April 6, 2026 3:39 am

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संघ का विस्तार राष्ट्रीय विचार का विस्तार: दत्तात्रेय होसबाले

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त हो देश, समाज की सज्जन शक्ति को संगठित करने पर जोर
समालखा (पानीपत), 15 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित के संकल्प के साथ संपन्न हो गई। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि संघ के विस्तार का अर्थ राष्ट्रीय विचार का विस्तार है और देश के नागरिकों को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय विचारधारा केवल एक देश तक सीमित नहीं है बल्कि समस्त विश्व के कल्याण का मार्ग प्रस्तुत करती है। भारतीयता या हिंदुत्व केवल विचार नहीं बल्कि जीवन शैली है और इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया जा रहा है।
देशभर में तेजी से बढ़ रही संघ की शाखाएं
होसबाले ने बताया कि पिछले एक वर्ष में संघ के संगठनात्मक कार्य में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाओं की संख्या लगभग छह हजार बढ़कर 88 हजार से अधिक हो गई है, जबकि कार्यस्थलों की संख्या 55 हजार से ज्यादा पहुंच गई है। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडलियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि संघ की शाखाएं अब अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों तक संचालित हो रही हैं।
अंडमान और अरुणाचल में भी बढ़ा सामाजिक जुड़ाव
संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि अंडमान में आयोजित हिंदू सम्मेलन में नौ द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। वहीं अरुणाचल प्रदेश जैसे कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्य में आयोजित 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने भाग लिया।
महापुरुषों के योगदान को जाति-पंथ से ऊपर उठकर देखें
होसबाले ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति और पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए। उनके मार्गदर्शन से समाज को सकारात्मक दिशा मिलती है।
संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में गुरु तेग बहादुर के बलिदान के 350वें वर्ष पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 7 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।
उन्होंने बताया कि आगामी वर्ष में संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष पर भी देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
96 प्रशिक्षण वर्गों का होगा आयोजन
संघ के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि देशभर में 11 क्षेत्रीय वर्ग और नागपुर का एक वर्ग मिलाकर कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। इन वर्गों के माध्यम से स्वयंसेवकों को संगठनात्मक और सामाजिक कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
गौसेवा और हरित जीवनशैली को बढ़ावा देने की योजना
प्रतिनिधि सभा की बैठक में गौसेवा और ग्राम विकास से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। लोगों को घरों की छतों पर सब्जी गार्डन तैयार करने और उसमें देसी गोबर व गौमूत्र से बनी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही जल संरक्षण, पॉलीथीन के कम उपयोग और हरित जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया जाएगा।
संगठनात्मक ढांचे में होगा विकेंद्रीकरण
संघ की संगठनात्मक संरचना में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में मौजूद 46 प्रांतों की जगह 80 से अधिक संभाग बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे कार्य अधिक सुगम और प्रभावी हो सके।
संघ किसी के विरोध के लिए नहीं बना
होसबाले ने कहा कि संघ की स्थापना किसी समुदाय या पूजा पद्धति के विरोध के लिए नहीं हुई। संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार का उद्देश्य समाज को संगठित करना था।
उन्होंने बताया कि दूसरे सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर और तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस ने भी समाज को एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार से जोड़ने पर जोर दिया।
होसबाले ने कहा कि संघ में सबका स्वागत है और जो भी व्यक्ति राष्ट्र और समाज के लिए अच्छा कार्य करता है, उसे संघ अपना ही मानता है।

BabuGiri Hindi
Author: BabuGiri Hindi

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