बाबूगिरी ब्यूरो
पंचकूला, 21 अप्रैल। : नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर शहर का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। भले ही अभी तक किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल ने मेयर और पार्षद पदों के लिए आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनावी गतिविधियां पूरी तरह से शुरू हो चुकी हैं। संभावित उम्मीदवारों ने टिकट की घोषणा से पहले ही अपने-अपने वार्डों में चुनावी कार्यालय खोलकर ताकत दिखानी शुरू कर दी है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस बार चुनाव से पहले ही दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी तेज नजर आ रही है। हर पार्टी के कई नेता टिकट के लिए दावेदारी जता रहे हैं और अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
कांग्रेस ने दिखाई पहल, बाकी दलों में मंथन जारी
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कांग्रेस ने सुधा भारद्वाज को मेयर पद के लिए उम्मीदवार घोषित करने की दिशा में पहल की है, जबकि अन्य दल जैसे भाजपा और आम आदमी पार्टी अब भी उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन में जुटे हुए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सभी दल “विनिंग कैंडिडेट” की तलाश में हैं, जिससे चुनावी समीकरणों को साधा जा सके।
टिकट की उम्मीद में बढ़ी सक्रियता
टिकट के दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। आशीर्वाद लेने के साथ-साथ अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए वे क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। कई जगहों पर छोटी-छोटी बैठकों, मोहल्ला सभाओं और घर-घर संपर्क कार्यक्रमों का आयोजन भी शुरू हो चुका है।
इसी के साथ संभावित उम्मीदवारों ने अपने वार्डों में चुनावी कार्यालय खोल दिए हैं, जहां से वे अपने समर्थकों के साथ रणनीति तैयार कर रहे हैं। कार्यालयों के बाहर लगे पोस्टर और बैनर इस बात का संकेत दे रहे हैं कि चुनावी दौड़ अब तेज हो चुकी है।
वार्ड 12 बना चर्चा का केंद्र
वार्ड नंबर 12 में एक भाजपा नेता द्वारा चुनावी कार्यालय खोले जाने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। उक्त नेता ने टिकट मिलने का दावा करते हुए प्रचार की शुरुआत कर दी है। उनके इस कदम से अन्य दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई है और वे भी अपनी सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं।
स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां यह दर्शाती हैं कि टिकट वितरण से पहले ही अंदरूनी प्रतिस्पर्धा चरम पर पहुंच चुकी है।
अन्य वार्डों में भी कड़ी टक्कर
केवल वार्ड 12 ही नहीं, बल्कि शहर के कई अन्य वार्डों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। संभावित उम्मीदवार “टिकट पक्का” होने के आश्वासन के आधार पर अपने-अपने कार्यालय खोल रहे हैं और समर्थकों को संगठित कर रहे हैं। इससे यह साफ हो गया है कि इस बार चुनाव में मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा रहने वाला है।
पार्टी हाईकमान पर बढ़ा दबाव
दावेदारों की बढ़ती संख्या और उनके बीच प्रतिस्पर्धा ने पार्टी हाईकमान पर भी दबाव बढ़ा दिया है। सही उम्मीदवार का चयन करना दलों के लिए चुनौती बन गया है, क्योंकि गलत फैसला चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
जनता भी कर रही है इंतजार
वहीं, शहर की जनता भी उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रही है। लोगों का मानना है कि उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद ही असली चुनावी तस्वीर साफ होगी और मुद्दों पर आधारित प्रचार तेज होगा।
नजरें टिकट वितरण पर
फिलहाल, पूरे पंचकूला में नजरें राजनीतिक दलों की उम्मीदवार सूची पर टिकी हुई हैं। देखना होगा कि जिन नेताओं ने टिकट के भरोसे अपने चुनावी कार्यालय खोल दिए हैं, उनमें से किसे पार्टी का “ग्रीन सिग्नल” मिलता है और किसे निराशा हाथ लगती है।
आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही पंचकूला नगर निगम चुनाव का राजनीतिक समीकरण और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।










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