सदन में सरकारी प्रस्ताव पास, 1971 के अधिनियम के तहत स्थापित बोर्ड भंग करने का निर्णय
चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा सदन में महत्वपूर्ण सरकारी प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने पारित कर दिया। इस प्रस्ताव के तहत हरियाणा आवासन बोर्ड को भंग कर उसका विलय हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने यह निर्णय मंत्री परिषद की शक्तियों का प्रयोग करते हुए लिया है। यह कदम हरियाणा आवासन बोर्ड अधिनियम, 1971 के अधीन स्थापित बोर्ड से संबंधित है, जो लंबे समय से राज्य में आवासीय योजनाओं का संचालन कर रहा था।
बजट भाषण में की थी घोषणा
मुख्यमंत्री सैनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट भाषण के दौरान ही इस बड़े प्रशासनिक सुधार की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि आवासन बोर्ड और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के कार्यों में काफी समानता है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर दोहराव (Duplication of Work) की स्थिति बनती रही है।
सरकार का मानना है कि दोनों संस्थाओं के एकीकरण से प्रशासनिक प्रयासों की आवृत्ति समाप्त होगी, निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में कदम
सदन में प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सुशासन और पारदर्शिता के सिद्धांतों पर कार्य कर रही है। आवासन बोर्ड और शहरी विकास प्राधिकरण के विलय से—
योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी
परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया सरल होगी
वित्तीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा
नागरिकों को आवास संबंधी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म से उपलब्ध होंगी
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अनावश्यक संस्थागत ढांचे को समाप्त कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है।
सदन से मिली मंजूरी
मुख्यमंत्री द्वारा रखा गया सरकारी प्रस्ताव सदन में बहुमत से पारित हो गया। प्रस्ताव पारित होने के साथ ही आवासन बोर्ड को भंग करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी जाएगी और उसके अधिकार, संपत्तियां, दायित्व एवं कर्मचारी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में स्थानांतरित किए जाएंगे।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विलय से शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और राज्य में आवासीय योजनाओं का संचालन अधिक संगठित तरीके से किया जा सकेगा। हालांकि, कर्मचारियों के समायोजन और चल रही परियोजनाओं के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर सरकार को विशेष ध्यान देना होगा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी और किसी भी चल रही योजना पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस निर्णय को हरियाणा में प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।











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