September 20, 2026 10:17 am

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HARYANA: मंडियों में भाव गिरने से बर्बादी के कगार पर आलू किसान, सरकार की भावांतर भरपाई योजना कागजों में सिमटी – दीपेन्द्र हुड्डा

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा के दिल्ली निवास पर वरिष्ठ बीजेपी नेता और 2005 में नीलोखेड़ी विधानसभा से INLD प्रत्याशी रहे राजेन्द्र अंजनथली ने अनेक समर्थकों सहित भाजपा छोड़कर कांग्रेस पार्टी का दामन थामा

‘भावंतर भरपाई योजना’ की विसंगतियों को दूर कर हर किसान को इस योजना का फायदा दे सरकार – दीपेन्द्र हुड्डा

किसानों में इस बात की चर्चा है कि धान घोटाले की तरह आलू घोटाला हो रहा, सरकार इसकी जांच कराए – दीपेन्द्र हुड्डा

किसानों को लाभ होना तो दूर उन्हें मजदूरी भी नहीं मिल पा रही – दीपेन्द्र हुड्डा

समय रहते सरकार ने कदम नहीं उठाए तो आलू किसान बर्बादी के कगार पर पहुँच जाएगा – दीपेन्द्र हुड्डा

चंडीगढ़, 3 जनवरी। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा के दिल्ली आवास पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और 2005 में नीलोखेड़ी विधानसभा से INLD प्रत्याशी रहे राजेन्द्र अंजनथली ने अनेक समर्थकों सहित भाजपा छोड़कर कांग्रेस पार्टी का दामन थामा। दीपेन्द्र हुड्डा ने सभी का कांग्रेस पार्टी में स्वागत किया। इस मौके पर उन्होंने हरियाणा के आलू किसानों को मंडियों में आलू का भाव न के बराबर मिलने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आलू किसानों को लाभ होना तो दूर उन्हें मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है। किसानों में इस बात की चर्चा है कि धान घोटाले की तरह ही प्रदेश में आलू घोटाला हो रहा है, सरकार इसकी जांच कराए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बड़े पैमाने पर कुरुक्षेत्र में आलू पैदा होता है और पिपली मंडी हरियाणा की सबसे बड़ी आलू मंडी मानी जाती है। सरकार आलू के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल का सुरक्षित मूल्य तय करने और इससे कम भाव पर आलू बिकने की सूरत में मुआवजे के तौर पर अंतर की भरपाई करने का दावा तो कर रही है। लेकिन मंडियों की जमीनी हकीकत ये है कि सफेद आलू उगाने वाले किसानों को ज्यादातर 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल का भाव ही मिल रहा है। जबकि बाजार में आम उपभोक्ता को 15-20 रुपए प्रति किलो पर आलू खरीदना पड़ रहा है। आलू की उपज का सही दाम न मिल पाने के कारण किसान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। सरकार की तमाम योजनाएं, MSP मिलने के दावे खोखले और झूठे साबित हो रहे हैं। ऐसी स्थिति पिछले करीब 11 वर्षों में दूसरी बार आई है। इससे पहले इसी पीपली मंडी में किसान का आलू 50 पैसे प्रति किलो पर पिटा था। उन्होंने मांग करी कि सरकार आलू का सुरक्षित मूल्य 600 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 800 रुपये प्रति क्विंटल करे और भावान्तर भरपाई की गणना वास्तविक मंडी विक्रय मूल्य के आधार पर की जाए। मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकृत फसल का सत्यापन जल्द से जल्द पूरा हो, ताकि किसानों को नुकसान के कुचक्र से बाहर निकाला जा सके। यदि समय रहते सरकार ने कदम नहीं उठाए तो किसान बर्बाद होने के कगार पर पहुँच जाएगा।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि सरकार की ‘भावंतर भरपाई योजना’ में इतनी विसंगति है कि किसानों को समय पर इसका कोई फायदा नहीं मिल पाता। हरियाणा में सफेद आलू के अलावा लाल और डायमंड किस्म के आलू भी होते हैं जो महंगे बिकते हैं, इसके कारण आलू का ‘औसत भाव’ ऊपर चला जाता है। किसानों के मुताबिक आलू की खेती की लागत ही क़रीब ₹45,000 प्रति एकड़ है, मगर मंडियों में आलू की मौजूदा कीमत प्रति क्विंटल ₹600 से गिरकर ₹250 पर आ गई है। इसके कारण किसानों को एक एकड़ में पैदा आलू का ₹18000 – ₹20,000 तक ही मिल पा रहा है। जिन किसानों को भावांतर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है उन्हें सीधे-सीधे 25000 प्रति एकड़ का घाटा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में 80% सफेद आलू या पुखराज आलू की वैरायटी लगाई जाती है जो इस बार ₹250 से ₹300 प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है। आलू की कुफरी मोहन वैरायटी ₹400 से 450 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है। आलू की 7008 नाम से नई वैरायटी जिसका रेट कुछ बेहतर है। भावांतर योजना में गंभीर विसंगति के कारण नुकसान झेल रहे आलू किसानों को मंडियों में वास्तविक विक्रय मूल्य बेहद कम होने और अपेक्षाकृत अधिक भाव वाले लाल आलू के साथ जोड़कर औसत निकालने से ऊंचे औसत भाव के आधार पर भावान्तर भरपाई योजना से बाहर किया जा रहा है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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