पिछले 10 वर्षों में दूध उत्पादन 146 मिलियन टन से बढ़कर 240 मिलियन टन हुआ; डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की 70% से अधिक भागीदारी
नई दिल्ली/चंडीगढ़। राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने संसद के बजट सत्र के दौरान डेयरी क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार से ‘इंटीग्रेटेड नेशनल डेयरी ग्रोथ स्ट्रेटेजी’ तैयार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इससे करीब 8 करोड़ पशुपालक किसानों को आजीविका मिलती है।
संसद में विशेष उल्लेख के माध्यम से मुद्दा उठाते हुए संधू ने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और सुधारों के कारण भारत का डेयरी क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने विशेष रूप से राष्ट्रीय गोकुल मिशन सहित कई पशुधन विकास कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से पशुधन की उत्पादकता बढ़ी है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनकर उभरा है।
दूध उत्पादन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
सांसद संधू ने बताया कि वर्ष 2014-15 में भारत में दूध उत्पादन लगभग 146 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर करीब 240 मिलियन टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में डेयरी क्षेत्र में लगभग 70 प्रतिशत का विस्तार हुआ है।
उन्होंने यह भी बताया कि देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले दशक में यह 48 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 471 ग्राम प्रतिदिन से अधिक हो गई है, जो वैश्विक औसत 322 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन से काफी अधिक है।
सहकारी समितियों के आधुनिकीकरण पर जोर
संधू ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में आगे की वृद्धि बनाए रखने के लिए क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव स्तर पर काम कर रही सहकारी समितियों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाई जाए और इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें पशुधन उत्पादकता बढ़ाना, चारे का बेहतर प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन और डेयरी उत्पादों में वैल्यू एडिशन शामिल हैं।
‘इंटीग्रेटेड नेशनल डेयरी ग्रोथ स्ट्रेटेजी’ की मांग
संधू ने सरकार से डेयरी क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए एकीकृत राष्ट्रीय डेयरी विकास रणनीति बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस रणनीति में नस्ल सुधार, पशुओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड और पौष्टिक चारे की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पशुओं के उपचार में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक समर्थन दिया जाए, जिससे एंटीबायोटिक्स पर निर्भरता कम हो सके।
डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की अहम भूमिका
सांसद संधू ने कहा कि भारत के डेयरी क्षेत्र में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं। उन्होंने महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत करने के लिए आसान ऋण, प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाकर डेयरी क्षेत्र को और मजबूत किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
सहकारी मॉडल को मजबूत करने का आह्वान
संधू ने कहा कि देश में डेयरी विकास की सफलता का बड़ा आधार सहकारी मॉडल है, जिसे और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि डेयरी उद्योग और सहकारी ढांचा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डेयरी सहकारी समितियों का बड़ा नेटवर्क
उन्होंने बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के अनुसार देश में 2,02,521 संगठित डेयरी सहकारी समितियां काम कर रही हैं। इसके अलावा बोर्ड 23 दूध उत्पादक संगठनों को सहायता देता है, जिनमें से 16 का प्रबंधन महिलाएं करती हैं।
ये संगठन करीब 35 हजार गांवों के लगभग 12 लाख दूध उत्पादकों को जोड़कर डेयरी क्षेत्र में सहकारी मॉडल को मजबूत बना रहे हैं।
संधू ने कहा कि भारत की यह उपलब्धि ऐतिहासिक श्वेत क्रांति से जुड़ी है, जिसने देश को दूध की कमी वाले राष्ट्र से दुनिया के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में शामिल कर दिया।













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