मुकेश आहूजा 30 जून 2026 तक रहेंगे पद पर
बाबूगिरी ब्यूरो
चंडीगढ़: हरियाणा में लंबे समय बाद किसी आईएएस अधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद तीन महीने की पुनर्नियुक्ति (री-एम्प्लॉयमेंट) देने का मामला सामने आया है। राज्य सरकार ने 2009 बैच के आईएएस अधिकारी मुकेश कुमार आहूजा को 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक पुनः नियुक्ति प्रदान की है।
दो अहम पदों पर बने रहेंगे आहूजा
कार्मिक विभाग के आदेश के अनुसार, 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए आहूजा इस अवधि के दौरान हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक (चीफ एडमिनिस्ट्रेटर) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के सचिव पद पर ही कार्यरत रहेंगे। इन दोनों पदों पर वे पिछले करीब तीन वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं।
पहले भी मिल चुकी है ऐसे पुनर्नियुक्ति
इससे पहले 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार रॉय को सितंबर 2025 में सेवानिवृत्ति के बाद तीन माह तक जेल महानिदेशक पद पर रखा गया था।
वहीं 2019 में 2002 बैच के आईएएस अधिकारी समीर पाल सरो को भी रिटायरमेंट के बाद तीन महीने के लिए सूचना एवं लोकसंपर्क विभाग के महानिदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति दी गई थी।
नियमों की व्याख्या पर बहस
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार, आईएएस (कैडर) नियमावली, 1954 के नियम 9(1) के तहत राज्य सरकार किसी अधिकारी को अधिकतम तीन माह तक पद पर बनाए रख सकती है और इसके लिए केंद्र की अनुमति जरूरी नहीं होती।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे सेवा-विस्तार (एक्सटेंशन) नहीं, बल्कि पुनर्नियुक्ति (री-एम्प्लॉयमेंट) कहा जाता है। इसमें सेवानिवृत्त अधिकारी को नॉन-कैडर अधिकारी मानते हुए अस्थायी तौर पर कैडर पद पर तैनात किया जाता है।
एक्सटेंशन और री-एम्प्लॉयमेंट में अंतर
हेमंत कुमार ने बताया कि वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को केंद्र सरकार द्वारा एक वर्ष का सेवा-विस्तार दिया गया है, जो पुनर्नियुक्ति से अलग प्रक्रिया है। एक्सटेंशन में अधिकारी सेवा में बना रहता है, जबकि री-एम्प्लॉयमेंट रिटायरमेंट के बाद नई नियुक्ति होती है।
स्थायी पदों पर नियुक्ति पर उठे प्रश्न
विशेष बात यह है कि हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक और एचपीएससी के सचिव दोनों ही स्थायी कैडर पद हैं। ऐसे में इन पदों पर सेवानिवृत्त अधिकारी की पुनर्नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
पुरानी परंपरा, जारी बहस
जानकारों के मुताबिक, रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को पुनर्नियुक्ति देने की परंपरा हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में शुरू हुई थी, जिसे बाद की सरकारों ने भी जारी रखा है। हालांकि, नियमों की व्याख्या और इसके औचित्य को लेकर अब भी बहस जारी है।













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