September 21, 2026 10:20 am

September 21, 2026 10:20 am

राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को ‘ए’ ग्रेड, 100 में से 88.5 अंक

देश में 8वां स्थान, विश्वसनीयता और नियामक शासन में पूर्ण अंक
चंडीगढ़, 20 फरवरी 2026। बिजली क्षेत्र में सुधारों और पारदर्शी नियामक व्यवस्था के दम पर हरियाणा ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पहली राष्ट्रीय नियामक प्रदर्शन रैंकिंग में हरियाणा को 100 में से 88.5 अंक प्राप्त हुए हैं, जिसके साथ राज्य को ‘ए’ ग्रेड मिला है। इस प्रदर्शन के आधार पर हरियाणा को देशभर में 8वां स्थान प्राप्त हुआ है।
यह रैंकिंग Power Foundation of India द्वारा REC Limited के सहयोग से जारी की गई है। इस रिपोर्ट में राज्यों का मूल्यांकन बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, एनर्जी ट्रांजिशन और नियामक शासन जैसे पांच प्रमुख मानकों पर किया गया।
बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में पूर्ण 32 अंक
‘बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता (संसाधन पर्याप्तता)’ श्रेणी में हरियाणा को 32 में से पूरे 32 अंक मिले हैं। राज्य ने संसाधन पर्याप्तता संबंधी विनियम अधिसूचित किए हैं तथा बिजली खरीद के लिए योजना आरक्षित मार्जिन निर्धारित किया है।
दीर्घकालिक योजना के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी और डिस्कॉम की तीन-वर्षीय पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। साथ ही अनुपालन न करने की स्थिति में दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए गए हैं। यह दर्शाता है कि राज्य ने भविष्य की बिजली मांग को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध और जवाबदेह ढांचा विकसित किया है।

नियामक शासन में भी 5 में से 5 अंक
‘नियामक शासन’ के क्षेत्र में हरियाणा को पूरे 5 में से 5 अंक प्राप्त हुए हैं। अधिकारियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं तथा स्वीकृत पदों को समूह–ए, बी, सी और डी में वर्गीकृत किया गया है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत मजबूती को बढ़ावा मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत नियामक ढांचा किसी भी राज्य की ऊर्जा व्यवस्था को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करता है और निवेशकों का विश्वास बढ़ाता है।

डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति मजबूत
‘डिस्कॉम की वित्तीय सेहत’ श्रेणी में हरियाणा को 25 में से 23.5 अंक मिले हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैरिफ आदेश समय पर जारी किए गए, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 का ट्रू-अप भी तय समय-सीमा में पूरा किया गया।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि पिछले ट्रू-अप तक कोई नियामकीय परिसंपत्ति (रेगुलेटरी एसेट) सृजित नहीं की गई। यह वित्तीय अनुशासन और संतुलित टैरिफ नीति का स्पष्ट संकेत है।
राज्य में ईंधन एवं बिजली खरीद लागत समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) की मासिक व्यवस्था लागू है, जिससे लागत का स्वतः समायोजन होता है। इससे वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता को मजबूती मिली है और उपभोक्ताओं पर अचानक भार पड़ने की संभावना कम हुई है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार
‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ श्रेणी में हरियाणा को 23 में से 16 अंक मिले हैं। राज्य में नए बिजली कनेक्शन के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय है—
मेट्रो क्षेत्र में 3 दिन
नगर पालिका क्षेत्र में 7 दिन
ग्रामीण क्षेत्र में 15 दिन
निर्धारित समय में सेवा न देने पर मुआवजे का प्रावधान भी है। मीटर परीक्षण और प्रतिस्थापन के लिए समय-सीमा तय की गई है। नेट मीटरिंग कनेक्शन 10 दिनों के भीतर जारी किए जाते हैं।
इन सुधारों से औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।

एनर्जी ट्रांजिशन में अग्रसर हरियाणा
‘एनर्जी ट्रांजिशन’ श्रेणी में राज्य को 15 में से 12 अंक प्राप्त हुए हैं। 100 किलोवाट तक ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस की सुविधा लागू की गई है।
ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त सरचार्ज में छूट दी गई है। नवीकरणीय खरीद दायित्व (RPO) की रूपरेखा वित्त वर्ष 2029-30 तक निर्धारित की गई है और कमी होने पर दंड का प्रावधान भी किया गया है।
इस श्रेणी में पंजाब, कर्नाटक, महाराष्ट्र, असम और मध्य प्रदेश जैसे अग्रणी राज्य भी शामिल हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर उच्च माना जा रहा है।

इस उपलब्धि पर Haryana Electricity Regulatory Commission के अध्यक्ष नन्द लाल शर्मा ने कहा कि ‘ए’ ग्रेड प्राप्त करना राज्य सरकार, आयोग और विद्युत उपयोगिताओं की पारदर्शी विनियमन व्यवस्था और उपभोक्ता-केन्द्रित सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि 100 में से 88.5 अंक प्राप्त करना दर्शाता है कि हरियाणा का विनियामक ढांचा सुदृढ़, दूरदर्शी और राष्ट्रीय विद्युत सुधारों के अनुरूप है। बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और नियामक शासन में पूर्ण अंक मिलना सुविचारित योजना और समयबद्ध टैरिफ व्यवस्था का परिणाम है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य केवल उच्च रैंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि राज्य में पारदर्शी, जवाबदेह और भविष्य उन्मुख विद्युत तंत्र का निर्माण करना है, जो आर्थिक प्रगति और उपभोक्ता कल्याण को मजबूत आधार प्रदान करे।

उपभोक्ताओं और उद्योग को मिलेगा लाभ
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस रैंकिंग से हरियाणा की छवि एक विश्वसनीय और सुधारोन्मुख राज्य के रूप में मजबूत होगी। मजबूत वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी नियमन और हरित ऊर्जा की दिशा में ठोस कदम उद्योग, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं—सभी के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।
हरियाणा का यह प्रदर्शन संकेत देता है कि राज्य बिजली क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भरता बल्कि टिकाऊ और उपभोक्ता-केंद्रित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

Our Visitor

4 1 7 4 8 5
Total Users : 417485
Total views : 668908

शहर चुनें