75 दिन बाद भी 3 विश्वविद्यालयों से सूचना लंबित: जॉब सिक्योरिटी बिल अटका, 1400 अनुबंधित शिक्षकों में गहरी चिंता एवं रोष
रोहतक, 22 फरवरी 2026। हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन (हुकटा) के प्रतिनिधिमंडल ने रोहतक के विधायक भारत भूषण बत्तरा को उनके कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि हरियाणा के समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों में कार्यरत लगभग 1400 अनुबंधित असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवा-सुरक्षा (जॉब सिक्योरिटी) के समर्थन में बजट सत्र के दौरान सदन में मुद्दा उठाया जाए तथा जॉब सिक्योरिटी बिल से संबंधित प्रक्रिया को समयबद्ध करवाने हेतु उच्च शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से प्रश्न पूछा जाए।
विधायक बत्तरा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे अनुबंधित विश्वविद्यालय शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा की मांग को सदन में प्रमुखता से उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जॉब सिक्योरिटी से संबंधित फाइल की प्रगति एवं समय-निर्धारण को लेकर वे उच्च शिक्षा मंत्री से तारांकित प्रश्न के माध्यम से पहले ही पूछ चुके हैं।
हुकटा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. शर्मिला यादव एवं डॉ. सुमन ने संयुक्त बयान में कहा कि माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशानुसार उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया को अंतिम चरण तक पहुँचाया जा चुका है। किंतु 9 दिसंबर 2025 को उच्चतर शिक्षा विभाग को छोड़कर अन्य छह विभागों के अधीन छह विश्वविद्यालयों से आवश्यक सूचनाएँ मांगी गई थीं। 2 माह 15 दिन (75 दिन) से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पंचकूला स्थित स्किल, कृषि एवं आयुष विभागों के अधीन तीन विश्वविद्यालय — श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय तथा श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय — से अपेक्षित सूचनाएँ शिक्षा विभाग को प्राप्त नहीं हुई हैं।
इस संबंध में विभाग द्वारा रिमाइंडर भेजे जाने तथा हुकटा द्वारा भी अनेक बार पत्राचार एवं व्यक्तिगत प्रयास किए जाने के बावजूद सूचना प्रेषित नहीं की गई है। सूचना न मिलने के कारण आशंका है कि वर्तमान बजट सत्र में भी जॉब सिक्योरिटी बिल प्रस्तुत नहीं हो पाएगा, जिससे सभी अनुबंधित शिक्षकों में गहरी चिंता एवं रोष व्याप्त है।
हुकटा ने हरियाणा सरकार के सभी मंत्रियों, विधायकों एवं उच्च अधिकारियों से पुनः मांग की है कि लंबित सूचनाएँ शीघ्र मंगवाकर बजट सत्र में जॉब सिक्योरिटी बिल प्रस्तुत कर उसे अधिनियम (एक्ट) के रूप में पारित किया जाए, ताकि वर्षों से सेवाएँ दे रहे विश्वविद्यालय शिक्षकों को स्थायी सेवा-सुरक्षा प्रदान की जा सके।











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