हरियाणा सरकार के निर्देशों के आगे झुका विद्युत नियामक आयोग, 25 साल का लाइसेंस पाने वाली इलेवन पावर को फिलहाल राहत नहीं; सुनवाई की मांग भी खारिज
बाबूगिरी न्यूज़
पंचकूला, 28 अक्टूबर। हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर चल रहे विवाद में बुधवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में बिजली वितरण के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए समानांतर वितरण लाइसेंस के मामले में आगे की कार्यवाही रोकने का निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा सरकार की ओर से बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108 के तहत जारी निर्देश जब तक प्रभावी रहेंगे, तब तक इस मामले में आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी।
आयोग का यह आदेश 28 अक्टूबर 2026 को एचईआरसी याचिका संख्या 30/2026 में जारी हुआ। आदेश पर आयोग के सदस्य शिव कुमार और कार्यवाहक अध्यक्ष मुकेश गर्ग के हस्ताक्षर हैं।
हालांकि, इस आदेश में लाइसेंस को औपचारिक रूप से रद्द करने का उल्लेख नहीं है। आयोग ने सरकार के निर्देशों को प्रभावी मानते हुए मामले को आगे बढ़ाने से रोकने का फैसला किया है। ऐसे में गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी के माध्यम से बिजली वितरण शुरू करने की प्रस्तावित योजना पर फिलहाल रोक की स्थिति बन गई है।
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19 अक्टूबर को 25 साल के लिए दिया गया था लाइसेंस
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग ने 19 अक्टूबर 2026 को अपने आदेश में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में 25 साल की अवधि के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की अनुमति दी थी।
इस निर्णय के बाद राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर विवाद बढ़ गया था। इन जिलों में पहले से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम बिजली आपूर्ति और वितरण का काम कर रहा है। ऐसे में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस दिए जाने से सरकारी बिजली निगम की भूमिका, राजस्व, मौजूदा ढांचे और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे।
आयोग के 28 अक्टूबर के आदेश के अनुसार, कंपनी को 19 अक्टूबर के निर्णय के बाद एक सप्ताह के भीतर लाइसेंस की शर्तों को स्वीकार करने की सहमति देनी थी। इलेवन पावर ने 21 अक्टूबर को पत्र भेजकर लाइसेंस और उसकी शर्तों को स्वीकार कर लिया था।
इसके बाद कंपनी ने 23 अक्टूबर को आयोग को एक और पत्र भेजा। इसमें उसने बताया कि वह लागू कानूनों और नियामकीय व्यवस्था के अनुसार लाइसेंस को लागू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठा रही है।
सरकार ने 26 अक्टूबर को जारी किए थे निर्देश
इस मामले में निर्णायक घटनाक्रम 26 अक्टूबर को हुआ, जब हरियाणा सरकार के आयुक्त एवं सचिव की ओर से आयोग को पत्र भेजकर सरकार के निर्देशों से अवगत कराया गया।
आयोग के आदेश के मुताबिक, हरियाणा सरकार ने बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत निर्देश जारी करते हुए कहा कि राज्य में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस बनाया, परिचालित या प्रभावी नहीं किया जाए।
धारा 108 के तहत राज्य विद्युत नियामक आयोग को जनहित से जुड़े नीतिगत मामलों में राज्य सरकार की ओर से लिखित रूप में जारी निर्देशों के अनुसार कार्य करना होता है। इसी प्रावधान का उल्लेख करते हुए आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सरकार के निर्देश पूरे हरियाणा पर लागू होते हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के निर्देश लागू रहने के दौरान उसके सामने ऐसा कोई अलग न्यायिक निर्णय लेने का विषय नहीं बचता, जिसके तहत कंपनी के अधिकारों का नए सिरे से निर्धारण किया जाना हो।
निजी कंपनी ने मांगी थी सुनवाई, आयोग ने किया इनकार
इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने 23 अक्टूबर के पत्र में आयोग से अनुरोध किया था कि 19 अक्टूबर के लाइसेंस संबंधी आदेश या लाइसेंस से जुड़े किसी भी मामले, आवेदन, आपत्ति अथवा कार्यवाही से पहले कंपनी को सूचना दी जाए और उसे अपना पक्ष रखने के लिए सुनवाई का अवसर दिया जाए।
कंपनी का अनुरोध था कि उसके लाइसेंस से संबंधित किसी भी आगामी निर्णय से पहले उसे अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।
लेकिन आयोग ने 28 अक्टूबर के आदेश में कंपनी की इस मांग को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि हरियाणा सरकार ने धारा 108(1) के तहत लिखित निर्देश जारी किए हैं और वे पूरे राज्य में लागू होते हैं। आयोग के अनुसार, इन निर्देशों को प्रभावी करने के लिए उसके सामने अलग से किसी विवाद का निर्णय करने की स्थिति नहीं है।
इसी आधार पर आयोग ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की अग्रिम सूचना और सुनवाई का अवसर देने की मांग खारिज कर दी।
आयोग ने आदेश में क्या कहा?
आयोग के आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि सरकार के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस मामले में आगे कार्यवाही नहीं की जाएगी।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि हरियाणा सरकार की ओर से बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत जारी निर्देश जब तक प्रभावी रहेंगे, आयोग इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा।
इसका अर्थ यह है कि 19 अक्टूबर को लाइसेंस देने की अनुमति मिलने और कंपनी की ओर से लाइसेंस स्वीकार किए जाने के बावजूद, सरकार के नए निर्देशों के बाद आयोग ने इस मामले में आगे की प्रक्रिया रोक दी है।
यहां यह अंतर महत्वपूर्ण है कि आयोग ने लाइसेंस रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। उसने सरकार के निर्देशों के प्रभावी रहने तक आगे की कार्यवाही नहीं करने का निर्णय लिया है। इसलिए लाइसेंस की औपचारिक कानूनी स्थिति और भविष्य में इस पर होने वाली कार्रवाई अलग विषय बने रहेंगे।
बिजली कर्मचारियों के आंदोलन के बीच महत्वपूर्ण फैसला
हरियाणा में निजी बिजली वितरण लाइसेंस का मुद्दा बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं के संगठनों के विरोध के कारण भी चर्चा में रहा है। कर्मचारियों ने निजीकरण की आशंका जताते हुए आंदोलन किया था और गुरुग्राम तथा नूंह में निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले को वापस लेने की मांग उठाई थी।
इस मुद्दे पर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत भी हुई थी। अब आयोग के 28 अक्टूबर के आदेश से निजी वितरण लाइसेंस को लागू करने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक की स्थिति स्पष्ट हुई है।
हालांकि, आयोग के आदेश में कर्मचारियों के आंदोलन को निर्णय का कानूनी आधार नहीं बताया गया है। आदेश में मुख्य रूप से हरियाणा सरकार द्वारा धारा 108 के तहत जारी लिखित निर्देशों का हवाला दिया गया है।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में आगे की स्थिति हरियाणा सरकार के निर्देशों और उनके प्रभावी रहने की अवधि पर निर्भर करेगी। आयोग ने अपने आदेश में यह नहीं कहा है कि लाइसेंस हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया है। उसने स्पष्ट किया है कि सरकार के निर्देश लागू रहने तक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
आगे तीन सवाल महत्वपूर्ण रहेंगे:
* क्या हरियाणा सरकार समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के संबंध में अपने निर्देश जारी रखेगी या उनमें कोई बदलाव करेगी?
* क्या इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड इस आदेश या सरकार के निर्देशों को किसी कानूनी मंच पर चुनौती देगी?
* क्या भविष्य में आयोग लाइसेंस के मामले में दोबारा कार्यवाही शुरू करेगा?
इन सवालों के जवाब आगे जारी होने वाले आधिकारिक आदेशों और संबंधित पक्षों की कानूनी कार्रवाई से स्पष्ट होंगे।
हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर गुरुग्राम और नूंह का मामला फिलहाल ठहर गया है। 19 अक्टूबर को 25 साल के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस की अनुमति पाने वाली इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को अब सरकार के निर्देश लागू रहने तक इस प्रक्रिया में आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिला है। आयोग ने कंपनी की सुनवाई की मांग भी खारिज कर दी है। हालांकि, लाइसेंस रद्द होने का अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए इस घटनाक्रम को फिलहाल निजी बिजली वितरण योजना पर लगी रोक के रूप में ही देखा जाना चाहिए।











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