May 23, 2026 5:44 pm

May 23, 2026 5:44 pm

गुरुग्राम में स्टिल्ट+4 निर्माण पर हाईकोर्ट की सख्ती, इंफ्रास्ट्रक्चर संकट के चलते नीति पर अंतरिम रोक

बाबूगिरी ब्यूरो

चंडीगढ़/गुरुग्राम: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम में स्टिल्ट+4 फ्लोर निर्माण नीति पर कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शहर में पहले से मौजूद आधारभूत सुविधाओं पर बढ़ते दबाव के बीच अतिरिक्त मंजिलों की अनुमति देना न केवल अव्यवस्थित शहरी विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि यह आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

क्या है मामला
दरअसल, गुरुग्राम में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और आवासीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा सरकार ने 2 जुलाई 2024 को एक अधिसूचना जारी की थी। इस नीति के तहत रिहायशी प्लॉट्स पर स्टिल्ट (पार्किंग) के ऊपर चार मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई थी।
सरकार का उद्देश्य बढ़ती आबादी के लिए आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन इस फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें इस नीति को अव्यवस्थित और खतरनाक बताया गया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि—
शहर की सड़कों, सीवरेज, जलापूर्ति और बिजली व्यवस्था पहले ही दबाव में हैं
ऐसे में अतिरिक्त फ्लोर की अनुमति से स्थिति और बिगड़ सकती है
बिना पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के इस तरह की मंजूरी देना “पब्लिक सेफ्टी” के साथ समझौता है
कोर्ट ने यह भी कहा कि शहरी नियोजन में संतुलन और दीर्घकालिक सोच जरूरी है, केवल निर्माण की अनुमति देना समाधान नहीं है।

अधिसूचना पर रोक
अदालत ने हरियाणा सरकार की 2 जुलाई 2024 की अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि फिलहाल गुरुग्राम में स्टिल्ट+4 निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि—
कई क्षेत्रों में पानी और सीवरेज की समस्या पहले से गंभीर है
पार्किंग की कमी के कारण सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ रहा है
फायर सेफ्टी और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच सीमित है
इन परिस्थितियों में अतिरिक्त फ्लोर की अनुमति से हालात और बदतर हो सकते हैं।

सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या इस नीति को लागू करने से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता का कोई ठोस आकलन किया गया था।

आगे क्या
मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि—
क्या इस नीति को संशोधन के साथ लागू किया जा सकता है
या इसे पूरी तरह निरस्त किया जाए
फिलहाल, इस फैसले से गुरुग्राम में निर्माण गतिविधियों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है और रियल एस्टेट सेक्टर में भी हलचल तेज हो गई है।

हाईकोर्ट का यह फैसला शहरी विकास और बुनियादी ढांचे के बीच संतुलन की जरूरत को उजागर करता है। गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते शहरों के लिए यह एक अहम संकेत है कि विकास केवल ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से ही संभव है।

Loading Viewer...

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

बाबूगिरी हिंदी

virender chahal

Our Visitor

3 2 3 4 7 9
Total Users : 323479
Total views : 540155

शहर चुनें