April 6, 2026 11:46 am

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चंडीगढ़ में एमएसएमई पॉलिसी जल्द होगी लागू;

उद्योगों को मिलेगी बड़ी राहत, पर्यटन से लेकर आईटी-स्टार्टअप सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़। यूटी प्रशासन चंडीगढ़ में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) के लिए जल्द ही एक अलग और व्यापक नीति लागू करने की तैयारी में है। उद्योग विभाग द्वारा एमएसएमई पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है, जिसे शीघ्र लागू किए जाने की उम्मीद है। नई नीति का उद्देश्य शहर में उद्योगों को प्रोत्साहन देना, निवेश बढ़ाना और चंडीगढ़ को क्षेत्रीय आईटी व स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करना है।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर फोकस
प्रस्तावित एमएसएमई पॉलिसी में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम के निर्माण और महिला व युवा उद्यमियों को सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह नीति पर्यटन, आईटी, आईटीईएस और प्रोफेशनल सर्विस जैसे सेक्टरों को नई गति देगी।

केंद्र सरकार और विश्व बैंक का सहयोग
यूटी प्रशासन यह नीति केंद्र सरकार की रैंप (RAMP – Raising and Accelerating MSME Performance) योजना के तहत केंद्रीय एमएसएमई मंत्रालय और विश्व बैंक के सहयोग से तैयार कर रहा है। नीति निर्माण के दौरान उद्योग संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और स्टार्टअप प्रतिनिधियों से व्यापक परामर्श लिया जा रहा है।

निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर मिलेंगे
प्रशासन का मानना है कि नीति लागू होने के बाद शहर में निवेश आकर्षित होगा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी माहौल मिलेगा। फिलहाल चंडीगढ़ में करीब 62 हजार एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं।

एमएसएमई एक्ट लागू करने की मांग तेज
उद्योग जगत लंबे समय से चंडीगढ़ में एमएसएमई एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग कर रहा है। उद्योगपतियों का कहना है कि यदि यह एक्ट पूरी तरह लागू होता है तो न केवल उद्योगों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रशासन का राजस्व भी बढ़ेगा। साथ ही सर्विस सेक्टर को भी उद्योग का दर्जा मिलने से कारोबारी माहौल बेहतर होगा।

उद्योगों का पलायन रोकने की कोशिश
उद्योगपतियों के अनुसार, चंडीगढ़ में लगभग 2800 औद्योगिक इकाइयां हैं, जिनमें से करीब 30 प्रतिशत या तो बंद हो चुकी हैं या फिर मोहाली, डेराबस्सी, बद्दी और बरवाला जैसे क्षेत्रों में शिफ्ट हो गई हैं। नई एमएसएमई नीति से उद्योगों के पलायन पर रोक लगने की उम्मीद है।

आईटी और नई तकनीकों में भविष्य
उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चंडीगढ़ का भविष्य एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती तकनीकों में है। शहर के एमएसएमई पहले से ही डिजिटल टूल्स और एआई-आधारित समाधानों को अपनाकर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर विस्तार कर रहे हैं।

रैंप योजना के तहत 43 करोड़ से अधिक की मंजूरी
यूटी प्रशासन द्वारा रैंप योजना के तहत तैयार स्टेट इम्प्लीमेंटेशन प्लान (SIP) को फरवरी 2024 में मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत 12 प्रमुख हस्तक्षेपों के लिए 43.07 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एमएसएमई फैसिलिटेशन हेल्पडेस्क, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण, गिफ्ट सेल, प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन यूनिट और एसपीआईयू की स्थापना शामिल है।

उद्यमियों को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच की तैयारी
नई नीति और रैंप प्रोजेक्ट के तहत उद्यमियों को उनके उत्पादों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में विशेषज्ञों की मदद दी जाएगी। ‘जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट’ मॉडल पर काम करते हुए ऊर्जा संरक्षण और आधुनिक तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी।
सिंगल विंडो सिस्टम और इंडस्ट्रियल क्लस्टर की योजना
एमएसएमई के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिससे लाइसेंस और अनुमोदन की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही औद्योगिक पार्क और क्लस्टर विकसित कर आधुनिक बुनियादी ढांचा और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार एमएसएमई को व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी।
नई एमएसएमई पॉलिसी को चंडीगढ़ में उद्योगों के लिए एक मजबूत और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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