सड़क संकेतक, रोड मार्किंग और डिवाइडर सुधार पर सभी एजेंसियों को कड़े निर्देश
चंडीगढ़, 16 जनवरी 2026: हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि नागरिकों का सार्वजनिक सड़कों का सुरक्षित उपयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। आयोग ने कहा कि सड़क अवसंरचना में किसी भी प्रकार की लापरवाही केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि मानव अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
शिकायत संख्या 642/17/2024 पर सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने पाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़क संकेतक, थर्मोप्लास्टिक रोड मार्किंग, कैट-आई, डिवाइडर और अन्य सुरक्षा उपायों को लेकर विभागों के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं है। इस पर आयोग ने एनएचएआई, पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर), हरियाणा राज्य सड़क एवं पुल विकास निगम (HSRDC), एचएसआईआईडीसी, एचएसएएमबी, शहरी स्थानीय निकाय, एचएसवीपी, विकास एवं पंचायत विभाग और यातायात पुलिस समेत सभी संबंधित एजेंसियों से विस्तृत एवं अद्यतन अनुपालन रिपोर्ट तलब की है।
यातायात पुलिस की भूमिका पर सख्त टिप्पणी
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं राजमार्ग (हरियाणा) के दायित्व स्पष्ट करते हुए आयोग ने कहा कि नागरिकों के जीवन और सुरक्षा की रक्षा करना राज्य का संवैधानिक कर्तव्य है। इस दायित्व के निर्वहन में यातायात पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयोग ने निर्देश दिए कि यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने, हाई-बीम के दुरुपयोग और लेन अनुशासन तोड़ने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो।
साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और “ब्लैक स्पॉट्स” की पहचान कर संबंधित सड़क स्वामी एजेंसियों को सुधारात्मक सुझाव तुरंत भेजने, नियमित गश्त, अस्थायी चेतावनी संकेतक लगाने और सड़क अनुरक्षण एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने सभी प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की प्रमुख सड़कों पर केंद्रीय डिवाइडर का समुचित विकास और नियमित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए। दो से छह लेन की सड़कों पर पर्याप्त संख्या में कैट-आई और रेट्रो-रिफ्लेक्टिव रोड स्टड्स लगाए जाएं। छह या उससे अधिक लेन वाली सड़कों पर डिवाइडर के दोनों ओर डिलिनिएटर्स लगाने के आदेश दिए गए हैं।
हाई-बीम लाइट से होने वाली चकाचौंध रोकने के लिए डिवाइडर पर पौधारोपण, ट्रिपल रोड मार्किंग वाले स्थानों पर अतिरिक्त रिफ्लेक्टिव स्टड्स, जंक्शन और ब्लैक स्पॉट्स पर रंबल स्ट्रिप्स लगाने पर भी जोर दिया गया है।
कोहरे से निपटने के लिए विशेष इंतजाम
कोहरे को ध्यान में रखते हुए आयोग ने रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप, चेतावनी प्रणाली से लैस हाईवे पेट्रोल वाहनों की तैनाती, इलेक्ट्रॉनिक बिलबोर्ड्स के माध्यम से सड़क सुरक्षा संदेश प्रसारित करने और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में क्रैश बैरियर व ट्रैफिक कैल्मिंग उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं। वाहन चालकों को एसएमएस, व्हाट्सऐप और कॉल्स के जरिए समय पर चेतावनी और जानकारी देने को भी कहा गया है।
फोटोग्राफिक साक्ष्यों सहित रिपोर्ट अनिवार्य
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे फोटोग्राफिक साक्ष्यों सहित अनुपालन रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को होगी।
आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सड़क सुरक्षा के प्रति किसी भी विभाग की उदासीनता मानव जीवन को खतरे में डालने के समान है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।














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