September 21, 2026 4:06 am

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चंडीगढ़ में हाई कोर्ट विस्तार पर पारदर्शी समीक्षा की मांग, नागरिकों ने उठाए सवाल

चंडीगढ़, 1 मार्च। शहर की विश्व धरोहर पहचान के मद्देनज़र प्रस्तावित हाई कोर्ट विस्तार को लेकर पारदर्शी समीक्षा की मांग उठी है। वरिष्ठ नागरिक आरके गर्ग ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि चंडीगढ़ की वास्तुकला विरासत और नगर नियोजन सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए किसी भी बड़े निर्माण से पहले व्यापक परामर्श और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

चंडीगढ़ को विश्वविख्यात वास्तुकार Le Corbusier ने एक सुव्यवस्थित आधुनिक शहर के रूप में डिजाइन किया था। शहर का Capitol Complex, जिसमें प्रतिष्ठित Punjab and Haryana High Court भवन शामिल है, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में “The Architectural Work of Le Corbusier – An Outstanding Contribution to the Modern Movement” के अंतर्गत अंकित है।

उठी ये प्रमुख चिंताएं

विज्ञप्ति में कहा गया है कि हाल ही में न्यायालय अवसंरचना के बड़े पैमाने पर प्रस्तावित विस्तार को लेकर नागरिकों और संबंधित पक्षों के बीच कई चिंताएं सामने आई हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

चंडीगढ़ के स्वीकृत मास्टर प्लान के अनुरूपता

धरोहर स्वरूप, स्काईलाइन और वास्तु अखंडता का संरक्षण

पर्यावरणीय और नगर नियोजन संबंधी नियमों का पालन

आवश्यक परामर्शात्मक एवं वैधानिक प्रक्रियाओं का अनुपालन

विस्तार की आवश्यकता स्वीकार, लेकिन सावधानी जरूरी

विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बढ़ते मामलों और प्रशासनिक आवश्यकताओं के चलते न्यायिक अवसंरचना का विस्तार आवश्यक हो सकता है। हालांकि, चंडीगढ़ की विश्व धरोहर स्थिति को देखते हुए किसी भी विकास कार्य में विशेष सावधानी, पारदर्शिता और वास्तुकला विरासत के प्रति संवेदनशीलता अपेक्षित है।

आरके गर्ग ने कहा कि यह पहल किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकार-क्षेत्र या प्राधिकार पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाती है, बल्कि धरोहर पर संभावित प्रभाव और दीर्घकालिक शहरी परिणामों को ध्यान में रखते हुए सुशासन की मांग करती है। यदि किसी प्रकार का संवैधानिक या व्याख्यात्मक प्रश्न उत्पन्न होता है, तो ऐसा विषय अंततः Supreme Court of India के विचाराधीन आ सकता है।

नागरिकों की मांगें

धरोहर संरक्षण से जुड़े नागरिकों ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं—

सभी संबंधित योजनाएं, अनुमोदन और स्वीकृतियां सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराई जाएं।

स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा धरोहर एवं पर्यावरण प्रभाव का पारदर्शी आकलन कराया जाए।

विकास कार्य मास्टर प्लान और संरक्षण मानकों के अनुरूप ही किए जाएं।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि चंडीगढ़ की वास्तुकला पहचान राष्ट्रीय धरोहर है। विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए संस्थागत विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि अमूल्य विरासत सुरक्षित रहे और शहर की पहचान और सुदृढ़ हो।

— जनहित में जारी

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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