पंचकूला: नगर निगम पंचकूला के बहुचर्चित एफडी घोटाले को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों एक स्थानीय नेता द्वारा घोटाले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी, जिसमें बड़े खुलासों का दावा किया गया था। हालांकि, प्रेस वार्ता के दौरान संबंधित नेता ने किसी भी आरोपी का नाम लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके पास ठोस सबूत नहीं हैं।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि अन्य नेताओं ने खुलकर घोटाले में शामिल आरोपियों के नाम लेकर कार्रवाई की मांग उठाई थी। ऐसे में “प्रूफ के साथ पोल खोलने” के दावे के बावजूद नाम न लेने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के हवाले से बड़े आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित नेता को चुनाव के दौरान भाजपा के कुछ नेताओं का समर्थन मिला था। आरोप यह भी है कि उन्हीं में से एक भाजपा नेता के रिश्तेदार के खाते में इस एफडी घोटाले की रकम ट्रांसफर हुई बताई जा रही है। यही वजह बताई जा रही है कि अब मामले को सार्वजनिक रूप से उठाने में हिचकिचाहट दिखाई जा रही है।
वोट की राजनीति का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के इस बड़े घोटाले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता आगामी निगम चुनाव को ध्यान में रखते हुए एक-दूसरे के खिलाफ खुलकर नहीं बोल रहे हैं। लोगों का कहना है कि सभी नेता पार्टी लाइन से ऊपर उठकर एक-दूसरे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे घोटाले की जांच प्रभावित हो सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट ने बढ़ाई हलचल
इस बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े इस घोटाले की राशि को कई खातों में ट्रांसफर कर आगे निवेश किया गया। पोस्ट के अनुसार, आरोपित रजत धारा को 6 दिन के रिमांड पर लिया गया है और करीब 160 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न लोगों के खातों में भेजी गई।
पोस्ट में यह भी कहा गया है कि शहर के कई बड़े व्यापारियों और प्रॉपर्टी कारोबारियों को यह पैसा ब्याज पर दिया गया था। हालांकि, इन व्यापारियों को यह जानकारी नहीं थी कि यह रकम घोटाले से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि अधिकांश व्यापारियों ने यह पैसा ब्याज सहित वापस भी कर दिया है।
फर्जी खातों से 160 करोड़ की हेराफेरी, गिरफ्तारी के बाद सियासत गरम—CBI जांच की मांग तेज
नगर निगम पंचकूला का बहुचर्चित एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) घोटाला अब हरियाणा के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में शामिल होता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपये की इस हेराफेरी में अब तक कई चौंकाने वाले खुलासे हो चुके हैं, जबकि ताजा घटनाक्रम के बाद मामला और भी गरमा गया है।
कैसे हुआ पूरा घोटाला? (Modus Operandi)
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले की शुरुआत वर्ष 2020 के आसपास हुई, जब नगर निगम में तैनात अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक, सेक्टर-11 पंचकूला में निगम के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए।
पहला फर्जी खाता: वर्ष 2020
दूसरा फर्जी खाता: वर्ष 2022
खातों के नंबर: 2015073031 और 2046279112
इन खातों को खोलने के लिए अधिकारियों की फर्जी मोहरें और हस्ताक्षर तक तैयार किए गए। इसके बाद निगम के असली खातों और एफडी से पैसे निकालने के लिए फर्जी RTGS/NEFT डेबिट वाउचर बनाए गए।
सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि:
निगम की एफडी को समय से पहले तुड़वाया गया
रकम को फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया
वहां से अलग-अलग लोगों और खातों में पैसे घुमाए गए
160 करोड़ रुपये तक पहुंचा घोटाला
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे घोटाले की रकम करीब 160 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यह पैसा कथित तौर पर कई खातों में ट्रांसफर कर आगे निवेश किया गया।
गिरफ्तारियां और जांच
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए:
पूर्व सीनियर अकाउंट ऑफिसर विकास कौशिक को गिरफ्तार किया
अन्य सहयोगियों, जिनमें बैंक और निजी लोग शामिल हैं, की भूमिका की जांच जारी है
इसके अलावा,
आरोपी रजत धारा को 6 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है
पूछताछ में कई नए नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है
पैसा कहां गया? (Money Trail)
जांच में सामने आया है कि:
घोटाले की रकम को पहले फर्जी खातों में डाला गया
फिर इसे कई निजी खातों में ट्रांसफर किया गया
कुछ रकम प्रॉपर्टी कारोबारियों और व्यापारियों को ब्याज पर दी गई
कई लोगों ने यह पैसा ब्याज सहित वापस भी कर दिया
बताया जा रहा है कि कई व्यापारियों को यह जानकारी ही नहीं थी कि उन्हें दिया गया पैसा घोटाले से जुड़ा हुआ है।
सोशल मीडिया खुलासे और शहर में चर्चा
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स ने इस मामले को और हवा दे दी है। इनमें दावा किया गया है कि घोटाले की रकम शहर के बड़े नेटवर्क में घुमाई गई और कई प्रभावशाली लोगों तक पहुंची।
जनता का गुस्सा, सीबीआई जांच की मांग
शहर के लोगों में इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि अब जब घोटाले की परतें खुल रही हैं, तो नेताओं को खुलकर सामने आना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके और दोषियों को सजा मिल सके।
फिलहाल, घोटाले को लेकर सियासत गरमा गई है, लेकिन जनता को अब ठोस कार्रवाई का इंतजार है।











Total Users : 290960
Total views : 493075