August 29, 2026 2:39 am

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CHANDIGARH: सेक्टर-26 सब्जी मंडी के हालात जस के तस, हाईकोर्ट की टिप्पणी और प्रशासक के दौरों के बाद भी नहीं बदली तस्वीर

अतिक्रमण, सीवरेज का पानी और गंदगी से परेशान व्यापारी व ग्राहक; अब प्रशासक से समाधान की उम्मीद

रमेश गोयत
चंडीगढ़। शहर की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडी मानी जाने वाली सेक्टर-26 मंडी पिछले कई वर्षों से बदहाली का शिकार है। हालात इतने खराब हैं कि हाईकोर्ट चंडीगढ़ की टिप्पणी और कई बार प्रशासनिक निरीक्षण के बावजूद मंडी की स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हो पाया है।
हाल ही में गुलाब चंद कटारिया द्वारा तीसरी बार मंडी का दौरा करने और प्रशासन को कड़े निर्देश देने के बाद भी मंडी के हालात लगभग पहले जैसे ही बने हुए हैं। अतिक्रमण, गंदगी, अवैध टेंटों में चल रही दुकानें और सड़कों पर बहता सीवरेज का पानी आज भी मंडी की पहचान बने हुए हैं।

औचक निरीक्षण में सामने आई बदहाली
शनिवार को प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने सेक्टर-26 मंडी का औचक निरीक्षण किया। बताया जा रहा है कि इस दौरे की जानकारी किसी भी अधिकारी को पहले से नहीं दी गई थी। यहां तक कि मंडी प्रशासन को भी इसकी भनक तक नहीं लगी।
निरीक्षण के दौरान प्रशासक को मंडी के अंदर भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा। अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण सड़कें इतनी संकरी हो चुकी हैं कि बड़े वाहनों और ग्राहकों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है। प्रशासक का काफिला भी कुछ समय तक जाम में फंसा रहा।

अतिक्रमण और अवैध दुकानें बनी बड़ी समस्या
मंडी में कई स्थानों पर टेंट लगाकर आढ़तियों द्वारा अवैध दुकानें चलाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं। इन अवैध दुकानों के कारण मंडी के अंदर रास्ते और भी संकरे हो गए हैं। इसके अलावा फल-सब्जी के खाली क्रेट, कचरे के ढेर और अस्थायी ढांचे भी व्यवस्था को और खराब बना रहे हैं।

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सड़कों पर बहता सीवर का पानी
मंडी परिसर में जगह-जगह सीवर जाम होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहता दिखाई देता है। व्यापारियों और ग्राहकों को इसी गंदगी और दुर्गंध के बीच खरीद-फरोख्त करनी पड़ती है।
सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब बताई जा रही है।
मंडी में आने वाले कई ग्राहकों का कहना है कि गंदगी और अव्यवस्था के कारण उन्होंने यहां आना लगभग बंद कर दिया है। फल-सब्जी खरीदने वाले लोग अब शहर के अन्य बाजारों का रुख कर रहे हैं।

अधिकारियों की ड्यूटी के बावजूद नहीं सुधार
चंडीगढ़ प्रशासन ने मंडी के रखरखाव के लिए मंडी प्रशासक सहित करीब एक दर्जन अधिकारियों — पीसीएस, एचसीएस और दानिक्स अधिकारियों — की डेली निरीक्षण कर रिपोर्ट देने की ड्यूटी भी लगा रखी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा।
प्रशासन की इस कार्यप्रणाली पर व्यापारी और आम लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब इतने अधिकारी निगरानी कर रहे हैं तो स्थिति सुधर क्यों नहीं रही।

सेक्टर-39 मंडी पर खर्च हुए करोड़ों
मंडी की समस्या का समाधान करने के लिए सेक्टर-39 में नई सब्जी मंडी बनाने की योजना पर पिछले करीब 20 वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यह परियोजना आज तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी।
व्यापारियों का कहना है कि यदि सेक्टर-39 की मंडी समय पर तैयार हो जाती तो सेक्टर-26 मंडी का दबाव काफी कम हो सकता था।

प्रशासन के लिए बनी सिरदर्द
सेक्टर-26 मंडी अब चंडीगढ़ प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। पिछले करीब दो दशकों में करीब दो दर्जन प्रशासक, सलाहकार और मुख्य सचिव बदल चुके हैं, लेकिन मंडी की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

प्रशासक से जगी उम्मीद
व्यापारियों और शहर की जनता को अब उम्मीद है कि गुलाब चंद कटारिया इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाएंगे। कई लोग फिलहाल मंडी को सेक्टर-39 में अस्थायी रूप से शिफ्ट करने की मांग भी कर रहे हैं, ताकि सेक्टर-26 मंडी की स्थिति सुधारी जा सके।

किराए के भवन में चल रहा मंडी सचिव का दफ्तर
जानकारी के अनुसार कई वर्षों से मंडी सचिव का कार्यालय भी किराए के भवन में संचालित हो रहा है, जो इस व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
व्यापारियों का कहना है कि जब तक मंडी प्रबंधन, सफाई व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण और अतिक्रमण हटाने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए जाते, तब तक सेक्टर-26 मंडी की हालत सुधरना मुश्किल है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासक के ताजा निरीक्षण और कार्रवाई के बाद क्या वास्तव में मंडी की तस्वीर बदलती है या फिर यह समस्या पहले की तरह ही बनी रहती है।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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