स्वच्छ सर्वेक्षण-2025 के तहत एसडब्ल्यूएम बाय-लॉज में संशोधन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर सख्त कदम
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 9 मई: नगर निगम खुले में शौच और पेशाब पर करने पर कड़े नियम लागू करने जा रहा है। अब खुले में पेशाब करने पर अब 10 हजार रुपये जुर्माना देना होगा।
देश के सबसे स्वच्छ और सुनियोजित शहरों में गिने जाने वाले चंडीगढ़ में अब खुले में शौच और खुले में पेशाब करना लोगों को भारी पड़ सकता है। चंडीगढ़ नगर निगम ने ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) उपनियम-2018 में बड़ा संशोधन करते हुए इन गतिविधियों को “लिटरिंग” यानी सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने की श्रेणी में शामिल कर दिया है। संशोधित नियमों के तहत अब खुले में शौच या पेशाब करते पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को कुल 10,000 रुपये का दंड भरना होगा।
नगर निगम द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार यह संशोधन केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के स्वच्छ सर्वेक्षण-2025 दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया है। प्रशासन का कहना है कि शहर में स्वच्छता के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने, सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और “सिटी ब्यूटीफुल” की छवि को और मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
क्या है नया नियम?
नगर निगम द्वारा संशोधित ठोस कचरा प्रबंधन उपनियम-2018 के अनुसार खुले में शौच और खुले में पेशाब अब स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध माने जाएंगे।
नए नियम के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर:
500 रुपये का जुर्माना
9,500 रुपये प्रशासनिक शुल्क
लगाया जाएगा। इस तरह कुल दंड राशि 10,000 रुपये होगी।
नगर निगम का कहना है कि यह कदम केवल दंड देने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर फोकस
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार खुले में शौच और पेशाब न केवल शहर की सुंदरता को प्रभावित करते हैं, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बनते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ता है। खासतौर पर गर्मियों और बरसात के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है।
नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शहर में लाखों लोग रोजाना सार्वजनिक स्थानों, पार्कों, बस स्टैंड, बाजारों और अन्य क्षेत्रों का उपयोग करते हैं। ऐसे में स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन और नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है।
स्वच्छ सर्वेक्षण-2025 की तैयारी
स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर साल होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण में चंडीगढ़ लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करता रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण शहरों के बीच स्वच्छता को लेकर सख्त मानक लागू किए गए हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने अब नियमों को और कठोर बनाया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि शहर को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर रैंकिंग हासिल करनी है तो केवल सफाई अभियान ही नहीं, बल्कि नागरिक अनुशासन भी जरूरी है।
स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत खुले में शौच और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने को गंभीर मानकों में शामिल किया गया है। ऐसे में प्रशासन अब “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम करता दिखाई दे रहा है।
शहर में बढ़ेगी निगरानी
नगर निगम सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में विभिन्न बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, बस अड्डों, पार्कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाएगी। स्वच्छता निरीक्षकों और प्रवर्तन टीमों को विशेष अधिकार दिए जा सकते हैं ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
नगर निगम शहर के अलग-अलग हिस्सों में अभियान चलाकर लोगों को जागरूक भी करेगा। इसके अलावा सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संकेतक बोर्ड और सूचना अभियान भी चलाए जाएंगे।
“सिटी ब्यूटीफुल” की पहचान बचाने की कोशिश
चंडीगढ़ देश का पहला योजनाबद्ध शहर माना जाता है और इसकी पहचान “सिटी ब्यूटीफुल” के रूप में रही है। चौड़ी सड़कें, हरियाली, साफ-सुथरे सेक्टर और बेहतर शहरी व्यवस्था इसकी विशेषता मानी जाती है।
लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी और सार्वजनिक अनुशासन में कमी के कारण कई स्थानों पर गंदगी और अस्वच्छता की शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रशासन का मानना है कि यदि शहर की मूल पहचान को बरकरार रखना है तो स्वच्छता नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।
नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें और उपलब्ध सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करें।
लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
नगर निगम के इस फैसले को लेकर शहरवासियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने इसे स्वच्छता के लिए जरूरी कदम बताया है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पहले पर्याप्त सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
सेक्टर-22 के निवासी राजेश कुमार ने कहा कि “अगर शहर को साफ रखना है तो ऐसे कड़े नियम जरूरी हैं। लोग तब तक नहीं मानते जब तक आर्थिक दंड न लगाया जाए।”
वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मजदूर वर्ग और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। उनका मानना है कि केवल जुर्माना लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग पर जोर
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में कई स्थानों पर सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालय उपलब्ध हैं और नागरिकों को उनका उपयोग करना चाहिए। प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में इन सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाएगा।
नगर निगम के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में शौचालय सुविधा की कमी पाई जाती है तो वहां नई सुविधाएं विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा।
पहले भी चल चुके हैं अभियान
चंडीगढ़ नगर निगम इससे पहले भी शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर कई विशेष अभियान चला चुका है। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने, निर्माण सामग्री सड़क पर डालने और अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई होती रही है। हाल ही में निगम ने कई इलाकों में देर रात तक अतिक्रमण हटाओ अभियान भी चलाया था।
अब खुले में शौच और पेशाब को लेकर लागू किए गए नए नियम यह संकेत देते हैं कि प्रशासन स्वच्छता के मुद्दे पर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
नागरिक सहयोग सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शहर को स्वच्छ बनाने में केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती, बल्कि नागरिकों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि लोग स्वयं स्वच्छता के प्रति जागरूक रहें और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाएं, तभी ऐसे प्रयास पूरी तरह सफल हो सकते हैं।
नगर निगम ने भी अपने सार्वजनिक संदेश में नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सभी लोग मिलकर चंडीगढ़ को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहर बनाए रखने में योगदान दें।













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