May 23, 2026 8:55 pm

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अमेरिका-रूस की ‘New START’ संधि खत्म, 50 साल बाद हटा परमाणु हथियारों पर लगा पहरा!

Vladimir Putin and Donald Trump with Nuclear Missiles New START Treaty Ends

वाशिंगटन : वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से आज का दिन बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक है। रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने वाली आखिरी बड़ी बाधा आज यानी 5 फरवरी 2026 को खत्म हो गई है। ‘न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी’ (New START) की अवधि समाप्त होने के साथ ही, पिछले लगभग 50 सालों में यह पहला मौका है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु ताकतों के रणनीतिक हथियारों—जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, सबमरीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलें और बमवर्षक विमानों—पर कोई भी कानूनी या बाध्यकारी सीमा नहीं बची है। विशेषज्ञों ने इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी बताया है।

रूस का ऐलान- अब हम किसी बंधन में नहीं


संधि की मियाद पूरी होते ही रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब अमेरिका के साथ परमाणु हथियारों की संख्या सीमित करने वाली किसी भी शर्त से बंधा नहीं है। रूसी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि अमेरिका ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं दिया, जिसमें संधि की शर्तों को अगले 12 महीने तक जारी रखने की बात कही गई थी। मंत्रालय ने खेद जताते हुए कहा कि उनकी बातों को जानबूझकर अनदेखा किया गया, इसलिए अब वे इस संधि के तहत किसी भी दायित्व या पारस्परिक घोषणाओं का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं। रूस ने इसे अमेरिका द्वारा सहयोग न करने का परिणाम बताया है।

क्या थी न्यू स्टार्ट संधि और इसका इतिहास


इस ऐतिहासिक समझौते की नींव 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन विनाशकारी रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करना था जो पल भर में प्रमुख सैन्य और औद्योगिक ठिकानों को तबाह कर सकते हैं। यह संधि 2011 में लागू हुई थी और इसे 2021 में जो बाइडेन प्रशासन ने पांच साल के लिए बढ़ाकर 2026 तक कर दिया था। परमाणु नियंत्रण की यह कोशिश शीत युद्ध के समय से चली आ रही थी, जिसकी शुरुआत 1970 के दशक में साल्ट (SALT) समझौते से हुई थी और बाद में स्टार्ट-1, स्टार्ट-2 और मॉस्को संधि के जरिए हथियारों में कटौती की गई थी। लेकिन आज न्यू स्टार्ट के खत्म होने के साथ ही यह पुराना ढांचा पूरी तरह ढह गया है।

संयुक्त राष्ट्र और विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता


इस संधि के खात्मे को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक “गंभीर क्षण” करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी है कि आधी सदी से अधिक समय में दुनिया पहली बार ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां परमाणु महाशक्तियों पर कोई लगाम नहीं है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का जोखिम दशकों में सबसे उच्चतम स्तर पर है। वहीं, पोप लियो ने भी दोनों देशों से अपील की थी कि वे भय और अविश्वास की राजनीति को छोड़कर साझा वैश्विक हितों को प्राथमिकता दें। सुरक्षा विशेषज्ञों, जैसे फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मैट कोर्डा का मानना है कि अब दोनों देश अपनी तैनात परमाणु क्षमताओं को दोगुना तक बढ़ा सकते हैं, जिससे चीन जैसे देशों पर भी परमाणु विस्तार का दबाव बढ़ेगा।

अमेरिका और रूस के पास दुनिया के 90% हथियार


मौजूदा समय में परमाणु शक्ति का संतुलन बेहद नाजुक है। जनवरी 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, रूस के पास 4,309 और अमेरिका के पास 3,700 परमाणु वारहेड्स हैं। यह दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का 90 प्रतिशत से अधिक है। संधि खत्म होने के बाद अब दोनों देशों के लिए मिसाइलों की संख्या बढ़ाने और सैकड़ों अतिरिक्त रणनीतिक वारहेड्स तैनात करने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे भविष्य में चीन को शामिल करते हुए किसी बेहतर समझौते पर विचार कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल दुनिया बिना किसी परमाणु सुरक्षा कवच के एक नए और खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुकी है।

 

Ravi Kumar
Author: Ravi Kumar

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