स्मार्ट सिटी की पहचान बना प्रोजेक्ट फाइलों में सिमटा, स्टेशन मौजूद लेकिन साइकिलें गायब
पंचकूला। ईंधन बचत, प्रदूषण नियंत्रण और स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया पंचकूला का पब्लिक साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट बीते करीब पांच महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा है। कभी स्मार्ट सिटी पंचकूला की पहचान बना यह प्रोजेक्ट आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। हालत यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई साइकिलें सेक्टर-12 स्थित सामुदायिक केंद्र में धूल और जंग खा रही हैं, जबकि शहरभर में बनाए गए साइकिल स्टेशन खाली पड़े हैं।
नगर निगम पंचकूला की इस महत्वाकांक्षी योजना को शुरूआती दौर में शहरवासियों का जबरदस्त समर्थन मिला था। खासतौर पर छोटे दूरी के आवागमन, सुबह-शाम की सैर, कॉलेज-दफ्तर और बाजार आने-जाने के लिए लोगों ने इन साइकिलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया था। पर्यावरण के प्रति जागरूक युवाओं और विद्यार्थियों में यह योजना काफी लोकप्रिय हुई थी।
2.09 करोड़ की लागत, 200 साइकिलें, लेकिन भविष्य अधर में
जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट पर करीब 2.09 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जिसके तहत 200 आधुनिक साइकिलें खरीदी गईं। इनके संचालन, रखरखाव और तकनीकी प्रबंधन की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को सौंपी गई थी। तय समय-सीमा पूरी होने के बाद न तो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया गया और न ही किसी नई एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई। नतीजा यह हुआ कि पूरी योजना अचानक ठप हो गई।
आज स्थिति यह है कि शहर के प्रमुख चौराहों और सेक्टरों में बने साइकिल स्टेशन सिर्फ ढांचे बनकर रह गए हैं। जहां कभी साइकिलें खड़ी नजर आती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
एक्सटेंशन एरिया की उपेक्षा, लोगों में नाराजगी
प्रोजेक्ट के दौरान ही पंचकूला के एक्सटेंशन एरिया में इस सुविधा के न पहुंचने को लेकर लोगों में नाराजगी थी। घग्गर पार क्षेत्र में आठ से अधिक सेक्टर, कई रिहायशी सोसाइटियां, नाडा साहिब जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल, आईटी पार्क और हर्बल पार्क जैसी महत्वपूर्ण जगहें मौजूद हैं। इसके बावजूद यहां एक भी साइकिल स्टेशन नहीं बनाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत से ही पूरे शहर को शामिल किया जाता, तो प्रोजेक्ट और अधिक सफल होता।
कई अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों को साइकिल सुविधा के लिए दूसरे सेक्टरों में जाना पड़ता था, जो व्यावहारिक नहीं था।
लोगों की उम्मीदें अभी भी जिंदा
हालांकि प्रोजेक्ट फिलहाल बंद है, लेकिन शहरवासियों की उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। पर्यावरण प्रेमियों और नियमित साइकिल उपयोग करने वालों का मानना है कि यदि नगर निगम इच्छाशक्ति दिखाए और इसे दोबारा शुरू करे, तो पंचकूला एक बार फिर हरित और स्मार्ट शहर के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है। साथ ही, एक्सटेंशन एरिया को जोड़ने से इस योजना का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
कई कंपनियां तैयार, फिर भी फैसला लंबित
सूत्रों के मुताबिक, पंचकूला में पब्लिक साइकिल शेयरिंग प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने के लिए कई निजी कंपनियां नगर निगम के समक्ष प्रस्ताव रख चुकी हैं। कुछ कंपनियां तो नो प्रॉफिट-नो लॉस के आधार पर भी इसे चलाने को तैयार हैं। इसके बावजूद अधिकारी स्तर पर रुचि की कमी और निर्णय में देरी के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। जबकि नगर निगम का मूल उद्देश्य आय कमाना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को सस्ती, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
20 साइकिल स्टेशन, आकर्षक प्लान
शहर के विभिन्न हिस्सों में कुल 20 पब्लिक साइकिल स्टेशन बनाए गए थे। इनमें सेक्टर-14 गर्ल्स कॉलेज के बाहर, सेक्टर-4, सेक्टर-6/8 चौक सहित कई प्रमुख स्थान शामिल थे। योजना के तहत
100 रुपये में 30 दिनों के लिए 50 राइड्स,
250 रुपये में 90 दिनों के लिए 180 राइड्स,
500 रुपये में 180 दिनों के लिए 180 राइड्स
जैसे किफायती पैकेज उपलब्ध कराए गए थे। बढ़ती मांग को देखते हुए साइकिलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया था, लेकिन वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया।
स्मार्ट सिटी की सोच का सशक्त उदाहरण
यह प्रोजेक्ट पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित था। मोबाइल ऐप, वेबसाइट और कियोस्क के जरिए रजिस्ट्रेशन व भुगतान की सुविधा थी। हर साइकिल में जीपीएस सिस्टम लगा था, जिससे ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाती थी। यही कारण था कि इसे स्मार्ट सिटी मिशन की एक बड़ी उपलब्धि माना गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम पंचकूला इस महत्वाकांक्षी योजना को फिर से शुरू कर शहरवासियों को राहत देगा, या फिर करोड़ों रुपये की ये साइकिलें यूं ही गोदामों में जंग खाती रहेंगी।











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