मुआवजे, भुगतान तिथि व पुनर्वास उपायों पर उपायुक्त को विस्तृत रिपोर्ट के निर्देश
चंडीगढ़, 12 जनवरी 2026: सीवर की सफाई के दौरान दो व्यक्तियों की दर्दनाक मौत के मामले में हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे मानवाधिकारों पर गंभीर कलंक करार दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोषियों की जवाबदेही तय किए बिना किसी भी स्थिति में मामले को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जाएगा।
आयोग के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति ललित बत्रा तथा सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया से गठित पूर्ण आयोग द्वारा पारित आदेश में कहा गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में मैनुअल एंट्री कराना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। सर्वोच्च न्यायालय ने सफाई कर्मचारी आंदोलन बनाम भारत संघ मामले में ऐसे मामलों में मृतक के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजा अनिवार्य रूप से देने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने पुलिस अधीक्षक, हांसी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए पाया कि जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी है और अब तक जिम्मेदार व्यक्तियों की स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं की गई है। रिपोर्ट में जिम्मेदारी निर्धारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जबकि जिला अटॉर्नी की राय में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। आयोग ने इसे मानव जीवन की हानि से जुड़े गंभीर मामले में जांच एजेंसी की उदासीनता करार दिया।
आयोग ने यह भी पाया कि एफआईआर संख्या 326 दिनांक 19.10.2025 की जांच में विशेषकर जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान और जवाबदेही तय करने के संदर्भ में गंभीर कमी है। इस पर सख्ती दिखाते हुए आयोग ने जांच अधिकारी और उप पुलिस अधीक्षक (अपराध), हांसी को समस्त मूल रिकॉर्ड सहित व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के प्रमुख निर्देश:
उपायुक्त, हिसार छह सप्ताह के भीतर मृतक श्रमिकों के परिवारों को दी गई/स्वीकृत राहत व मुआवजे, भुगतान की तिथि, अंतरिम सहायता तथा आश्रितों के पुनर्वास हेतु प्रस्तावित उपायों पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
नगर परिषद, हांसी (या नगर सीमा से बाहर होने की स्थिति में ग्राम पंचायत, ग्राम रामपुरा, तहसील हांसी, जिला हिसार) छह सप्ताह के भीतर घटना की परिस्थितियों, होटल परिसर के लाइसेंस व निरीक्षण तथा मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के उल्लंघन पर रिपोर्ट दाखिल करे।
पुलिस अधीक्षक, हांसी छह सप्ताह के भीतर दर्ज एफआईआर, लागू धाराओं तथा मृत्यु के लिए जवाबदेही तय करने हेतु जांच की प्रगति पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
होटल प्रबंधन तत्काल बिना सुरक्षा उपकरणों, गैस परीक्षण, रेस्क्यू स्टैंडबाय, ऑक्सीजन सिलेंडर व मास्क तथा यंत्रीकरण के सेप्टिक/सीवर टैंक में किसी भी प्रकार की मैनुअल एंट्री पर रोक लगाए और छह सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे।
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और गंभीर आरोपों को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आदेश में उल्लिखित बिंदुओं पर की गई विस्तृत कार्यवाही रिपोर्ट अगली सुनवाई (15 जनवरी 2026) से एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने दोहराया कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई में मैनुअल एंट्री कानूनन अपराध है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।











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