August 29, 2026 12:58 pm

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चंडीगढ़ में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत बड़ा मामला: घर से दो गुलाबी छल्लेदार तोते बरामद, आरोपी के खिलाफ दर्ज केस

चंडीगढ़, 28 जनवरी 2026 – शहर में घरेलू स्तर पर संरक्षित पक्षियों को पालने की बढ़ती प्रवृत्ति पर एक बार फिर सख्त कार्रवाई हुई है। वन विभाग ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक नया मामला दर्ज किया है, जिसमें एक स्थानीय निवासी के घर से दो गुलाबी छल्लेदार तोते (Rose-ringed Parakeet या Indian Ringneck Parakeet) जब्त किए गए हैं।
घटना का पूरा विवरण
रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर जतिंदर सिंह, जो पर्यावरण भवन, सेक्टर-19-बी, चंडीगढ़ में पदस्थ हैं, ने शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत के आधार पर संदीप कुमार, पुत्र स्वर्गीय रामपाल, निवासी मकान क्रमांक 2445, सेक्टर-24/सी, चंडीगढ़ के खिलाफ मामला संख्या 24 दर्ज किया गया है।
24 जनवरी 2026 को वन विभाग की टीम ने आरोपी के आवास पर छापेमारी की, जिसमें दो गुलाबी छल्लेदार तोते बरामद हुए। ये पक्षी पिंजरे में कैद अवस्था में पाए गए थे।
कानूनी धाराएं और प्रावधान
यह मामला वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की निम्न धाराओं के तहत दर्ज है:
धारा 9 – संरक्षित वन्यजीवों का शिकार, पकड़ना या नुकसान पहुंचाना प्रतिबंधित।
धारा 39(3)(ए) – संरक्षित वन्यजीवों या उनके हिस्सों का अवैध कब्जा, हस्तांतरण या व्यापार पर रोक।
धारा 51 – इन उल्लंघनों पर सजा का प्रावधान।
गुलाबी छल्लेदार तोते की स्थिति
गुलाबी छल्लेदार तोता (वैज्ञानिक नाम: Psittacula krameri) भारत में सबसे आम पक्षियों में से एक है, लेकिन यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IV (Schedule IV) में शामिल है। इस अनुसूची के तहत आने वाले सभी देशी पक्षियों (जैसे तोते, मैना, आदि) को पालतू बनाना, कैद में रखना, खरीदना-बेचना या अवैध कब्जे में रखना पूरी तरह गैरकानूनी है।
अधिनियम के अनुसार, ऐसे अपराध पर 3 वर्ष तक की कैद, 25,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यदि मामला गंभीर या दोहराया गया पाया जाता है, तो सजा और जुर्माना बढ़ सकता है।
क्यों हो रही ऐसी कार्रवाई?
भारत में लाखों लोग तोतों को “घरेलू पालतू” समझकर पालते हैं, लेकिन 1972 के अधिनियम (और 2002-2003 के संशोधनों) के बाद सभी देशी पक्षी संरक्षित घोषित कर दिए गए हैं। केवल विदेशी प्रजातियां (जैसे बजरीगर, कॉकटेल) पालने की अनुमति है, बशर्ते वे CITES नियमों के अनुरूप हों।
अवैध व्यापार में पक्षियों के पंख काटे जाते हैं, चोंच ट्रिम की जाती है, जो क्रूरता है और प्राकृतिक आबादी को नुकसान पहुंचाता है। वन विभाग और एनजीओ लगातार ऐसे मामलों पर नजर रख रहे हैं।
वन विभाग की अपील और सलाह
वन विभाग ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी के पास ऐसे संरक्षित पक्षी हैं, तो वे उन्हें तुरंत निकटतम वन कार्यालय, चिड़ियाघर या वन्यजीव बचाव केंद्र में सौंप दें। इससे कानूनी कार्रवाई से बचा जा सकता है और पक्षी अपनी प्राकृतिक स्वतंत्रता में लौट सकते हैं।
संदेश: “पालतू तोता” सोचकर पिंजरे में रखना अब अपराध है। वन्यजीव जंगल में स्वतंत्र रहें, यही उनकी असली खुशी है।
जांच जारी है और जल्द ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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