April 12, 2026 3:13 pm

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मैन्युफैक्चरिंग में भारत की बढ़त के लिए संतुलित लेड आपूर्ति जरूरी

ऊर्जा भंडारण, रक्षा और परिवहन जैसे क्षेत्रों के लिए प्राइमरी और सेकेंडरी लेड का संतुलन आवश्यक
चंडीगढ़/नई दिल्ली:
भारत की बढ़ती विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षमता को मजबूत बनाने के लिए लेड (सीसा) की संतुलित और स्थिर आपूर्ति बेहद जरूरी मानी जा रही है। ऊर्जा भंडारण, रक्षा, दूरसंचार और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लेड एक आधारभूत औद्योगिक धातु के रूप में उपयोग होता है। ऐसे में देश के आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य के बीच इस धातु की आपूर्ति और प्रबंधन फिर से चर्चा में आ गया है।
भारत ने अपनी सर्कुलर इकोनॉमी नीति के तहत रिसाइक्लिंग को प्राथमिकता दी है, जिससे सेकेंडरी लेड की खपत में लगातार वृद्धि हुई है। हालांकि हाल के समय में सामने आई घटनाओं ने रिसाइक्लिंग तंत्र में कई चुनौतियों को उजागर किया है। इनमें प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन और पुरानी बैटरियों के असुरक्षित निस्तारण से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम प्रमुख हैं।
प्राइमरी लेड की भूमिका अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनौतियों के बीच जिम्मेदारी से उत्पादित प्राइमरी लेड एक महत्वपूर्ण पूरक भूमिका निभाता है। यह औपचारिक और सुलभ आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करता है और उत्पादन की गुणवत्ता में वह स्थिरता प्रदान करता है, जिसे केवल रिसाइक्लिंग से हासिल करना कठिन होता है।
प्राइमरी लेड का उपयोग सेकेंडरी लेड के साथ ब्लेंडिंग में किया जाता है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। इससे सर्कुलर इकोनॉमी के लक्ष्य भी मजबूत होते हैं और उद्योगों को भरोसेमंद कच्चा माल मिलता है।

पूरी वैल्यू चेन को मिलती है मजबूती
घरेलू स्तर पर प्राइमरी लेड का उत्पादन खनन से लेकर बैटरी निर्माण तक पूरी औद्योगिक मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाता है। इससे देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं और आयात पर निर्भरता कम होती है।
एक हालिया लेख में चार्टर्ड अकाउंटेंट विनोद बंसल ने कहा कि, “जिन अर्थव्यवस्थाओं में रिसाइक्लिंग दर बहुत अधिक है, वहां भी गुणवत्ता सुनिश्चित करने, रणनीतिक लचीलापन बनाए रखने और आपूर्ति की स्थिरता के लिए प्राइमरी लेड उत्पादन या परिष्कृत आयात को बनाए रखा जाता है।”

संतुलित नीति की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए चुनौती रिसाइक्लिंग और प्राइमरी उत्पादन में से किसी एक को चुनने की नहीं है, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाने की है। गुणवत्ता, सुरक्षा और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए रिसाइक्लिंग के विस्तार के साथ जिम्मेदार प्राइमरी उत्पादन को भी बढ़ावा देना जरूरी है।
अनुपालन उत्पादन और विनियमित रिसाइक्लिंग के माध्यम से लेड की पूरी मूल्य श्रृंखला को औपचारिक रूप देना भारत की मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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