चंडीगढ़/नई दिल्ली, 3 जनवरी: कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने अमेरिका के साथ संभावित कृषि व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से आ रहे बयानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि भारत के कृषि बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोल दिया गया है, जो देश के किसानों के लिए चिंताजनक है।
पत्रकारों से बातचीत में तिवारी ने बताया कि अमेरिका के कृषि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बधाई देते हुए कहा है कि भारत के बाजार अब अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा, “ऐसे बयानों से किसानों के भविष्य को लेकर बड़े सवाल खड़े होते हैं। सरकार को इसे लेकर देश के सामने स्पष्टता लानी चाहिए।”
तिवारी ने जोर देकर कहा कि यह कृषि क्षेत्र के लिए गंभीर मुद्दा है और इसे संसद में व्यापक रूप से चर्चा के लिए लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “हम संसद में काम रोको प्रस्ताव लेकर आए हैं ताकि देश को यह पता चल सके कि राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ हुई बातचीत में वास्तव में क्या तय हुआ। बातचीत के सभी तथ्य और शर्तें सदन में रखी जानी चाहिए और खुली बहस होनी चाहिए।”
कांग्रेस सांसद ने किसानों पर संभावित नकारात्मक असर को लेकर चिंता जताई और कहा, “यदि कोई कृषि व्यापार डील हुई है, तो उसका सीधा प्रभाव देश की किसानी पर पड़ेगा। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।”
तिवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “किसानों के हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और सरकार को इस पूरे मामले में पारदर्शिता के साथ जवाब देना होगा।”











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