नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह कई मायनों में ऐतिहासिक अवसर होगा, क्योंकि आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया जा रहा है। इसके साथ ही निर्मला सीतारमण लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन जाएंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का यह 15वां केंद्रीय बजट होगा। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद यह दूसरा पूर्ण बजट भी माना जा रहा है।
सुबह 11 बजे लोकसभा में होगा बजट पेश
संसद के बजट सत्र के तहत वित्त मंत्री सुबह 11 बजे लोकसभा में बजट प्रस्तुत करेंगी। इसके साथ ही वह राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, 2003 की धारा 3(1) के तहत दो आवश्यक विवरण सदन के पटल पर रखेंगी। कार्यसूची के अनुसार, वित्त मंत्री लोकसभा में वित्त विधेयक, 2026 को पेश करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव भी रखेंगी और औपचारिक रूप से विधेयक प्रस्तुत करेंगी। वित्त विधेयक सरकार के वित्तीय प्रस्तावों को कानूनी मान्यता प्रदान करता है।
आर्थिक चुनौतियों के बीच पेश हो रहा बजट
वित्त वर्ष 2026-27 का बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था कई वैश्विक और घरेलू चुनौतियों से जूझ रही है। हालांकि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और महंगाई अपने हालिया उच्चतम स्तर से कुछ कम हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बरकरार है।
भू-राजनीतिक तनाव, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव, प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा असमान मौद्रिक नीति और बढ़ता वैश्विक व्यापार विखंडन आर्थिक संभावनाओं पर दबाव बना रहे हैं। इन चुनौतियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ लगाए जाने से वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और बढ़ गई है।
आर्थिक सर्वेक्षण पहले ही हो चुका है पेश
बजट से एक दिन पहले, गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण संसद में प्रस्तुत किया था। बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने की यह परंपरा अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और आगामी राजकोषीय रणनीति की पृष्ठभूमि तैयार करती है।
अब देश की निगाहें इस बजट पर टिकी हैं, जिससे सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं, विकास रणनीति और आम जनता को मिलने वाली राहतों की दिशा स्पष्ट होगी।












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