April 6, 2026 7:21 am

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बसंत पंचमी के दिन बन रहा दुर्लभ संयोग, इस मुहूर्त में पूजा करने से मिलेगी मां सरस्वती की विशेष कृपा

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता

बसंत पंचमी 2026: हर साल माघ माह की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है।ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था, इसलिए बसंत पंचमी को सरस्वती जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है।

 

इसके अलावा बसंत पंचमी को श्री पंचमी और सरस्वती पूजा के नाम भी जाना जाता है। इस दिन विद्या और कला की देवी विधिपूर्वक पूजा करने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है।ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि इस साल बसंत पंचमी का त्यौहार 23 जनवरी को मनाया जाएगा।” इस कई दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। तो आइए जानते हैं बसंत पंचमी के दिन बनने वाले शुभ योग और मुहूर्त के बारे में।

 

बसंत पंचमी 2026 शुभ योग

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही इस दिन चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु के होने से गजकेसरी का शुभ संयोग भी बन रहा है। गजकेसरी योग बहुत ही शुभ माना जाता है। इस योग में देवी सरस्वती की पूजा करने से छात्रों को उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा 23 जनवरी यानी बसंत पंचमी के दिन बुधादित्य योग का विशेष योग भी बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग करियर, शिक्षा और व्यापार में तरक्की देने वाला माना जाता है। इसके अलावा बसंत पंचमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किए गए कार्यों में सफलता मिलती है।

 

बसंत पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि पंचांग के अनुसार, माघ माह की पंचमी तिथि का आरंभ 23 जनवरी 2026 को 02:28 am पर होगा। पंचमी तिथि का समापन 24 जनवरी को 01:46am पर होगा। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।

 

सरस्वती पूजा के दिन लगाएं इन चीजों का भोग

बूंदी या बूंदी के लड्डू

बेर, केला, संतरा, अनार और सेब

खीर

पीली मिठाई

केसर भात

मीठे चावल

 

बसंत पंचमी के दिन जरूर करें सरस्वती वंदना का पाठ

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं।

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥॥

 

बसंत पंचमी आज

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि हर साल माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। यह दिन बसंत ऋतु के शुरुआत का भी प्रतीक है। इस दिन ज्ञान, कला एवं संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा का विधान है। कहा जाता है कि इस दिन पूजा-पाठ करने से जीवन के अंधकार का नाश होता है। साथ ही सभी कामों में सफलता मिलती है।

 

बसंत पंचमी 2026 मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को सुबह 02 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 24 जनवरी को सुबह 01 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐसे में 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।

बसंत पंचमी पर विशेष मंत्रों का जाप

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि इस दिन विद्या और बुद्धि की देवी के आशीर्वाद के लिए कुछ विशेष मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है।

बीज मंत्र: ऐं स्वस्त्यै नमः

इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से विद्या, बुद्धि और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।

बसंत पंचमी का महत्व: केवल पूजा नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन का संकेत

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि बसंत पंचमी सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं है। यह बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक भी है। इस समय प्रकृति में हरियाली, उल्लास और नई ऊर्जा देखने को मिलती है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले फूलों व पकवानों से मां सरस्वती की पूजा करते हैं।

बसंत पंचमी पर बनाएं ये खास प्रसाद

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इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग के पकवान अर्पित किए जाते हैं। खास व्यंजन:

• मीठे पीले चावल – केसर, चीनी और सूखे मेवों के साथ बनाया जाता है।

• केसर-सूजी का हलवा – घी, सूजी और मेवों से बना स्वादिष्ट हलवा।

• बेसन के लड्डू – नरम और मां सरस्वती को प्रिय।

बसंत पंचमी क्यों है खास

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्माजी ने जब अपने कमंडल से जल छिड़का, तो हाथ में वीणा लिए देवी सरस्वती प्रकट हुईं। इसलिए इस दिन नई विद्या, संगीत और कला की शुरुआत के लिए पूजा की जाती है। यह पर्व भारत, नेपाल और पश्चिमोत्तर बांग्लादेश में धूमधाम से मनाया जाता है।

 

बसंत पंचमी 2026: सरस्वती चालीसा से दूर होंगे सभी कष्ट, इस बार वसंत पंचमी पर अवश्य करें इसका पाठ

*ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि वसंत पंचमी पर सरस्वती चालीसा का पाठ करना शुभ होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के सुख में वृद्धि और कला-कौशल में निखार आता है।

इस साल 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जिसपर मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, वसंत पंचमी ‘बसंत’ के आगमन का प्रतीक होता है। इस तिथि पर देवी सरस्वती की उपासना व उनके नामों का जाप करने से जीवन में न केवल ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है बल्कि उनके घर में भी सकारात्मकता और बरकत बनी रहती है। हालांकि, मां सरस्वती की विशेष कृपा पाने के लिए सरस्वती चालीसा का पाठ अधिक फलदायी माना गया है। इससे साधक की स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि होती है। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली चालीसा पाठ को जानते हैं।

 

सरस्वती चालीसा पाठ लाभ

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी के पावन अवसर पर सरस्वती चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है। इससे ज्ञान में निरंतर वृद्धि होती है, कला और रचनात्मकता में निखार आता है। यही नहीं करियर और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता के योग भी बनते हैं। वहीं इस पाठ से मन शांत भी रहता है और वाणी की देवी मां सरस्वती की विशेष कृपा मिलती हैं।

 

वसंत पंचमी तिथि 2026

ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 02:28 मिनट पर शुरू होगी।

 

यह तिथि 24 जनवरी को रात 01:46 बजे समाप्त होगी।

`23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी का पर्व मान्य होगा।

 

सरस्वती पूजा मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक बना रहेगा।

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक रहने वाला है।

 

सरस्वती चालीसा पाठ

।। दोहा ।।

जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥`

पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु। दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हंतु॥`

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥

जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥

रूप चतुर्भुज धारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥

जग में पाप बुद्धि जब होती। तब ही धर्म की फीकी ज्योति॥

तब ही मातु का निज अवतारी। पाप हीन करती महतारी॥

वाल्मीकिजी थे हत्यारा। तव प्रसाद जानै संसारा॥

रामचरित जो रचे बनाई। आदि कवि की पदवी पाई॥

कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥

तुलसी सूर आदि विद्वाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥

तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा। केव कृपा आपकी अम्बा॥

करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥

पुत्र करहिं अपराध बहूता। तेहि न धरई चित माता॥

राखु लाज जननि अब मेरी। विनय करउं भांति बहु तेरी॥

मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥

मधुकैटभ जो अति बलवाना।बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना॥

समर हजार पाँच में घोरा। फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा॥

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला। बुद्धि विपरीत भई खलहाला॥

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी। पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥

चंड मुण्ड जो थे विख्याता। क्षण महु संहारे उन माता॥

रक्त बीज से समरथ पापी। सुरमुनि हदय धरा सब काँपी॥

काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।बारबार बिन वउं जगदंबा॥

जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा। क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा॥

भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥

एहिविधि रावण वध तू कीन्हा। सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा॥

को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥

विष्णु रुद्र जस कहिन मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥

रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥

दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥

नृप कोपित को मारन चाहे। कानन में घेरे मृग नाहे॥

सागर मध्य पोत के भंजे। सअति तूफान नहिं कोऊ संगे॥

भूत प्रेत बाधा या दुःख में। हो दरिद्र अथवा संकट में॥

नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करई न कोई॥

पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि भाई॥

करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा॥

धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥

भक्ति मातु की करैं हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥

बंदी पाठ करें सत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥

रामसागर बाँधि हेतु भवानी। कीजै कृपा दास निज जानी॥

॥दोहा॥

मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप।डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप॥`

बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु। राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु॥`

ऊँ_श्रीमहासरस्वती_दैव्यै_नम:

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Author: BabuGiri Hindi

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