लिंक ऑफिसर नियुक्त न होने से अहम शासकीय आदेशों पर हस्ताक्षर को लेकर असमंजस — एडवोकेट हेमंत कुमार
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की 9 जनवरी को हुई हार्ट सर्जरी के बाद एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राज्य के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि मुख्य सचिव की अनुपस्थिति में महत्वपूर्ण सरकारी फाइलों और आदेशों पर स्वीकृति किसके द्वारा दी जा रही है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि हरियाणा सरकार की स्थापित व्यवस्था के तहत वरिष्ठ और महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारी के अवकाश, प्रशिक्षण, चुनावी ड्यूटी या दो दिनों से अधिक अनुपस्थिति की स्थिति में लिंक ऑफिसर नियुक्त किया जाता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मुख्य सचिव पद के लिए अब तक कोई लिंक ऑफिसर अधिसूचित नहीं किया गया है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र, फिर भी कार्रवाई लंबित
हेमंत कुमार ने इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि 9 जनवरी के बाद मुख्य सचिव कार्यालय से कई अहम आदेश जारी किए गए हैं, जिनमें सरकारी दस्तावेजों में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ जैसे शब्दों के उपयोग पर रोक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EWS) के लिए वार्षिक आय सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये करना शामिल है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि इन आदेशों पर मुख्य सचिव के तौर पर हस्ताक्षर किस अधिकारी ने किए।
पूर्व उदाहरण मौजूद, फिर भी देरी
हेमंत कुमार ने याद दिलाया कि 15 मार्च 2024 को तत्कालीन मुख्य सचिव संजीव कौशल के अर्जित अवकाश पर जाने के बाद सरकार ने टी.वी.एस.एन. प्रसाद को अतिरिक्त रूप से मुख्य सचिव का कार्यभार सौंपा था। इसी तरह, अक्टूबर-नवंबर 2024 में भी अनुराग रस्तोगी को अंतरिम तौर पर मुख्य सचिव बनाया गया था, जब नियमित नियुक्ति में विलंब हुआ था।
फरवरी 2025 में विवेक जोशी के निर्वाचन आयुक्त बनने के बाद अनुराग रस्तोगी को नियमित मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था और उन्हें 30 जून 2026 तक सेवा विस्तार भी मिला है। इसके बावजूद उनकी अस्वस्थता के मौजूदा दौर में कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
डॉ. सुमिता मिश्रा को दिया जा सकता है अतिरिक्त कार्यभार
हेमंत कुमार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में गृह, जेल और न्याय-प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा को मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार दिया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने सुझाव दिया कि चूंकि मुख्य सचिव और वित्तायुक्त राजस्व (FCR) राज्य नौकरशाही के दो सर्वोच्च पद हैं, इसलिए बेहतर होगा कि पहले डॉ. सुमिता मिश्रा को औपचारिक रूप से FCR एवं राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया जाए और उसके बाद उन्हें मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा जाए।
बजट से पहले वित्त विभाग में भी स्पष्टता जरूरी
वित्त एवं योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का कार्यभार भी अनुराग रस्तोगी के पास था। हेमंत कुमार ने कहा कि आगामी फरवरी-मार्च में राज्य विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया जाना है, ऐसे में वित्त विभाग में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की नियमित नियुक्ति बेहद जरूरी है, ताकि प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों में किसी तरह की असमंजस की स्थिति न रहे।
कुल मिलाकर, मुख्य सचिव जैसे संवेदनशील और सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर वैकल्पिक व्यवस्था न होना न सिर्फ प्रशासनिक शुचिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि शासन की निरंतरता और पारदर्शिता के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है।











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