May 23, 2026 8:56 pm

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर स्पष्टता आवश्यक: सैलजा

सरकार बताए समझौते में कौन-कौन से ठोस सुरक्षा प्रावधान शामिल किए गए हैं

-समझौते के कुछ प्रावधान भारतीय किसानों, व्यापारियों, श्रमिकों और घरेलू उद्योगों को असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति में खड़ा कर सकते हैं
चंडीगढ़, 8 फरवरी। सिरसा की सांसद, कांग्रेस की महासचिव व पूर्व मंत्री कुमारी सैलजा ने अमेरिका के साथ घोषित व्यापार समझौते के संयुक्त वक्तव्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस समझौते के कुछ प्रावधान भारतीय किसानों, व्यापारियों, श्रमिकों और घरेलू उद्योगों को असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति में खड़ा कर सकते हैं।
आज मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि यदि अमेरिकी कृषि, खाद्य और औद्योगिक उत्पादों के लिए भारतीय बाज़ार को व्यापक रूप से खोला जाता है, जबकि भारतीय निर्यात पर उच्च टैरिफ (शुल्क) और अन्य गैर-शुल्क बाधाएँ बनी रहती हैं, तो इसका सीधा प्रभाव देश की कृषि अर्थव्यवस्था, कुटीर उद्योगों और रोजगार पर पड़ सकता है। कुमारी सैलजा ने कहा कि विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, जूते, रबड़, रसायन तथा कारीगर उत्पाद जैसे क्षेत्र, जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं, इस प्रकार की असमान शर्तों से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि इन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए समझौते में कौन-कौन से ठोस सुरक्षा प्रावधान (सेफगार्ड) शामिल किए गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आने वाले वर्षों में अमेरिकी उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद का कोई प्रावधान है, तो यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने की नीति के साथ किस प्रकार संतुलित होगा, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौता समानता, पारदर्शिता और राष्ट्रीय हित के आधार पर होना चाहिए। संसद और देश की जनता के समक्ष इस व्यापार समझौते का पूर्ण विवरण रखा जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसानों, व्यापारियों, श्रमिकों और लघु उद्योगों के हितों से किसी प्रकार का समझौता न हो। कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस विषय पर विस्तृत स्पष्टीकरण दे और यह बताए कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए कौन-कौन से ठोस प्रावधान शामिल किए गए हैं।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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