चंडीगढ़/पंचकूला। आज चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस तिथि के अधिपति भगवान रुद्र (भगवान शिव का उग्र रूप) हैं, इसलिए आज का दिन विशेष रूप से शिव साधना, पूजा-पाठ और आत्मचिंतन के लिए उत्तम माना जा रहा है। वहीं आज दर्श अमावस्या भी है, जिस कारण पितरों के तर्पण और दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन आध्यात्मिक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है, लेकिन विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ मांगलिक कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
आज का पंचांग (18 मार्च 2026)
विक्रम संवत: 2082
मास: चैत्र
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: चतुर्दशी
दिन: बुधवार
योग: साध्य
नक्षत्र: शतभिषा
करण: शकुनी
चंद्र राशि: कुंभ
सूर्य राशि: मीन
सूर्योदय: सुबह 06:28 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:31 बजे
चंद्रास्त: शाम 05:56 बजे
चंद्रोदय: 19 मार्च सुबह 06:23 बजे
शतभिषा नक्षत्र में चंद्रमा, यात्रा के लिए अनुकूल समय
आज चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित है और शतभिषा नक्षत्र में गोचर कर रहा है। यह नक्षत्र सुबह 6:40 बजे से रात 8:00 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके देवता वरुण और स्वामी राहु हैं।
ज्योतिष के अनुसार, शतभिषा नक्षत्र को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता, लेकिन यात्रा, शोध, आध्यात्मिक उन्नति और मित्रों से मुलाकात के लिए यह समय लाभकारी साबित हो सकता है।
आज का वर्जित समय (राहुकाल और यमगंड)
राहुकाल: दोपहर 12:29 बजे से 02:00 बजे तक
यमगंड काल: सुबह 07:58 बजे से 09:29 बजे तक
इस दौरान किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा गुलिक काल, दुमुहूर्त और वर्ज्यम् समय में भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
धार्मिक महत्व और क्या करें आज
आज का दिन विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित है। श्रद्धालु रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप और उपवास कर सकते हैं। इसके साथ ही पितरों की शांति के लिए दान-पुण्य और तर्पण करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
निष्कर्ष:
18 मार्च 2026 का दिन आध्यात्मिक साधना, आत्मविश्लेषण और योजना बनाने के लिए उत्तम है। हालांकि, शुभ मांगलिक कार्यों से दूरी बनाकर धार्मिक और सकारात्मक कार्यों में समय देना अधिक लाभकारी रहेगा।










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