छोटे-छोटे हिस्सों में काम कराने पर मांगा जवाब; अगली बैठक में विस्तृत ब्योरा पेश करने की मांग — फ्लोर वाइज प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने के प्रस्ताव को सदन की मंजूरी
बाबूगिरी न्यूज़
चंडीगढ़, 28 अक्टूबर। चंडीगढ़ नगर निगम की बुधवार को हुई हाउस मीटिंग में अधिकारियों की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों को मंजूरी देने की प्रक्रिया को लेकर तीखी चर्चा हुई। बैठक में पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने निगम अधिकारियों द्वारा अपने स्तर पर करवाए गए करीब 62 करोड़ रुपये के कार्यों का पूरा हिसाब मांगते हुए सवाल उठाया कि जब शहर के विकास कार्यों से जुड़े फैसले लेने के लिए सदन मौजूद है, तो इतने बड़े स्तर पर काम किस प्रक्रिया के तहत करवाए गए।
गाबी ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कई कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करवाया। उन्होंने मांग की कि इन सभी कार्यों का विस्तृत विवरण अगली हाउस मीटिंग में प्रस्तुत किया जाए, ताकि पार्षदों को पता चल सके कि किन कार्यों पर कितनी राशि खर्च की गई और उन्हें किस आधार पर मंजूरी दी गई।
बैठक में शहरवासियों से जुड़े प्रॉपर्टी टैक्स के मुद्दे पर भी महत्वपूर्ण निर्णय हुआ। गाबी की मांग पर फ्लोर वाइज प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने के प्रस्ताव को सदन ने मंजूरी दे दी। इससे उन भवनों के अलग-अलग मंजिलों के मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां एक ही इमारत में कई लोगों का स्वामित्व है और टैक्स संबंधी देनदारी के कारण अलग-अलग मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
62 करोड़ के कार्यों पर पार्षदों और अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल
पार्षद गाबी ने सदन में कहा कि पार्षद जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि होते हैं और उनके वार्डों में विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव नगर निगम के सामने रखे जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों की ओर से प्रस्तावित कार्यों पर कई बार अधिकारियों द्वारा आपत्तियां उठाई जाती हैं और मंजूरी मिलने के बाद भी उन्हें पूरा कराने में देरी होती है।
गाबी के अनुसार, पार्षदों की ओर से लगभग 84 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए गए, जबकि अधिकारियों ने कथित तौर पर अपने स्तर पर करीब 62 करोड़ रुपये के कार्य छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित करके करवाए। उन्होंने इस अंतर और कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निगम प्रशासन से जवाब मांगा।
उन्होंने मांग की कि निगम अधिकारी अगली हाउस मीटिंग में इन सभी कार्यों की सूची, प्रत्येक कार्य की लागत, स्वीकृति की प्रक्रिया और संबंधित विवरण सदन के सामने रखें। इससे पार्षदों को विकास कार्यों पर खर्च हुई राशि की जानकारी मिल सकेगी और प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नगर निगम की बैठकों में पार्षद पहले भी वार्डों में प्रस्तावित विकास कार्यों को मंजूरी मिलने के बावजूद अधिकारियों की ओर से देरी किए जाने की शिकायतें उठा चुके हैं। सितंबर में भी गाबी ने अपने वार्ड में शौचालयों के पुनर्निर्माण से संबंधित प्रस्तावों पर आपत्तियां उठाए जाने का मुद्दा उठाया था।
फ्लोर वाइज प्रॉपर्टी टैक्स से भवन मालिकों को राहत
बैठक में प्रॉपर्टी टैक्स जमा कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़ा मुद्दा भी उठा। पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि एक ही इमारत में अलग-अलग मंजिलों के मालिक होने की स्थिति में किसी एक हिस्सेदार द्वारा टैक्स जमा नहीं कराने से दूसरे मालिकों को भी परेशानी होती है।
उन्होंने मांग की कि जिस मंजिल का मालिक अपना बकाया टैक्स जमा करना चाहता है, उससे उसके हिस्से का टैक्स अलग से स्वीकार किया जाए। इस प्रस्ताव को सदन ने मंजूरी दे दी।
इस फैसले से व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियों में अलग-अलग मंजिलों के मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अलग-अलग मंजिलों के लिए कर निर्धारण, संपत्ति की पृथक पहचान और बकाया राशि से संबंधित विस्तृत प्रक्रिया निगम के लागू नियमों के अनुसार स्पष्ट होगी।
इस विषय पर नगर निगम की बैठक के एजेंडे में संपत्ति कर उपनियमों में संशोधन और भवन के अलग-अलग हिस्सों के लिए पृथक संपत्ति पहचान संख्या जारी करने की प्रक्रिया सरल बनाने का प्रस्ताव भी शामिल था।
बैठक के एजेंडे में कर्मचारियों के वेतन और अन्य नागरिक मुद्दे भी शामिल
28 अक्टूबर की नगर निगम की 366वीं सामान्य सदन बैठक के एजेंडे में संपत्ति कर प्रक्रिया के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल थे। इनमें सफाई कर्मचारियों के वेतन का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, शहर में नशा विरोधी अभियान की समीक्षा, आगामी रोज फेस्टिवल के आयोजन और मनीमाजरा स्थित निगम कार्यालय में अग्निशमन व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव शामिल थे।
इनमें लायन सर्विसेज के सफाई कर्मचारियों को हर महीने की सात तारीख तक वेतन देने और भुगतान अनुपालन की जानकारी निगम को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी एजेंडे में था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2027 के रोज फेस्टिवल के लिए एक करोड़ रुपये खर्च करने तथा मनीमाजरा स्थित निगम उपकार्यालय में लगभग 62 लाख रुपये की अग्निशमन व्यवस्था स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाना था।
इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय की अलग से पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें पारित प्रस्तावों के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
अब अगली बैठक में अधिकारियों के जवाब पर रहेगी नजर
नगर निगम की हाउस मीटिंग में 62 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का हिसाब मांगने का मुद्दा अब आगामी बैठक के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। यदि निगम प्रशासन अगली बैठक में कार्यों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है, तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित कार्य किन नियमों, स्वीकृतियों और प्रक्रियाओं के तहत करवाए गए।
फिलहाल, पार्षद गाबी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की है, जबकि फ्लोर वाइज प्रॉपर्टी टैक्स के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से संपत्ति मालिकों को राहत मिलने की संभावना है। इस बैठक में उठे मुद्दे नगर निगम में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका, प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और शहर के विकास कार्यों की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।












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