DDA को बिना संतुष्टि नहीं मिलेगी पेड़ काटने की अनुमति
नई दिल्ली: दिल्ली रिज क्षेत्र में पेड़ कटाई और सड़क चौड़ीकरण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक वह स्वयं यह संतुष्ट नहीं हो जाता कि 1 लाख 60 हजार पौधे वास्तव में लगाए गए हैं और जीवित हैं, तब तक और पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सड़क परियोजना के लिए मांगी गई थी 473 पेड़ काटने की अनुमति
CAPFIMS को जोड़ने वाली सड़क चौड़ीकरण योजना पर सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ DDA की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (CAPFIMS) को जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण के लिए 473 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई है।
“अनुपालन कहां है?” – CJI का सवाल
18 पॉकेट और 1.65 लाख पौधों की स्थिति पर मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा,
“जब तक हम खुद अनुपालन से संतुष्ट नहीं हो जाते, हम कुछ भी नहीं होने देंगे। 1.65 लाख पौधों और 18 पॉकेट का क्या हुआ?”
कोर्ट ने साफ किया कि यह 10 या 100 पेड़ों का मामला नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर पारिस्थितिक बहाली से जुड़ा विषय है।
185 एकड़ जमीन चिन्हित, 28 फरवरी तक काम पूरा करने का दावा
डीडीए ने बाउंड्री वॉल निर्माण की दी जानकारी
DDA की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि 185 एकड़ जमीन पौधारोपण के लिए चिन्हित कर ली गई है और उसका कब्जा भी मिल चुका है।
उन्होंने कहा कि जमीन के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाने की प्रक्रिया जारी है, जिसे 28 फरवरी तक पूरा करने की उम्मीद है।
“मृत्यु दर शून्य होनी चाहिए”
पौधा मरे तो तुरंत बदलना होगा – सुप्रीम कोर्ट
CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पौधारोपण के बाद सर्वाइवल रेट शून्य मृत्यु दर वाला होना चाहिए।
“अगर कोई पौधा मरता है, तो उसे तुरंत बदला जाना चाहिए। हम यह देखना चाहते हैं कि वहां वास्तव में 1.60 लाख पौधे उगें,” कोर्ट ने कहा।
पीपल, बरगद, आंवला और अमलतास जैसे देशी वृक्षों के रोपण पर भी जोर दिया गया।
ट्रांसप्लांटेशन पर भी सवाल
“हर पेड़ को कहीं भी शिफ्ट नहीं किया जा सकता”
कोर्ट ने कहा कि ट्रांसप्लांटेशन हर पेड़ के लिए संभव नहीं होता, यह पेड़ की उम्र और आकार पर निर्भर करता है।
एक वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि पहले बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा चुके हैं, जिस कारण यह मामला अवमानना तक पहुंचा।
“एआई से बना जंगल नहीं चाहिए”
असली और सत्यापन योग्य पारिस्थितिक बहाली पर जोर
CJI ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा,
“हम नहीं चाहते कि ये 18 पॉकेट एआई से बने जंगल बनें।”
उन्होंने वास्तविक, जमीन पर दिखने वाली और सत्यापन योग्य पारिस्थितिक बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया।
28 मई 2025 के आदेश के पालन तक कोई नई अनुमति नहीं
19 जनवरी को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि 28 मई 2025 को दिए गए पिछले आदेशों के पूर्ण पालन तक किसी भी तरह की नई पेड़ कटाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।
DDA ने विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय की है।
CAPFIMS परियोजना का महत्व
अर्धसैनिक बलों के लिए बड़ा हेल्थकेयर और एजुकेशन हब
गौरतलब है कि मैदानगढ़ी स्थित CAPFIMS परियोजना BSF, CRPF, CISF सहित केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों को विशेष चिकित्सा सेवाएं, नर्सिंग शिक्षा और पैरामेडिकल प्रशिक्षण प्रदान करती है।
DDA ने इस परियोजना के लिए 2,519 पेड़-पौधों के ट्रांसप्लांटेशन और 2.97 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की भी अनुमति मांगी है।











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