June 15, 2026 4:06 pm

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CHANDIGARH: फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कीम का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 14.40 लाख की ठगी का खुलासा

चंडीगढ़। यूटी चंडीगढ़ के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कीम के जरिए ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला एफआईआर नंबर 06 दिनांक 13.01.2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं में दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई एसपी साइबर यूटी चंडीगढ़ गीताांजलि खंडेलवाल, आईपीएस के नेतृत्व में, डीएसपी साइबर क्राइम एवं आईटी ए. वेंकटेश के मार्गदर्शन तथा सेक्टर-17 स्थित साइबर क्राइम थाना प्रभारी इंस्पेक्टर एरम रिज़वी की निगरानी में की गई। पुलिस की इस त्वरित और समन्वित कार्रवाई को क्षेत्र में बढ़ते साइबर अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

गिरफ्तार आरोपी
विवेक, पुत्र यशपाल, निवासी मकान नंबर 970, विकास नगर, मोहाली (पंजाब), उम्र 32 वर्ष
ऋषभ गांधी, पुत्र राजीव कुमार गांधी, निवासी ढकोली, पंजाब, उम्र 25 वर्ष
मामला कैसे सामने आया
यह केस मनीमाजरा निवासी सनी कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह यूट्यूब पर एक विज्ञापन के जरिए उच्च रिटर्न का झांसा देने वाली ऑनलाइन निवेश स्कीम के संपर्क में आया। लिंक पर क्लिक करने के बाद उसे व्हाट्सएप के जरिए संपर्क किया गया और “ADVPMA” नामक एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया गया।
ऐप में दिखाए जा रहे नकली मुनाफे के जरिए ठगों ने उसे विश्वास में लेकर अलग-अलग चरणों में पैसे ट्रांसफर करवाए। 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच पीड़ित ने अपने एचडीएफसी और एसबीआई खातों से कुल 14 लाख 40 हजार रुपये एनईएफटी और आईएमपीएस के जरिए भेज दिए। जब उसने रकम निकालने की कोशिश की, तो आरोपी संपर्क से बाहर हो गए।

जांच में हुआ खुलासा
जांच के दौरान सीएएफ, सीडीआर और बैंक खातों के केवाईसी विश्लेषण से पता चला कि 2 जनवरी 2026 को 1.60 लाख रुपये चंडीगढ़ सेक्टर-38डी स्थित प्राइम एंटरप्राइजेज के नाम एक्सिस बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए थे, जो आरोपी विवेक के नाम पर था।
इसके बाद पुलिस ने सेक्टर-56 चंडीगढ़ और पीर मुछल्ला, ढकोली (पंजाब) में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी साइबर ठगों को कमीशन के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका इस्तेमाल निवेश ठगी, डिजिटल अरेस्ट और वर्क-फ्रॉम-होम जैसे घोटालों में किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, विवेक ने आर्थिक तंगी के चलते अपना बैंक अकाउंट किट अन्य साथियों को सौंपने की बात कबूल की, जबकि ऋषभ गांधी ने दिल्ली और नोएडा से सक्रिय ठगों के लिए बैंक खातों की व्यवस्था कराने में भूमिका निभाई। मामले में आगे की जांच जारी है और और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
पुलिस की अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले “गारंटीड रिटर्न” वाले निवेश विज्ञापनों से सावधान रहें। किसी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड न करें और किसी भी निवेश से पहले कंपनी व ऐप की वैधता की स्वतंत्र जांच जरूर करें।
किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत नजदीकी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान की भरपाई की जा सके।

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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