कहने में कम बोलते, काम करें दिन-रात।
जनसेवा से है जुड़ी, गंगवा की हर बात।।
गांव से जुड़े, गांव के, सादा उनका ढंग।
जनता दिल से मानती, रहती गंगवा संग।।
न शोहरत का मोह है, न कुर्सी का गुमान।
सेवा से ही है बनी, गंगवा की पहचान।।
सड़क बनी, पानी मिला, बदले बिगड़े हाल।
दिखते काम ज़मीन पर, नहीं दिखावे चाल।।
गांव-गरीब-किसान से, नाता उनका खास।
दर्द समझकर ही किए, हर फैसले पास।।
मोह नहीं पद से रखा, ना सत्ता अभिमान।
जनसेवा ही धर्म है, सेवा उनकी शान।।
पिछड़ों की आवाज़ बन, बोले ठोस विचार।
हक की बात उठा रहे, हर मंच हर बार।।
पद पाकर बदले नहीं, बदला नहीं स्वभाव।
गंगवा वैसे ही मिले, जो पहले थे भाव।।
सादा जीवन, साफ मन, दिल में रखते धीर।
हरियाणा के राज में, गंगवा है रणवीर।।
— डॉ. सत्यवान सौरभ











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