हरियाणा में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के लिए छह श्रेणियों वाला नियामक ढांचा लागू; पंजीकरण और मरीजों की सुरक्षा के मानक हुए सख्त
स्थायी पंजीकरण के लिए 25,000 रुपये शुल्क निर्धारित; नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों का अनिवार्य पंजीकरण, कड़े सुरक्षा प्रावधान और निगरानी व्यवस्था लागू
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर – हरियाणा सरकार ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों के लिए व्यापक नियामक ढांचा बनाया है। इसके तहत मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को छह श्रेणियों में विभाजित कर उनके पंजीकरण, स्टाफ की योग्यता, मरीजों की सुरक्षा, उपचार संबंधी रिकॉर्ड और संस्थागत जवाबदेही के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों के मनोरोग विभागों, मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों के मनोरोग वार्डों, नशा मुक्ति केंद्रों, मनोसामाजिक पुनर्वास केंद्रों तथा अन्य संबंधित संस्थानों को शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बुधवार को बताया कि राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा 9 अक्टूबर को अधिसूचित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल (स्टेट मेंटल हेल्थ ऑथोरिटी) विनियम, 2026 को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों के लिए विनियमन के लिए फ्रेमवर्क बनाया है।
इन विनियमों के तहत स्थायी पंजीकरण के लिए 25,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। संस्थानों को न्यूनतम मानकों के अनुपालन के प्रमाणस्वरूप आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके अलावा, पेशेवर योग्यता, मरीजों के अधिकार, चिकित्सा रिकॉर्ड, शारीरिक रूप से रोकने संबंधी प्रावधानों, निजता, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा और दिव्यांगजनों के लिए सुगम सुविधाओं से जुड़े मानक भी निर्धारित किए गए हैं।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि विनियमों के तहत मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को उनकी प्रकृति और उपलब्ध सेवाओं के आधार पर श्रेणी A से F तक छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। सभी संबंधित संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम की धारा 65 के तहत लागू पंजीकरण प्रक्रिया का पालन करना होगा। यह व्यवस्था केवल मानसिक अस्पतालों और नशा मुक्ति केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मेडिकल कॉलेजों के मनोरोग विभाग, सामान्य अस्पतालों के मनोरोग वार्ड, आवासीय पुनर्वास केंद्र तथा मादक पदार्थों के सेवन संबंधी विकारों के उपचार से जुड़े निर्धारित संस्थान भी शामिल हैं।
विनियमों में संस्थानों के लिए आवास, स्वच्छता, चिकित्सा उपकरणों, कर्मचारियों की उपलब्धता और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों के संबंध में न्यूनतम मानक तय किए गए हैं। इनमें पर्याप्त वेंटिलेशन, अलग-अलग बिस्तर, स्वच्छ बिस्तर, पेयजल की उपलब्धता, पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग स्वच्छता सुविधाएं, बिजली का वैकल्पिक प्रबंध तथा जैव-चिकित्सकीय कचरे का सुरक्षित निपटान शामिल है।
मानकों के अनुसार, संस्थानों में रहने वाले मरीजों को फर्श पर सुलाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, उनकी निजता, व्यक्तिगत गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करना भी अनिवार्य होगा।
शारीरिक रूप से रिस्ट्रेन संबंध कड़े सुरक्षा प्रावधान
मानसिक स्वास्थ्य उपचार प्राप्त कर रहे मरीजों को शारीरिक रूप से रिस्ट्रेन करने या बांधने के संबंध में विनियमों में विशेष सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। संस्थानों को ऐसे उपायों का न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित करना होगा, कर्मचारियों को संकट की स्थिति से निपटने के वैकल्पिक तरीकों का प्रशिक्षण देना होगा तथा शारीरिक रूप से रोकने की आवश्यकता पड़ने पर उसका उचित रिकॉर्ड रखना होगा।
इनपेशेंट सुविधाओं में शारीरिक रूप से रोकने की अनुमति केवल तभी होगी, जब मरीज द्वारा स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने का खतरा हो। ऐसी स्थिति में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा अधिकारी या परामर्शदाता मनोचिकित्सक की अनुमति आवश्यक होगी।
रिपोर्टिंग के दायरे में आने वाले संस्थानों को शारीरिक रूप से रोकने से संबंधित मासिक रिपोर्ट अगले महीने के पहले सप्ताह के भीतर संबंधित जिला मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड को प्रस्तुत करनी होगी।
विनियमों में मरीजों की गोपनीयता, भेदभाव से सुरक्षा, लैंगिक संवेदनशीलता के अनुरूप उपचार, चिकित्सा रिकॉर्ड तक पहुंच तथा भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य उपचार के संबंध में अग्रिम निर्देश (एडवांस डायरेक्टिव) दर्ज कराने की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों का अनिवार्य पंजीकरण और निगरानी
श्रेणी D के अंतर्गत आने वाले स्वतंत्र नशा मुक्ति केंद्रों के लिए सभी मरीजों का हरियाणा नशा मुक्ति निगरानी प्रणाली पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। वहीं, मादक पदार्थों के सेवन संबंधी विकारों के आपातकालीन उपचार की सुविधा देने वाले श्रेणी F के निर्धारित संस्थानों को मनोचिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करनी होगी और मरीजों की जानकारी इसी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इस नियामक व्यवस्था का प्रभाव नशा मुक्ति और पुनर्वास से जुड़े उन संस्थानों पर भी पड़ेगा, जो नशे की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (National Action Plan for Drug Demand Reduction) के तहत संचालित किए जा रहे हैं।
हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (सेवा) ने 18 सितंबर को जारी पत्र के माध्यम से जिला अधिकारियों को राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में पंजीकृत नहीं हुए मौजूदा नशा मुक्ति के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्रों (IRCA) तथा नशा मुक्ति केंद्रों का पंजीकरण शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए थे। यह पत्र केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के 9 सितंबर के निर्देश के संदर्भ में जारी किया गया था।
जिला स्तरीय समितियों के सदस्य-सचिवों को संबंधित संस्थानों का पंजीकरण करवाने, निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा वैध पंजीकरण प्रमाणपत्रों की प्रतियां प्राप्त करने में सहायता देने को कहा गया है।
प्रत्येक जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर जोर
मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के लिए निर्धारित यह नियामक व्यवस्था मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत लागू किए जा रहे हैं। अधिनियम की धारा 18 के तहत लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। इनमें बाह्य रोगी (ओपीडी) और भर्ती होकर उपचार प्राप्त करने की सुविधाएं, पुनर्वास, समुदाय आधारित सहायता तथा बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेवाएं शामिल हैं।
अधिनियम के अनुसार, प्रत्येक जिले में सरकार द्वारा संचालित या सरकारी वित्तपोषण से उपलब्ध कराई जाने वाली न्यूनतम मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जानी हैं। जहां स्थानीय स्तर पर आवश्यक सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहां उपचार की वैकल्पिक व्यवस्था करने का भी प्रावधान है।
इन विनियमों का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना, उपचार संस्थानों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करना तथा मनोरोग उपचार, पुनर्वास और नशा मुक्ति सेवाएं प्राप्त करने वाले मरीजों एवं उनके परिवारों के अधिकारों, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा करना है।
भारत निर्वाचन आयोग ने Form-7 आवेदनों की संख्या निर्धारित की
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर- भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों में नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने अथवा नाम हटाने के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले Form-7 आवेदनों की संख्या निर्धारित की है। आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, बिना ठोस आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने तथा मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
आयोग के निर्देशानुसार, दावे एवं आपत्तियों की अवधि के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 Form-7 आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। वहीं, मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन की अवधि के दौरान एक मतदाता प्रति माह अधिकतम 5 Form-7 आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा। ये सीमाएं ऑनलाइन एवं ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होंगी।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पंजीकरण निर्वाचक नियम, 1960 के नियम 13(2) के अनुसार Form-7 आवेदन केवल वही व्यक्ति प्रस्तुत कर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। आवेदन में सभी आवश्यक विवरण भरना तथा आपत्तिकर्ता द्वारा निर्धारित स्थान पर स्वयं हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा। हस्ताक्षर की मुहर को मूल हस्ताक्षर का विकल्प नहीं माना जाएगा।
आयोग ने निर्वाचक पंजीयन अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिए हैं कि वे Form-7 आवेदनों की जांच करते समय आवेदक की वास्तविकता एवं मतदाता सूची में उपलब्ध विवरणों का सत्यापन सुनिश्चित करें। यदि किसी व्यक्ति द्वारा पांच से अधिक मामलों में आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार व्यक्तिगत रूप से सत्यापन किया जाना चाहिए। दावे एवं आपत्तियों से संबंधित आवेदन, चाहे वे डाक द्वारा प्राप्त हुए हों या किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत किए गए हों, सामूहिक रूप से प्रस्तुत किए जाने पर किसी व्यक्ति द्वारा स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
नियमों के अनुसार, जहां आवश्यक हो, निर्वाचक पंजीयन अधिकारी आपत्तिकर्ता को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत सुनवाई करेंगे तथा प्रत्येक Form-7 आवेदन के संबंध में आपत्ति की वैधता की जांच करेंगे। जिस व्यक्ति के नाम पर आपत्ति दर्ज की गई है, उसे भी आदेश पारित करने से पहले सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिकायत झूठी या मनगढ़ंत पाई जाती है और आवेदक ने जानबूझकर Form-7 में गलत बयान या घोषणा की है, तो उसके विरुद्ध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर अनुपयोगी बिजली खंभे हटाने की कार्रवाई तेज
हरियाणा में अब तक 4,222 खंभे हटाए गए, 2,221 हटाने शेष
शेष खंभे हटाने का कार्य 31 दिसंबर, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य – विक्रम सिंह
चण्डीगढ़, 14 अक्तूबर – हरियाणा में सड़कों के किनारे लंबे समय से खड़े अनुपयोगी बिजली खंभों को हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों तथा बिजली वितरण निगमों के मार्गदर्शन में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) द्वारा इस दिशा में अभियान चलाया जा रहा है। दोनों निगमों में कुल 6,443 अनुपयोगी बिजली खंभों की पहचान की गई थी, जिनमें से अब तक 4,222 खंभे हटाए जा चुके हैं। शेष 2,221 खंभों को हटाने का कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बिजली निगमों के प्रबंध निदेशक श्री विक्रम सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि दोनों निगमों द्वारा की गई कार्यवाही के अनुसार, डीएचबीवीएन में चिह्नित 2,792 खंभों में से 889 हटाए जा चुके हैं, जबकि 1,903 खंभे हटाए जाने शेष हैं। इसी प्रकार, यूएचबीवीएन में चिह्नित 3,651 खंभों में से 3,333 हटाए जा चुके हैं और अब केवल 318 खंभे हटाने बाकी हैं।
उन्होेंने बताया कि यूएचबीवीएन की रिपोर्ट के अनुसार, झज्जर में 35, पानीपत में 22, सोनीपत में 25 और कैथल में 57 अनुपयोगी खंभे हटाए जाने शेष हैं। अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, करनाल और कुरुक्षेत्र सर्कलों में खंभे हटाने का कार्य पूरा कर लिया गया है। रोहतक सर्कल में 33 केवी लाइन के 112 खंभे खडे हैं, जिनका भविष्य में औद्योगिक क्षेत्र में उपयोग किए जाने की संभावना है। इसीप्रकार, करनाल में 33 केवी लाइन के आठ खंभों का एलटी लाइन के कार्य में उपयोग किए जाने की जानकारी दी गई है।
डीएचबीवीएन की सर्कलवार रिपोर्ट के अनुसार, रेवाड़ी सर्कल में 11 केवी लाइन के 795 और 33 केवी लाइन के 336 खंभे हटाए जाने शेष हैं। भिवानी सर्कल में 11 केवी लाइन के 24 और 33 केवी लाइन के 118 खंभे शेष हैं। इसी प्रकार, नारनौल में 11 केवी लाइन के 39 और 33 केवी लाइन के 208 खंभे, जबकि फतेहाबाद में 11 केवी लाइन के 194 और 33 केवी लाइन के 107 खंभे हटाए जाने बाकि हैं। गुरुग्राम-1 में 11 केवी लाइन के सात और जींद में पांच खंभे हटाने शेष हैं। फरीदाबाद, पलवल, गुरुग्राम-2 और सिरसा सर्कलों में यह कार्य पूरा हो चुका है।
31 दिसंबर,2026 तक कार्य पूरा करने के निर्देश
गत दिनों मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सड़कों के किनारे खड़े ऐसे बिजली खंभों को हटाने के निर्देश दिए गए थे, जो अब किसी परिचालन उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रहे हैं। संबंधित बिजली वितरण निगमों को ऐसे खंभों की जिलेवार पहचान कर उन्हें हटाने तथा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निगम के स्टोर में जमा करवाने के निर्देश दिए गए थे।
प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करें। इस अभियान का उद्देश्य बिजली वितरण नेटवर्क को सुव्यवस्थित करना, सड़कों के किनारे अनावश्यक ढांचे को हटाना तथा सार्वजनिक स्थानों को अधिक सुरक्षित बनाना है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से रूस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात, उन्नत ड्रोन तकनीक में भारत-रूस संयुक्त उद्यमों की संभावनाओं पर हुई चर्चा
रूस की तकनीकी कंपनियों ने हरियाणा के ड्रोन एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश के अवसरों पर जताई रुचि
हिसार के सिसाय में स्थापित ड्रोन सिटी हरियाणा उन्नत ड्रोन निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की ओर अग्रसर
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर – हरियाणा को ड्रोन निर्माण, एयरोस्पेस और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए रूस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास संत कबीर कुटीर में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की। बैठक में हरियाणा में निवेश, तकनीक हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान तथा औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में हिसार जिले के हांसी स्थित सिसाय में एवीपीएल इंटरनेशनल द्वारा स्थापित ड्रोन सिटी हरियाणा में दो प्रस्तावित भारत-रूस संयुक्त उद्यमों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इनमें उन्नत हेलीकॉप्टर ड्रोन के निर्माण तथा भारतीय सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग करते हुए जीपीएस/ जीएनएसएस संकेतों पर निर्भरता के बिना ड्रोन के संचालन एवं नेविगेशन की तकनीक विकसित करने की योजनाएं शामिल हैं।
छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में रूस के चार प्रतिनिधि तथा भारत के दो वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। रूस के प्रतिनिधिमंडल में स्कोल्कोवो फाउंडेशन के निदेशक श्री लियोनिद आर्टेमोव, प्रोजेक्ट मैनेजर श्री अलेक्जेंडर जापोरोज्स्की, ओम्नीटेक एलएलसी के सीईओ श्री एलेक्सी उर्बान्स्की तथा 4जीएनएसएस एलएलसी/ओरिएंट सिस्टम्स ग्रुप के सीईओ एवं सह-संस्थापक श्री सर्गेई लेबेदेव शामिल रहे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में ड्रोन टेक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल श्री राकेश कुमार आनंद तथा एवीपीएल इंटरनेशनल (एआईटीएमसी वेंचर्स लिमिटेड) के संस्थापक एवं चेयरमैन श्री दीप सिंह सिसाय शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग और प्रस्तावित संयुक्त उद्यमों के माध्यम से हरियाणा में उन्नत ड्रोन निर्माण का मजबूत औद्योगिक तंत्र विकसित करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को रूस की कंपनी ओम्नीटेक एलएलसी और एवीपीएल इंटरनेशनल के बीच प्रस्तावित सहयोग की जानकारी दी। इसके तहत सिसाय स्थित ड्रोन सिटी हरियाणा में उन्नत हेलीकॉप्टर ड्रोन निर्माण इकाई स्थापित करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजना में उन्नत मानवरहित हेलीकॉप्टर प्रणालियों के निर्माण, असेंबली, अनुसंधान, परीक्षण और तकनीकी विकास के लिए सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, इन हेलीकॉप्टर ड्रोनों की उड़ान क्षमता 250 किलोमीटर तक तथा भार वहन क्षमता 200 किलोग्राम तक होगी। इस परियोजना का उद्देश्य तकनीक हस्तांतरण, स्वदेशी निर्माण, अनुसंधान और औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा देना है।
प्रस्तावित हेलीकॉप्टर ड्रोन का उपयोग औद्योगिक लॉजिस्टिक्स, आपदा प्रबंधन, दूरदराज एवं दुर्गम क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तथा अन्य नागरिक और औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा। संयुक्त उद्यम को अंतिम रूप मिलने पर हरियाणा में विशेषीकृत हेलीकॉप्टर ड्रोन निर्माण क्षेत्र के विकास को बढ़ावा मिल सकता है। इससे उन्नत एयरोस्पेस और मानवरहित हवाई प्रणालियों के निर्माण में राज्य की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।
बैठक में 4जीएनएसएस एलएलसी/ओरिएंट सिस्टम्स ग्रुप के साथ दूसरे प्रस्तावित भारत-रूस संयुक्त उद्यम पर भी चर्चा हुई। इसके तहत ऐसी उन्नत ड्रोन नेविगेशन तकनीक विकसित करने की योजना है, जो जीपीएस/जीएनएसएस उपग्रह संकेत उपलब्ध न होने की स्थिति में भी काम कर सके। इस तकनीक का उद्देश्य ड्रोन को उपग्रह आधारित नेविगेशन संकेतों के अभाव में भी अपने निर्धारित मिशन पूरे करने में सक्षम बनाना है। प्रस्तावित परियोजना में भारतीय सेमीकंडक्टर चिप्स के उपयोग, स्वदेशी तकनीक के विकास और भारत में ही निर्माण की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया है। यह पहल ड्रोन अनुसंधान, स्वायत्त नेविगेशन और एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में प्रगति के साथ-साथ देश में उन्नत तकनीक के विकास के नए अवसर भी सृजित कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार राज्य में ड्रोन एवं एयरोस्पेस निर्माण को बढ़ावा देने के लिए पहले ही कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन बोर्ड (HEPB) की 19वीं बैठक में एआईटीएमसी वेंचर्स लिमिटेड के लिए 58.51 करोड़ रुपये के विशेष प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई थी। यह मंजूरी हरियाणा उद्यम एवं रोजगार नीति, 2020 के तहत हिसार जिले में ड्रोन और ड्रोन के कलपुर्जों के निर्माण के लिए औद्योगिक हब विकसित करने के उद्देश्य से दी गई थी।
मुख्यमंत्री ने हरियाणा को ड्रोन निर्माण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने पर भी विशेष जोर दिया है। 28 सितंबर, 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में अनुसंधान को प्राथमिकता देने, स्टार्टअप्स को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा युवाओं के तकनीकी कौशल विकास को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। इसका उद्देश्य हरियाणा को ड्रोन कैपिटल के रूप में विकसित करना है। रूसी तकनीकी कंपनियों के साथ प्रस्तावित सहयोग इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने, तकनीक हस्तांतरण को प्रोत्साहित करने और उच्च मूल्य वाले विनिर्माण को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है।
सिसाय स्थित ड्रोन सिटी हरियाणा इसी दिशा में राज्य की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना की आधारशिला मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सितंबर 2025 में रखी थी, जबकि इसके प्रथम चरण का उद्घाटन हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी ने मई 2026 में किया था।
हरियाणा पहुंचने से पहले रूस के प्रतिनिधिमंडल ने 12 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राम मोहन नायडू से भी मुलाकात की थी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने सिसाय स्थित ड्रोन सिटी हरियाणा का दौरा कर वहां उपलब्ध विनिर्माण, अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण सुविधाओं की जानकारी ली। एवीपीएल इंटरनेशनल तथा ड्रोन टेक मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने भी रूसी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उद्यमों की संभावनाओं पर चर्चा की।
बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के ओएसडी विवेक कालिया सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
हरियाणा की मंडियों में फसल खरीद की स्थिति पर सरकार की पैनी नजर, किसानों को परेशानी न होने के सख्त निर्देश: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नागर
मंडियों में खरीद व्यवस्था की निगरानी के लिए आईएएस रैंक के अधिकारी नियुक्त, किसानों की सुविधा सरकार की प्राथमिकता: राजेश नागर
हरियाणा सरकार किसान हितैषी, मंडियों में फसल खरीद की तैयारियां पूरी: राजेश नागर
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर – हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नागर ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की फसल की सुचारू खरीद सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह गंभीर है। सरकार के मंत्री एवं विधायक लगातार मंडियों का दौरा कर खरीद व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को फसल बिक्री के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
नागर चंडीगढ़ में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा आयोजित ‘विश्व मानक दिवस-2026’ समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही सभी जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों (डीएफएससी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक कर विभिन्न जिलों की मंडियों में पहुंच रही फसल और खरीद व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। अब तक उन्हें खरीद प्रक्रिया से संबंधित किसी शिकायत की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर निचले इलाकों में पानी भरने के कारण नमी की समस्या सामने आई थी, जिसे सुखाकर दूर कर लिया गया है। मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए भी आवश्यक तैयारियां की गई हैं।
किसानों की शिकायतों से जुड़े सवाल पर राज्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर मंडियों में फसल खरीद की स्थिति की समीक्षा की थी। बैठक में सभी मंडियों की व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई और अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। श्री नागर ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं किसान परिवार से संबंध रखते हैं और किसानों की समस्याओं तथा उनकी जरूरतों को भली-भांति समझते हैं। इसी के मद्देनजर सभी जिलों के उपायुक्तों और डीएफएससी को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को मंडियों में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। इसके अतिरिक्त, प्रदेश की सभी मंडियों में आईएएस रैंक के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, ताकि खरीद प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी की जा सके।
उन्होंने बताया कि किसानों और किसान यूनियनों के पदाधिकारियों के साथ उनका निरंतर संवाद बना रहता है। हाल ही में उनके चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में भी किसानों ने उनसे मुलाकात की थी। इसके अलावा, किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी से भी फोन पर बातचीत हुई है। श्री नागर ने कहा कि उन्हें अब तक किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और वे स्वयं भी मंडियों का दौरा कर खरीद व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।
उन्होंने दोहराया कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और फसल खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
किफायती स्वच्छ ऊर्जा, उपभोक्ता सुरक्षा और सतत विकास के लिए मानक अत्यंत आवश्यक- खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर
किफायती बनाने की होड़ में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए, मानक उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाते हैं- राजेश नागर
उपभोक्ता संरक्षण में बीआईएस प्रमाणन, मानक चिह्न और विधिक माप विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका- नागर
स्वच्छ ऊर्जा की उभरती तकनीकों के लिए भारतीय मानक अपनाकर हरियाणा के एमएसएमई अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकते हैं- राजेश नागर
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर- हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने कहा कि उत्पादों की सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत विकास सुनिश्चित करने में मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री नागर ने कहा कि मानकों को गुणवत्ता, सुरक्षा, स्थिरता और समावेशी विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए। इससे ’’सतत विकास लक्ष्य-7-किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा’’ सहित व्यापक सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने गुणवत्ता को साझा जिम्मेदारी और मानकों को अधिक टिकाऊ हरियाणा तथा बेहतर भारत के निर्माण का साझा मार्ग बनाने का आह्वान किया।
वे आज भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित ’’विश्व मानक दिवस 2026’’ समारोह में उपस्थितनों को संबोधित कर रहे थे।
इस वर्ष विश्व मानक दिवस की थीम ’’“बेहतर विश्व के लिए साझा दृष्टिकोण- सतत विकास लक्ष्य-7-किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा पर विशेष ध्यान”’’ है। श्री नागर ने कहा कि यह थीम आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार के लिए सुलभ, विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा के महत्व को बताती है। किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, खाद्य सुरक्षा, औद्योगिक विकास और सार्वजनिक सेवाओं के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानक भले ही तकनीकी दस्तावेज प्रतीत होते हों, लेकिन उनका प्रभाव प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की गुणवत्ता से लेकर विद्युत उपकरणों की सुरक्षा तथा तौलने और मापने वाले उपकरणों की सटीकता तक, मानक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में हो रहे विकास से नागरिकों और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इन तकनीकों से जुड़े उत्पाद सुरक्षित, विश्वसनीय, ऊर्जा-कुशल और अपने निर्धारित उपयोग के अनुकूल हों। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में सुरक्षित और टिकाऊ बदलाव के लिए मानक एक मजबूत तकनीकी आधार प्रदान करते हैं।
हरियाणा के संबंध में मानकों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए श्री नागर ने कहा कि राज्य की मजबूत कृषि व्यवस्था, विस्तारित औद्योगिक क्षेत्र, बढ़ता सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तंत्र तथा विकसित होते शहरी केंद्र विश्वसनीय ऊर्जा और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे पर निर्भर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वस्तुओं को किफायती बनाने के प्रयासों में उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
भारतीय मानक ब्यूरो की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बीआईएस सौर ऊर्जा प्रणालियों, पवन ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, विद्युत पारेषण और ऊर्जा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय मानकों के विकास एवं प्रोत्साहन के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। ये मानक स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को अपनाने में सहायता करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं और उद्योगों का विश्वास भी बढ़ाते हैं।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए श्री नागर ने कहा कि मानकों का सीधा संबंध उपभोक्ता कल्याण से है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित की जाने वाली वस्तुओं की गुणवत्ता, खाद्य उत्पादों एवं उनकी पैकेजिंग, भंडारण और गोदामों की व्यवस्था तथा व्यापार में इस्तेमाल होने वाले माप-तौल उपकरणों की सटीकता का जनस्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। खाद्यान्न भंडारण से संबंधित मानकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ’’आईएस 16144ः2014’’, जो खाद्यान्न भंडारण गोदामों के लिए कार्य-पद्धति निर्धारित करता है, तथा ’’आईएस 609ः2020’’, जो मौजूदा खाद्यान्न भंडारण संरचनाओं में सुधार के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है, के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निर्धारित मानकों का पालन खाद्यान्न की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत बनाने में सहायक है।
नागर ने कहा कि मानकीकरण, प्रमाणन और विधिक माप विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं तथा बाजार में निष्पक्षता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक उपभोक्ता को यह विश्वास होना चाहिए कि वह जो उत्पाद खरीद रहा है, उसकी गुणवत्ता, मात्रा, सुरक्षा और कार्यक्षमता निर्धारित मानकों के अनुरूप है। उन्होंने उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाने में बीआईएस प्रमाणन प्रणाली और मानक चिह्न के महत्व पर जोर दिया और उपभोक्ताओं में जागरूकता होना भी उतना ही आवश्यक है। नागरिकों को यह जानकारी होनी चाहिए कि मानक चिह्न का क्या अर्थ है, उसकी प्रामाणिकता की जांच कैसे की जा सकती है और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों अथवा प्रमाणन चिह्न के दुरुपयोग के विरुद्ध शिकायत कहां दर्ज कराई जा सकती है।
नागर ने बीआईएस के हरियाणा शाखा कार्यालय द्वारा उपभोक्ता जागरूकता और जनसंपर्क के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उपभोक्ता संगठनों के साथ संवाद और विभिन्न जिलों में आयोजित किए जा रहे ’’शाइन कार्यक्रमों’’ के माध्यम से मानकों, गुणवत्ता आश्वासन और उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। ऐसे प्रयास नागरिकों को सोच-समझकर खरीदारी करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। बीआईएस और हरियाणा सरकार के बीच समन्वय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय समन्वय व्यवस्था के माध्यम से गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के क्रियान्वयन में बीआईएस और राज्य सरकार के विभागों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलता है। इसमें गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) का क्रियान्वयन और मानक चिह्न के दुरुपयोग के विरुद्ध कार्रवाई भी शामिल है। उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों, उपभोक्ता हेल्पलाइन और जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
एमएसएमई क्षेत्र के साथ बीआईएस के प्रयासों की सराहना करते हुए नागर ने कहा कि विभिन्न जिलों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों से उद्यमियों को भारतीय मानकों, प्रमाणन संबंधी आवश्यकताओं और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि मानकों को केवल नियामकीय बाध्यता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और उपभोक्ताओं का विश्वास अर्जित करने के अवसर के रूप में अपनाना चाहिए। श्री नागर ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा की अन्य उभरती तकनीकों में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए हरियाणा के एमएसएमई को उपयुक्त भारतीय मानकों को अपनाना चाहिए। इससे वे गुणवत्ता को मजबूत करने के साथ-साथ बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी बेहतर बना सकते हैं।
उन्होंने विश्व मानक दिवस 2026 के आयोजन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो को बधाई दी और गुणवत्ता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, मानक संस्थानों और उपभोक्ता संगठनों को मिलकर ऐसी संस्कृति विकसित करनी चाहिए, जिसमें गुणवत्ता को प्राथमिकता मिले, मानकों के प्रति जागरूकता बढ़े, नियमों का पालन सुनिश्चित हो और उपभोक्ता सशक्त बनें।
कार्यक्रम में पहुंचने पर बीआईएस के अधिकारियों द्वारा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इसी प्रकार, मंत्री को शॉल ओढाकर उन्हें सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम में चंडीगढ़ के महापौर सौरभ जोशी, बीआईएस के उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक दीपक कुमार सिंगला सहित वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उपभोक्ता संगठनों के सदस्य, शिक्षाविद् और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
एनआईए में तैयार होंगे विशेषज्ञ डॉक्टर
एनसीआईएसएम ने 14 पीजी पाठ्यक्रमों में 70 सीटों की दी मंजूरी, 2026-27 से होंगे नए दाखिले
पीजी कोर्स से आयुर्वेद शिक्षा, शोध एवं अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
चंडीगढ़, 14 अक्टूबर – राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला (एनआईए) में आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा का दायरा बढ़ेगा। एनआईए में विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार होंगे, जिससे शोध, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) की ओर से एनआईए को 14 स्नातकोत्तर (पीजी पाठ्यक्रम) में 70 सीटों को मंजूरी दी है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में पीजी पाठ्यक्रम में नए दाखिले शुरू होंगे।
एनसीआईएसएम ने एनआईए, पंचकूला 70 सीटों के साथ 14 पीजी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए अनुमति पत्र (एलओपी) जारी किया है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के डीम्ड विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस के रूप में संचालित एनआईए, पंचकूला में आयुर्वेद की 14 विधाओं में उच्च शिक्षा के नए रास्ते खुले हैं। फिलहाल, संस्थान में बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) में 100 सीटें निर्धारित हैं। वर्ष 2024-25 में पहला बैच शुरू हुआ था। इसके बाद 2025-26 के बैच में विद्यार्थियों ने दाखिला लिया।
अब 2026-27 में तीसरे बैच के लिए काउंसलिंग चल रही है, जिसके दो राउंड पूरे हो चुके हैं।
डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी ने बताया कि आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा के अथक प्रयासों से यह उपलब्धि हासिल हुई है। 14 पीजी पाठ्यक्रमों की मंजूरी से आयुर्वेद शिक्षा, विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण और शोध-अनुसंधान को नई गति मिलेगी।
संस्थान के डीन इंचार्ज प्रोफेसर सतीश गंधर्व ने एनआईए को पीजी कोर्सों की मान्यता मिलने पर कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एनआईए उत्तर भारत में आयुर्वेद शिक्षा और चिकित्सा एवं अनुसंधान में नए केंद्र के तौर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। अब पीजी कोर्स शुरू होने से आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा मिलेगा और उच्च शिक्षा में विशेषज्ञता हासिल करने वाले युवाओं का सपना भी पूरा होगा।
आयुर्वेद की 14 विधाओं में मिलेगी उच्च शिक्षा : प्रो. गुलाब चंद पमनानी
डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी ने बताया कि नए पीजी पाठ्यक्रमों में आयुर्वेद संहिता, सिद्धांत एवं संस्कृत, रचना शारीर, क्रिया शारीर, द्रव्यगुण विज्ञान, रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, रोग निदान एवं विकृति विज्ञान, अगद तंत्र एवं विधि वैद्ययक, स्वस्थवृत्त एवं योग, कौमारभृत्य-बाल रोग, कायचिकित्सा, पंचकर्म, स्त्री रोग-प्रसूति तंत्र, शल्य तंत्र और शालाक्य तंत्र शामिल हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम में पांच-पांच सीटें निर्धारित की गई हैं। जबकि शालाक्य तंत्र की पांच सीटों में तीन कर्ण, नासा एवं मुख रोग चिकित्सा और दो नेत्र रोग चिकित्सा के लिए निर्धारित हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 70 पीजी सीटों पर युवाओं को दाखिले का मौका मिलेगा।
14 पीजी कोर्सों से आयुर्वेद की उच्च शिक्षा को मिलेगी नई गति : प्रो. संजीव शर्मा
एनआईए के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा का कहना है कि 14 स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के लिए 70 सीटों की मंजूरी मिलना संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। पीजी कोर्स से आयुर्वेद की उच्च शिक्षा को नई गति मिलेगी और विभिन्न विधाओं में विशेषज्ञ चिकित्सक तैयार होंगे।
प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से समाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें। नए पीजी पाठ्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों को शोध एवं अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
दुधारु पशुओं के लिए उन्नत चारे के बीज़ का प्रबंध करने की दिशा में कार्य करें अधिकारी : श्री श्याम सिंह राणा
कहा ,देसी गाय की डेयरी खोलने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करें
चंडीगढ़ ,14 अक्टूबर – हरियाणा के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे राज्य में दुधारु पशुओं के लिए उन्नत-चारे के बीज़ का प्रबंध करने की दिशा में कार्य करें ताकि लोगों को अच्छी गुणवत्ता का दूध मिल सके। इसके लिए उन्होंने कोई पॉलिसी बनाने की संभावनाएं तलाशने के भी निर्देश दिए।











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