August 28, 2026 1:09 am

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जीवन भर साथ निभाने वाले अमूल्य आभूषण हैं पुस्तकें

डॉ. विजय गर्ग

मनुष्य के जीवन में कुछ ही वस्तुएँ ऐसी होती हैं जो जन्म से लेकर जीवन के अंतिम क्षण तक साथ निभाती हैं। इनमें पुस्तकों का स्थान सर्वोच्च है। पुस्तकें मात्र काग़ज़ की चादरें नहीं होतीं, बल्कि वे विचारों की समृद्धि, अनुभवों की विरासत और मानवीय बुद्धिमत्ता का अमूल्य खजाना होती हैं। जिस प्रकार बहुमूल्य आभूषण व्यक्ति की बाहरी शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार पुस्तकें मन और आत्मा को अलंकृत करती हैं।

पुस्तकें मनुष्य की सबसे सच्ची और निस्वार्थ साथी होती हैं। दुःख की घड़ी में वे संबल देती हैं, भ्रम के समय सही दिशा दिखाती हैं और खुशी के क्षणों को और भी अर्थपूर्ण बना देती हैं। जब जीवन में कोई समझने वाला नहीं होता, तब पुस्तकें बिना बोले हमारी बात सुनती हैं और हमें एकाकीपन से बाहर निकालकर विचारों के प्रकाश की ओर ले जाती हैं।

जीवन के प्रत्येक चरण में पुस्तकों का महत्व अलग-अलग रूपों में सामने आता है। बचपन में वे कल्पना को पंख देती हैं, युवावस्था में सोच को दिशा प्रदान करती हैं और वृद्धावस्था में अनुभवों को गहराई देती हैं। पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि वे मानवता, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का भी पाठ पढ़ाती हैं।

आज के इस तेज़ और विचलन भरे युग में पुस्तकों का महत्व और भी बढ़ गया है। जब ध्यान भटकना सहज हो गया हो, तब पुस्तक पढ़ना मन को स्थिर करता है, धैर्य सिखाता है और गहन चिंतन की आदत विकसित करता है। पुस्तक एक ऐसा आभूषण है जो न कभी पुराना होता है और न ही समय के साथ अपनी चमक खोता है।

मानव जीवन में रिश्ते बनते-बिगड़ते रहते हैं, लेकिन एक ऐसा साथी जो कभी साथ नहीं छोड़ता, वह है—किताब। जिस प्रकार आभूषण बाहरी सुंदरता को निखारते हैं, उसी प्रकार पुस्तकें व्यक्ति के व्यक्तित्व और आत्मा को समृद्ध बनाती हैं। इसीलिए कहा जाता है कि पुस्तकें अमूल्य गहने हैं, जिनकी चमक समय के साथ और अधिक बढ़ती जाती है।

पुस्तकें ज्ञान का अथाह सागर हैं। जितनी गहराई में उतरेंगे, उतने ही बहुमूल्य मोती प्राप्त होंगे। इतिहास हो, विज्ञान हो या साहित्य—पुस्तकें हमें घर बैठे संसार की यात्रा कराती हैं। वे हमें अतीत से जोड़ती हैं और भविष्य के लिए तैयार करती हैं।

किताबें सबसे वफादार मित्र होती हैं। दोस्त बदल सकते हैं, परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन पुस्तकें सदैव एक-सी रहती हैं। अकेलेपन में वे साथ देती हैं, निराशा में प्रेरणा बनती हैं और हर मोड़ पर मार्गदर्शन करती हैं। वे कभी शिकायत नहीं करतीं, केवल देने का काम करती हैं।

चरित्र निर्माण में पुस्तकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक अच्छी पुस्तक सौ अच्छे मित्रों के बराबर होती है। महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अम्बेडकर और भगत सिंह जैसे महान व्यक्तित्वों के निर्माण में पुस्तकों का अतुलनीय योगदान रहा है।

वास्तव में, जो व्यक्ति पुस्तकों से मित्रता कर लेता है, वह जीवन में कभी गरीब नहीं रहता। धन कम हो सकता है, साथ छूट सकते हैं, लेकिन पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान और संस्कार जीवन भर साथ रहते हैं। इसलिए यह कहना पूर्णतः उचित है कि पुस्तकें जीवन भर साथ निभाने वाले अमूल्य आभूषण हैं, जो मनुष्य को भीतर से समृद्ध बनाती हैं।

— डॉ. विजय गर्ग

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य

शैक्षिक स्तंभकार, मलोट (पंजाब)

 

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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