फेडरेशन ने प्रशासन से बोनस के साथ 2 प्रतिशत अतिरिक्त डीसी रेट, न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपये और नियमित करने की नीति बनाने की मांग की
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 28 अक्टूबर। दिवाली से पहले बोनस का भुगतान करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर चंडीगढ़ के अलग-अलग सरकारी विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। फेडरेशन ऑफ यूटी एम्प्लाइज एंड वर्कर्स, चंडीगढ़ के आह्वान पर बुधवार को बिजली विभाग के सेक्टर-43 और सेक्टर-40 स्थित कार्यालयों तथा बागवानी विभाग के सेक्टर-40, 29, 15, 16 और मनीमाजरा स्थित बूथों पर रैलियां निकालकर प्रशासन के प्रति रोष जताया गया।
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चंडीगढ़ प्रशासन, नगर निगम, सीपीडीएल और अन्य संस्थानों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों को दिवाली से पहले बोनस देने की मांग की। इसके साथ ही पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को दो प्रतिशत अतिरिक्त डीसी रेट का लाभ देने, लंबित एरियर का भुगतान करने, ईएसआई की वेतन सीमा बढ़ाने और ठेकेदारों के माध्यम से होने वाली भर्ती व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी उठाई गई।

आउटसोर्स कर्मचारियों को बोनस नहीं मिलने पर उठाए सवाल
रैलियों को संबोधित करते हुए फेडरेशन के अध्यक्ष गोपाल दत्त जोशी, प्रधान राजेंद्र कटोच, महासचिव हरकेश चंद, अतिरिक्त महासचिव अमरीक सिंह, उपाध्यक्ष बुधराम, गुरमीत सिंह, रंजीत सिंह, हरदीप सिंह, सुखविंदर सिंह सिद्धू, वीरेंद्र सिंह, सुरजीत सिंह, पान सिंह राणा, राजेंद्र पेरूमल, माता शरण और दर्शन सिंह सहित अन्य नेताओं ने कहा कि दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का उत्पादकता आधारित बोनस और केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लगभग 7,000 रुपये का तदर्थ बोनस दिए जाने की बात सामने आती है। वहीं, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को केवल 1,188 रुपये मिलने और सरकारी विभागों में 10 से 20 वर्ष तक काम कर चुके आउटसोर्स कर्मचारियों को बोनस नहीं मिलने पर उन्होंने सवाल उठाए।
वक्ताओं ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी पूरे महीने कठिन परिश्रम करते हैं, लेकिन कई बार उन्हें समय पर वेतन भी नहीं मिलता। इसके बावजूद बोनस के मामले में उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए प्रशासन से दिवाली से पहले बोनस का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रशासन को मुख्य नियोक्ता बताते हुए उठाया बोनस एक्ट का मुद्दा
फेडरेशन के नेताओं ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के मामले में चंडीगढ़ प्रशासन मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता। कर्मचारियों को समय पर वेतन देना, छुट्टियों का लाभ उपलब्ध कराना और लागू श्रम कानूनों के अनुसार बोनस सुनिश्चित करना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रशासन सीधे बोनस का भुगतान नहीं कर सकता तो आउटसोर्स भर्ती में ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों को बोनस दिलाने के लिए आदेश क्यों नहीं जारी किए जाते। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है, जबकि छोटी फैक्ट्रियों में काम करने वाले पात्र श्रमिकों को भी बोनस कानून के तहत 8.33 प्रतिशत बोनस दिए जाने का प्रावधान है।
फेडरेशन ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और कर्मचारियों को लागू कानूनों के अनुसार बोनस दिलाने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों के हितों की रक्षा नहीं हो पा रही है तो बिचौलियों को हटाकर कर्मचारियों को सीधे सरकारी विभागों या सरकारी एजेंसियों के अधीन किया जाना चाहिए।
पांच साल की सेवा पूरी करने वालों को दो प्रतिशत अतिरिक्त डीसी रेट देने की मांग
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने मांग की कि पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को दो प्रतिशत अतिरिक्त डीसी रेट का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही इस संबंध में लंबित एरियर का भी जल्द भुगतान किया जाए।
फेडरेशन ने न्यूनतम वेतन 42,000 रुपये निर्धारित करने और नियमित होने तक आउटसोर्स कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देने की मांग उठाई। नेताओं ने कहा कि लंबे समय से सरकारी विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा मिलनी चाहिए और उनके लिए नियमितीकरण की स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
ईएसआई की सीमा 50 हजार रुपये करने की मांग
कर्मचारियों ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के लिए वेतन सीमा को मौजूदा 21,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ तत्काल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
इसके अलावा फेडरेशन ने चंडीगढ़ के यूटी कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) लागू करने की मांग भी दोहराई। नेताओं के अनुसार, कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
निकाले गए कर्मचारियों की बहाली और निजीकरण रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने पब्लिक हेल्थ, स्मार्ट सिटी और अग्निशमन सहित विभिन्न विभागों से निकाले गए कर्मचारियों को दोबारा ड्यूटी पर बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही स्ट्रीट लाइट, पार्किंग और ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी सेवाओं के निजीकरण को रद्द करने की मांग भी उठाई गई।
फेडरेशन ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। लंबे समय से विभागों में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को रोजगार की सुरक्षा, समय पर वेतन और नियमानुसार सभी लाभ उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
3 नवंबर के धरने और 14 नवंबर की कन्वेंशन में भाग लेने की अपील
फेडरेशन ने चंडीगढ़ प्रशासन से सभी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। नेताओं ने कर्मचारियों से 3 नवंबर को प्रस्तावित धरने को सफल बनाने और 14 नवंबर को सेक्टर-29 स्थित भकना भवन में आयोजित होने वाली कन्वेंशन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया।
फेडरेशन का कहना है कि यदि आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारियों का आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल कर्मचारियों की प्रमुख मांग दिवाली से पहले बोनस का भुगतान, अतिरिक्त डीसी रेट का लाभ और लंबित वेतन व एरियर का भुगतान सुनिश्चित करना है।












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