिया, सिएरा लियोन, गैबॉन, नेपाल, केन्या, नामीबिया, ताजिकिस्तान, लाइबेरिया, मिस्र और उज्बेकिस्तान सहित 24 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस उच्चस्तरीय संवाद ने विभिन्न देशों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भारत की स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी पहलों को समझने के साथ-साथ अपने अनुभव साझा करने तथा भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान किया।















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