भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे करीब 2 लाख 10 हजार अतिथि शिक्षकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य सरकार जल्द ही इन शिक्षकों के लिए राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा आयोजित कराने जा रही है। बताया जा रहा है कि यह परीक्षा जुलाई–अगस्त 2026 के बीच कराई जा सकती है।
सरकार के अनुसार जो अतिथि शिक्षक इस परीक्षा में सफल नहीं होंगे, उन्हें फोर्सफुल रिटायरमेंट दिया जा सकता है। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में अतिथि शिक्षकों के बीच चिंता और असंतोष का माहौल बन गया है। दूसरी ओर शिक्षक संगठन इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदली स्थिति
दरअसल यह पूरा मामला सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश से जुड़ा हुआ है। अदालत ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act) के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए निर्धारित पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है।
मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों की भर्ती 1998 से 2010 के बीच की गई थी। उस समय भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनिवार्य पात्रता परीक्षा नहीं कराई गई थी। यही वजह है कि अब अदालत के आदेश के बाद इन शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए परीक्षा देनी पड़ेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि अदालत के निर्देशों का पालन करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसी के तहत परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
प्रदेश के स्कूलों में अहम भूमिका निभाते हैं अतिथि शिक्षक
मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में अतिथि शिक्षकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। प्रदेश के हजारों प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में स्थायी शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी।
इनमें से कई शिक्षक ऐसे हैं जो 15 से 25 वर्षों से लगातार बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में तो कई स्कूल पूरी तरह इन्हीं शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में शिक्षक परीक्षा में सफल नहीं होते हैं और उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाता है तो इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी पैदा हो सकती है।
वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षक चिंतित
सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश भर में अतिथि शिक्षकों में चिंता का माहौल है।
भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक राकेश महाले बताते हैं कि उन्हें स्कूल में पढ़ाते हुए करीब 20 साल हो चुके हैं।
उनका कहना है,
“हम इतने वर्षों से पूरी मेहनत और जिम्मेदारी के साथ बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अब अचानक पात्रता परीक्षा देने का आदेश आ गया है। अगर इस उम्र में परीक्षा में असफल हो गए तो हमारी नौकरी चली जाएगी। 50 साल की उम्र में बाहर हो गए तो फिर नया काम कहां मिलेगा?”
ऐसे ही हजारों शिक्षक हैं जो वर्षों से सेवा दे रहे हैं और अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
सरकार का पक्ष: कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी
इस मामले में लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त शिल्पा गुप्ता का कहना है कि सरकार के पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
उन्होंने कहा,
“सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। राज्य सरकार उसी दिशा में काम कर रही है और जल्द ही परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया और तिथियां घोषित की जाएंगी।”
सरकार का यह भी कहना है कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पात्रता परीक्षा जरूरी कदम है।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
दूसरी ओर शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जिन शिक्षकों ने 20 से 25 वर्षों तक लगातार सेवा दी है, उनके अनुभव और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
राज्य शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपने स्थान पर सही है, लेकिन इसमें मानवीय दृष्टिकोण भी जरूरी है।
उन्होंने कहा,
“प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया। अब अचानक उनसे परीक्षा लेने का निर्णय उनके भविष्य के साथ अन्याय जैसा है।”
सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका की तैयारी
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है।
जगदीश यादव के अनुसार इस मुद्दे पर 15 मार्च को शिक्षक संगठनों की एक अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (रिव्यू पिटिशन) दाखिल करने और आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।
शिक्षक संगठनों की मांग है कि
लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को विशेष छूट दी जाए
उनके अनुभव और सेवा अवधि को भी पात्रता का आधार माना जाए
परीक्षा में असफल होने पर तुरंत नौकरी खत्म न की जाए
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक सेवा से बाहर हो जाते हैं तो इससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीण इलाकों में पहले से ही शिक्षकों की कमी है और ऐसे में यदि हजारों शिक्षक एक साथ बाहर होते हैं तो कई स्कूलों में पढ़ाई बाधित होने का खतरा बढ़ सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल प्रदेश के लाखों अतिथि शिक्षक सरकार के अगले कदम और अदालत में होने वाली संभावित सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच बातचीत या कानूनी लड़ाई तेज हो सकती है।
यदि पुनर्विचार याचिका दायर होती है तो सुप्रीम कोर्ट का अगला फैसला ही तय करेगा कि प्रदेश के सवा दो लाख अतिथि शिक्षकों का भविष्य क्या होगा।










Total Users : 291129
Total views : 493309