August 28, 2026 10:15 am

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CHANDIGARH:  डडुमाजरा डंपिंग ग्राउंड: ‘स्मार्ट सिटी’ के माथे पर कलंक, 5 बार फेल हुई डेडलाइन ने तोड़ा जनता के सब्र का बांध

चंडीगढ़: “सिटी ब्यूटीफुल” और “स्मार्ट सिटी” का दावा करने वाला चंडीगढ़ आज अपने ही कचरे के बोझ तले दबा नजर आ रहा है। डडुमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड शहर के लिए प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन चुका है। कचरे का यह पहाड़ आसपास के दर्जनों सेक्टरों के लिए ‘धीमा जहर’ साबित हो रहा है, जहां लाखों लोग गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकट के साये में जीने को मजबूर हैं।
इस मुद्दे को लेकर समाजसेवी और हरियाणा एडवोकेट जनरल कार्यालय के सेवानिवृत्त अधीक्षक राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि डडुमाजरा डंपिंग ग्राउंड अब सिर्फ सफाई व्यवस्था की नाकामी नहीं, बल्कि चंडीगढ़ की बड़ी आबादी के स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों का सवाल बन चुका है।

तारीख पर तारीख’, पर नतीजा शून्य
माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद प्रशासन कचरे के इस पहाड़ को हटाने में पूरी तरह विफल रहा है। बीते 13 महीनों में पांच बार तय की गई डेडलाइन भी हवा में उड़ गई—
31 दिसंबर 2024: पहली बड़ी समय-सीमा, पूरी तरह नाकाम
31 मार्च 2025: दूसरी डेडलाइन भी बेअसर
31 जुलाई 2025: मानसून आया, समाधान नहीं
30 नवंबर 2025: चौथी बार समय बढ़ा, नतीजा शून्य
31 जनवरी 2026: पांचवीं डेडलाइन भी खत्म, कचरा जस का तस


स्वास्थ्य पर सीधा हमला, आंकड़े गायब
राजबीर सिंह भारतीय ने स्वास्थ्य विभाग की “रहस्यमयी चुप्पी” पर सवाल उठाते हुए कहा कि डडुमाजरा, धनास, मलोया, सेक्टर-25, 37 और 38 के निवासी जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
मेडिकल डेटा सार्वजनिक नहीं: दमा, कैंसर, टीबी और त्वचा रोगों से जुड़ा कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया।
मेडिकल सर्वे का अभाव: आज तक प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर कोई व्यापक स्वास्थ्य सर्वे नहीं किया गया।

पर्यावरणीय संकट और ‘जीने के अधिकार’ का उल्लंघन
बरसात के मौसम में डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाला जहरीला लीचेट भूजल को दूषित कर रहा है, जबकि दुर्गंध और प्रदूषण से लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। यह स्थिति संविधान द्वारा प्रदत्त ‘जीने के अधिकार’ का सीधा उल्लंघन मानी जा रही है।

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प्रमुख मांगें
प्रभावित इलाकों में स्वतंत्र मेडिकल ऑडिट और घर-घर स्वास्थ्य सर्वे
डेडलाइन फेल करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और न्यायिक जांच
प्रदूषण से बीमार मरीजों को मुफ्त इलाज
स्वतंत्र एजेंसी से वायु गुणवत्ता और भूजल की जांच
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा,
“प्रशासन की फाइलों में शहर साफ दिखता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लोग आज भी जहरीली हवा में जी रहे हैं। यह अब केवल सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवाधिकार और चंडीगढ़ के अस्तित्व का सवाल बन चुका है।”

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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