May 3, 2026 4:39 pm

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HARYANA NEWS: ​शिक्षा के मंदिर या बदहाली के केंद्र? हरियाणा के सरकारी कॉलेजों का गिरता स्तर युवाओं के भविष्य पर बड़ा प्रहार – राजबीर सिंह भारतीय

सरकारी कॉलेजों की बदहाली: क्या इसी तरह सुरक्षित होगा युवाओं का भविष्य? – राजबीर सिंह भारतीय

बाबूगिरी ब्यूरो
​चंडीगढ़, 2 मई: हरियाणा के सरकारी कॉलेजों की दयनीय स्थिति और उच्च शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लेते हुए, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एडवोकेट जनरल कार्यालय से सेवानिवृत्त अधीक्षक और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता राजबीर सिंह भारतीय ने एक विस्तृत प्रेस वक्तव्य जारी किया है। उन्होंने प्रदेश के कॉलेजों की ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं कि आखिर युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ कब तक जारी रहेगा?

“एक तरफ हम डिजिटल इंडिया और विश्व गुरु बनने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे कॉलेजों में लाइब्रेरी, लैब और खेल के मैदान तो दूर, बैठने के लिए बेंच तक नसीब नहीं हैं। अग्रोहा का कालेज, लड़कियों के स्कूल में चल रहा है। ग्राम पंचायत अग्रोहा के सरपंच आत्मा राम से बात हुई तो उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत अग्रोहा ने कालेज के लिए जमीन आबंटन की है परन्तु सरकार ने अभी तक कालेज का निर्माण नहीं किया। उधर बालसमंद और मंगाली जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में छात्र टीन शेड के नीचे और प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। क्या यही युवाओं के भविष्य को संवारने का तरीका है?”
​राजबीर सिंह भारतीय ने निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से प्रदेश की उच्च शिक्षा की खोखली हो चुकी व्यवस्था को उजागर किया

प्रशासनिक अनदेखी पर तीखा प्रहार:
उन्होंने कहा कि सरकार ने वाहवाही लूटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलेज तो खोल दिए, लेकिन 7-8 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें खुद का भवन नसीब नहीं हुआ। मंगाली के कॉलेज में टीन शेड के नीचे कक्षाएं लगना और गुरुग्राम के पटौदी में सामुदायिक केंद्र की पहली मंजिल पर कॉलेज चलना, हरियाणा की उच्च शिक्षा की दयनीय स्थिति का प्रमाण है। स्टाफ की कमी के कारण दाखिले कम हो रहे हैं और मजबूरन कई महत्वपूर्ण कोर्स बंद करने पड़ रहे हैं।

​1. बिना छत और भवन के चल रहे हैं ‘शिक्षा के मंदिर
​भारतीय ने बताया कि प्रदेश में 185-187 सरकारी कॉलेज होने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि 32 कॉलेजों के पास अपनी बिल्डिंग तक नहीं है।
​मंगाली (हिसार): यहाँ विद्यार्थी टीन शेड के नीचे बैठकर भविष्य गढ़ने को मजबूर हैं।
​कुलाना (झज्जर): यहाँ 2018 में कॉलेज की घोषणा हुई थी, जो आज भी मंदिर के कमरों में चल रहा है जहाँ विद्यार्थी कंडम बेंचों पर पढ़ रहे हैं।
​पटौदी (गुरुग्राम): सामुदायिक केंद्र की पहली मंजिल पर कक्षाएं लगती हैं, जबकि नीचे शोर-शराबे वाले सार्वजनिक समारोह होते हैं।
राजबीर सिंह ने अभिवावकों की तरफ से सरकार से पूछा कि क्या लाइब्रेरी, लैब और खेल के मैदानों के बिना केवल कमरों (वह भी उधार के) में डिग्री बांटना ही सरकार का लक्ष्य है?

​2. स्टाफ का भारी टोटा: 50% पद खाली
​राजबीर सिंह भारतीय ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग में रिक्तियों की स्थिति भयावह है:
​कुल स्वीकृत 11,117 पदों में से केवल 5,598 नियमित कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
​कॉलेजों में 95 प्राचार्य (प्रिंसिपल), 2,819 सहायक प्रोफेसर और 753 ग्रुप-सी कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं।
​कई कॉलेजों में तो स्वीकृत पद ही नहीं हैं, जिसके कारण वहां कोई स्थायी तबादला लेकर भी नहीं जा सकता। गन्नौर और जाखौली जैसे कॉलेजों में केवल डेपुटेशन के भरोसे शिक्षा का ढांचा टिका हुआ है।

​3. गिरती छात्र संख्या और बंद होते कोर्सेज
​इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ की कमी का सीधा असर दाखिलों पर पड़ रहा है। भारतीय ने उदाहरण दिया:
​बालसमंद: 2018 से प्राइमरी स्कूल में चल रहे इस कॉलेज में बदहाली के कारण बीकॉम कोर्स बंद करना पड़ा।
​अग्रोहा: यहाँ 60 सीटों में से 18 खाली रह गईं क्योंकि विद्यार्थियों के पास बैठने के लिए डेस्क तक नहीं हैं और उन्हें प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठना पड़ता है।
​बरोदा: यहाँ बिल्डिंग की छत से मलबा गिरने के कारण विद्यार्थियों को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट करना पड़ा।

​अभिभावकों और युवाओं की ओर से सरकार से सीधा सवाल
​राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “अभिभावक और देश का युवा आज सरकार से जवाब मांग रहा है। केवल कागजों पर कॉलेज खोल देने से शिक्षा का प्रसार नहीं होता। जब तक नियमित भर्ती नहीं होगी और कॉलेजों को उनकी अपनी इमारतें नहीं मिलेंगी, तब तक हरियाणा का युवा पिछड़ा रहेगा।”

​प्रमुख मांगें:
​इन्फ्रास्ट्रक्चर का समयबद्ध निर्माण: 32 कॉलेजों की इमारतों का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू हो।

​नियमित भर्ती:
गेस्ट और एक्सटेंशन फैकल्टी के भरोसे रहने के बजाय खाली पड़े 5,500+ पदों पर तुरंत स्थायी नियुक्तियां की जाएं।

​ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान:
ग्रामीण इलाकों के कॉलेजों को स्कूलों और आईटीआई से निकालकर उन्हें स्वतंत्र कैंपस और आधुनिक लैब उपलब्ध कराई जाएं।
​राजबीर सिंह भारतीय ने उमीद जाहिर करते हुए कहा कि शिक्षा के बजट का सही इस्तेमाल जमीन पर दिखना चाहिए, न कि केवल विज्ञापनों में। यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी इस प्रशासनिक अनदेखी के लिए हमें कभी माफ नहीं करेगी।
उन्होंने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि युवाओं को समय पर बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं, तो यह न केवल हरियाणा के भविष्य के लिए घातक होगा, बल्कि देश की प्रगति में भी एक बड़ी बाधा बनेगा।

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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