1 फरवरी को आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाई गई शहादत
आईएएस संजीव वर्मा सहित सैकड़ों लोगों ने दी श्रद्धांजलि
चंडीगढ़/यमुनानगर। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल के प्रधान सचिव रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.एल. वर्मा की शहादत का 34वां शहीदी दिवस आज 1 फरवरी को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर को आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाते हुए प्रदेशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पैतृक गांव ललाहड़ी कला में मुख्य कार्यक्रम
मुख्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम एम.एल. वर्मा के पैतृक गांव ललाहड़ी कला (जिला यमुनानगर) में आयोजित किया गया, जहां प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। शहीद की प्रतिमा/चित्र पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा गया और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने का संकल्प लिया गया।
आईएएस संजीव वर्मा सहित सैकड़ों लोगों ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में अम्बाला मंडलायुक्त एवं आईएएस संजीव वर्मा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
आईएएस संजीव वर्मा ने कहा कि एम.एल. वर्मा का बलिदान न केवल प्रशासनिक सेवा बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीदों का बलिदान देश की आत्मा को मजबूत करता है।
परिवार सहित आतंकवादी हमले में हुए थे शहीद
गौरतलब है कि 1 फरवरी 1992 को आईएएस एम.एल. वर्मा उस समय आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हुए थे, जब वे चंडीगढ़ से कक्कड़माजरा जा रहे थे। आतंकवादियों ने उनकी गाड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग की।
इस हमले में
एम.एल. वर्मा, उनकी पत्नी प्रीति वर्मा, दो छोटे बेटे गौरव और सौरभ चालक और गनमैन सहित सभी छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। यह घटना देश के प्रशासनिक इतिहास की सबसे हृदयविदारक घटनाओं में गिनी जाती है।

प्रदेश और केंद्र सरकार में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
एम.एल. वर्मा 1972 बैच के एचसीएस अधिकारी थे और 1988 में आईएएस बने। वे दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) में निदेशक भी रह चुके थे।
चौधरी भजन लाल के केंद्र सरकार में कृषि मंत्री रहने के दौरान वे उनके निजी सचिव के रूप में भी कार्य कर चुके थे।
संवेदनशील मुद्दों पर निभाई थी निर्णायक भूमिका
हरियाणा–पंजाब के बीच एसवाईएल नहर विवाद, राजधानी विवाद जैसे अत्यंत संवेदनशील विषयों की जिम्मेदारी एम.एल. वर्मा के पास थी। इन्हीं कारणों से वे लंबे समय तक आतंकवादियों के निशाने पर रहे।
ईमानदारी और निडरता की मिसाल
एम.एल. वर्मा को एक ईमानदार, निडर और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में जाना जाता था। प्रशासनिक अधिकारियों और आम जनता के बीच उनकी छवि एक निर्भीक और निष्पक्ष अफसर की रही।
प्रदेश के कई जिलों में भी हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम
आज शहीदी दिवस के अवसर पर कैथल, यमुनानगर, जींद, करनाल और कुरुक्षेत्र सहित हरियाणा के कई जिलों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। सभी कार्यक्रमों में शहीद एम.एल. वर्मा और उनके परिवार को नमन करते हुए आतंकवाद के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया।
नई पीढ़ी को देशसेवा का संदेश
वक्ताओं ने कहा कि एम.एल. वर्मा की शहादत नई पीढ़ी के लिए यह संदेश है कि देश, संविधान और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है, और इसके लिए सर्वोच्च बलिदान भी छोटा पड़ जाता है।











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