April 5, 2026 10:05 pm

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चंडीगढ़: वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को पुनर्परिभाषित करने की जरूर

एसआईए ने उठाई सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की आवाज

चंडीगढ़: सेवानिवृत्त सरकारी और सैन्य अधिकारियों की बड़ी आबादी के कारण वर्षों से “पेंशनभोगियों का स्वर्ग” कहे जाने वाले चंडीगढ़ की यह पहचान क्या आज भी उतनी ही प्रासंगिक रह गई है—इस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए सेकंड इनिंग्स एसोसिएशन ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक सुख-शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की तत्काल अपील की है।

एसआईए का कहना है कि वरिष्ठ नागरिकों की समस्याएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। आए दिन ऐसी दुखद घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें व्यवस्था की लापरवाही और पारिवारिक उपेक्षा के चलते बुजुर्गों को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है। हाल ही में यूटी सचिवालय में एक वरिष्ठ नागरिक की मृत्यु के मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन बिना किसी ठोस कार्रवाई के उसे नजरअंदाज कर दिया गया। इसके अलावा, एक अन्य वरिष्ठ नागरिक द्वारा आत्महत्या की घटना ने भी समाज को झकझोर कर रख दिया है, जबकि बताया गया कि उनके बेटे उस समय भारत में ही मौजूद थे।

एसआईए के अनुसार, एकाकी और उपेक्षित जीवन वरिष्ठ नागरिकों को अवसाद की ओर धकेलने का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि समाज और प्रशासन मिलकर बुजुर्गों के समर्थन में ठोस कदम उठाएं।

वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए एसआईए के प्रमुख सुझाव
समाज कल्याण विभाग और सामुदायिक पुलिस मिलकर सक्रिय वरिष्ठ नागरिकों की भागीदारी से स्वयंसेवकों द्वारा संचालित ‘एकल-खिड़की’ सहायता प्रणाली शुरू करें, ताकि बुजुर्गों को सुलभ और सहानुभूतिपूर्ण सहयोग मिल सके।
वरिष्ठ नागरिकों के सक्रिय सामाजिक जीवन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी क्लबों में न्यूनतम सदस्यता शुल्क लागू किया जाए तथा यूटी प्रशासन द्वारा रियायती भूमि पर संचालित निजी क्लबों में रिजर्व रियायती सीटों का सख्ती से पालन कराया जाए।
प्रत्येक सामुदायिक केंद्र में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक कक्ष को पठन एवं विश्राम कक्ष के रूप में विकसित किया जाए, जहां समाचार पत्र, पत्रिकाएं और अन्य पठन सामग्री उपलब्ध हो।
राज्य विधि सेवा प्राधिकरण और संपदा कार्यालय वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क कानूनी व संपत्ति संबंधी परामर्श हेतु समर्पित कक्ष उपलब्ध कराएं।
यूटी प्रशासन अनुभवी शिक्षकों और वक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित करे, जो सोशल मीडिया और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शन और प्रेरणा दे सके।
अनुभवी वरिष्ठ नागरिकों को स्कूलों और कॉलेजों में व्याख्यान देने का अवसर दिया जाए, जिससे पीढ़ियों के बीच संवाद मजबूत हो।

चंडीगढ़ में कार्यरत सभी वरिष्ठ नागरिक संगठनों को इस बात के लिए संवेदनशील बनाया जाए कि वे संकट में फंसे बुजुर्गों की सहायता के लिए हमेशा सुलभ रहें।

स्वास्थ्य सबसे बड़ी चिंता

एसआईए ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों के लिए सबसे अहम मुद्दा स्वास्थ्य है। प्रमुख सरकारी अस्पतालों—पीजीआई, जीएमसीएच-32 और अन्य सरकारी अस्पतालों—में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाओं की कमी गंभीर चिंता का विषय है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि:
वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष/आरक्षित ओपीडी शुरू की जाए।
सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग आपातकालीन इकाई स्थापित की जाए, ताकि उन्हें त्वरित और सम्मानजनक उपचार मिल सके।
एसआईए का कहना है कि हमारे बुजुर्गों का स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए। यदि चंडीगढ़ को वास्तव में “पेंशनभोगियों का स्वर्ग” बनाए रखना है, तो प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर तुरंत ठोस और संवेदनशील कदम उठाने होंगे।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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