2023 में 574 पंचायतें थीं टीबी-मुक्त, अब संख्या बढ़कर 2,157 पहुंची; अंबाला जिला सबसे आगे
चंडीगढ़। हरियाणा ने टीबी उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए वर्ष 2025 में राज्य की 2,157 ग्राम पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित किया है। यह राज्य की कुल 6,237 पंचायतों का लगभग 35 प्रतिशत है। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने दी।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस अभियान के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री की पहल से शुरू हुआ टीबी-मुक्त पंचायत अभियान
डॉ. मिश्रा ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत “टीबी-मुक्त पंचायत” पहल की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 मार्च 2023 को विश्व टीबी दिवस के अवसर पर वाराणसी से की गई थी।
इस पहल का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं को टीबी से जुड़ी समस्याओं को समझने, उसके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने और पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। साथ ही पंचायतों को टीबी उन्मूलन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
तीन वर्षों में तेजी से बढ़ी टीबी-मुक्त पंचायतों की संख्या
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार पिछले तीन वर्षों में इस अभियान के तहत पंचायतों की संख्या लगातार बढ़ी है।
वर्ष 2023: 574 पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित, सभी ब्रॉन्ज श्रेणी में (करीब 9 प्रतिशत)
वर्ष 2024: 1,855 पंचायतें टीबी-मुक्त, जिनमें 1,542 ब्रॉन्ज और 313 सिल्वर श्रेणी
वर्ष 2025: 2,157 पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित
वर्ष 2025 में घोषित पंचायतों में
211 पंचायतें गोल्ड श्रेणी,
646 पंचायतें सिल्वर श्रेणी,
1,300 पंचायतें ब्रॉन्ज श्रेणी में शामिल हैं।
तीन स्तरों पर दिया जाता है प्रमाण पत्र
डॉ. मिश्रा ने बताया कि टीबी-मुक्त पंचायत पहल के तहत पंचायतों को तीन स्तरों पर प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते हैं।
ब्रॉन्ज श्रेणी: एक वर्ष तक टीबी-मुक्त स्थिति बनाए रखने पर
सिल्वर श्रेणी: लगातार दो वर्ष तक टीबी-मुक्त रहने पर
गोल्ड श्रेणी: तीन वर्षों तक टीबी-मुक्त स्थिति बनाए रखने पर
यह प्रमाण पत्र हर वर्ष विश्व टीबी दिवस के अवसर पर संबंधित जिला उपायुक्त द्वारा जारी किए जाते हैं और इनकी वैधता एक वर्ष की होती है।
अंबाला जिला टीबी-मुक्त पंचायतों में सबसे आगे
जिला-वार आंकड़ों के अनुसार अंबाला जिला टीबी-मुक्त पंचायतों के मामले में सबसे आगे है। यहां 400 पंचायतों में से 191 पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित होने के लिए पात्र पाई गई हैं, जिनमें
9 गोल्ड,
79 सिल्वर,
103 ब्रॉन्ज श्रेणी की पंचायतें शामिल हैं।
इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
भिवानी: 312 में से 165 पंचायतें
चरखी दादरी: 167 में से 27 पंचायतें
फरीदाबाद: 100 में से 46 पंचायतें
फतेहाबाद: 259 में से 116 पंचायतें
गुरुग्राम: 158 में से 96 पंचायतें
हिसार: 325 में से 99 पंचायतें
झज्जर: 250 में से 67 पंचायतें
इसी प्रकार
जींद: 300 में से 65 पंचायतें
कैथल: 277 में से 106 पंचायतें
करनाल: 385 में से 113 पंचायतें
कुरुक्षेत्र: 407 में से 145 पंचायतें
अन्य जिलों में भी पंचायतें पात्र पाई गई हैं, जिनमें
महेंद्रगढ़: 343 में से 106
नूंह (मेवात): 325 में से 98
पलवल: 265 में से 110
पंचकूला: 133 में से 105
पानीपत: 178 में से 56
रेवाड़ी: 365 में से 131
रोहतक: 142 में से 25
सिरसा: 339 में से 119
सोनीपत: 317 में से 81
यमुनानगर: 490 में से 90 पंचायतें टीबी-मुक्त प्रमाण पत्र के लिए पात्र पाई गई हैं।
त्रि-स्तरीय प्रक्रिया से होता है सत्यापन
डॉ. मिश्रा ने बताया कि पंचायतों को टीबी-मुक्त घोषित करने से पहले एक सख्त त्रि-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है।
इस प्रक्रिया में
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी,
सिविल सर्जन,
तथा दूसरे जिले के डिप्टी सिविल सर्जन (टीबी)
द्वारा दावों की जांच और पुष्टि की जाती है। इसके बाद ही पंचायतों को टीबी-मुक्त प्रमाण पत्र दिया जाता है।
टीबी उन्मूलन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा हरियाणा
डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि हरियाणा सरकार टीबी मुक्त भारत अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। पंचायतों की सक्रिय भागीदारी के कारण राज्य टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में राज्य की अधिक पंचायतें इस अभियान से जुड़ेंगी और हरियाणा जल्द ही टीबी-मुक्त राज्य बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा।











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