May 23, 2026 6:30 pm

May 23, 2026 6:30 pm

आफ द रिकार्ड–यशवीर कादियान

लोगों ने मुझे बताया कि वक्त्त बदल जाता है
वक्त्त ने बताया कि लोग भी बदल जाते हैं
वक्त क्या होता है। जब बदलता है, तो क्या होता है। क्यों कहा जाता है कि वक्त से डर कर रहना चाहिए। आज समय की महिमा-किस्मत की महिमा पर बात करते हैं।

इसी शुक्रवार, 8 मई, सुबह करीब 9 बजे से ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की चंडीगढ के हरियाणा निवास में प्रैस कांफ्रेस के लिए पत्रकारों का लाव लश्कर के साथ पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। चंूकि इस कार्यक्रम से पहले नाश्ते का भी प्रबंध था तो कुछ साथियों के लिए यहां आने का अतिरिक्त चाव भी था। अतिरिक्त कारण भी था। संवाददाता सम्मेलन का समय 10 बजे था और तब तक हरियाणा निवास पर पहली मंजिल पर स्थित प्रैस काफ्रेंस वाला हाल पत्रकारों और अधिकारियों से लबालब भर चुका था। मुख्यमंत्री कुछ देर से आए। पहले वो इस हाल से सटे सीएम सुईट में गए। उनके आते ही कई अफसर अपनी कुर्सी छोड़ कर सीएम सुईट में अवतरित हो गए थे। उनके सम्मान में या कहें कि अपना चेहरा दिखाने या अपनी हाजिरी लगाने या कि आज के कार्यक्रम के बारे में उनको ब्रीफ करने के लिए। ये सब इनकी डयूटी का हिस्सा होता है। मुख्यमंत्री ने इस प्रैस कांफ्रैस के जरिए हरियाणा के विभिन्न श्रेणियों में लाभान्वित होने वाले लोगों के लिए सरकारी धनराशि सीधे उनके खाते में डालने का डिजिटली शुभारंभ किया। इस दौरान वहां मौजूद हरियाणा की अफसरशाही का मिजाज दर्शनीय था। मुख्यमंत्री को ये बताया जा रहा था कि उनके करकमलों से कितने विराट कार्य सम्पन्न हो रहे हैं। इस कार्यक्रम में अधिकारीगण बोल रहे थे कि मुख्यमंत्री की प्रेरणा से ,उनके मार्गदर्शन में,उनके कुशल नेतृत्व में, ये सब हो पा रहा है। और भी बहुत कुछ..बहुत कुछ मुख्यमंत्री की शान में इस बेला में बोला जा रहा था। मंद मंद मुस्कराते हुए मुख्यमंत्री भी पूरी फीलिंग ले रहे थे। शायद सोच रहे होंगे कि उनके हाथ कब करकमलों में परिवर्तित हो गए ये तो उनको भी पता ही नहीं लगा। अचानक से उनके साथ ऐसा सा हुआ होगा कि जब रात को वो सोए तो उनके हाथ थे और अगले दिन दोपहर तक उनके हाथ करकमलों में तबदील हो चुके थे। उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन का लाभ इस समय जितनी हरियाणा की अफसरशाही उठा रही है, इतना तो खुद सीएम भी नहीं उठा पा रहे होंगे। अपने कई विशिष्ट गुणों,प्रतिभा की पहचान तो मुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री बनने के बाद इस अफसरशाही ने ही करवाई होगी।

…सैनी से वो पहली मुलाकात
जब सभी दिशाओं से मान सम्मान और कल्याण की धारा अविरल भाव से बह रही थी तो मैं सैनी से जुड़ी पुरानी यादों में खो गया। तकदीर भी क्या चीज है। इंसान को कहां से कहां पहुंचा देती है। क्या ये क्या बना देती है। ये वर्ष,2014 के हरियाणा विधानसभा के चुनावों की मनोहारी बेला थी। चुनाव प्रचार शिखर पर था। भाजपा के एक केंद्रीय नेता हरियाणा में दनादन चुनावी रैलियां संबोधित कर रहे थे। पार्टी ने उनको एक हैलीकाप्टर देकर इसी काम में झोंक रखा था। इन नेता के साथ इत्तफाक से तब मैं भी था और उस दिन उनकी आखिरी चुनावी जनसभा नारायणगढ में थी। नेता जी ने हरियाणा में कई चुनावी सभाओं को संबोधित करते हुए उस दिन की अपनी आखिरी जनसभा संबोधित करने नारायणगढ पहुंचे। नारायणगढ से तब भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे नायब सिंह सैनी। चुनावी जनसभा के संबोधित करने के बाद इन नेता जी ने सैनी को मुझ से मिलवाया और उनको कहा कि ये मेरे मित्र हैं और इनको आप चंडीगढ पर इनके आवास तक छुड़वाने की व्यवस्था कर दीजिए। इसके बाद नेता जी हैलीकाप्टर में बैठ कर वापस हो लिए। यही मेरी और सैनी की पहली मुलाकात थी। हमने वहां मंच के पास बैठ कर चुनावी माहौल के बारे में गपशप की। मैंने उनको बताया कि आज हरियाणा में भाजपा की कई रैलियों को मुझे करीब से देखने का अवसर मिला है। माहौल देख कर ऐसा अंदाजा हो रहा है कि अब हरियाणा में भाजपा की सरकार डंके की चोट पर आ रही है। सैनी की चिंता अपनी नारायणगढ सीट को लेकर थी। मैंने उनको आश्वस्त किया कि मेरे पास ये फीडबैक है कि वो यहां से विजयी हो रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने कुछ लोगों को मुझे चंडीगढ भिजवाने के लिए एक गाड़ी का प्रबंध करने के लिए कहा। काफी देर के प्रयास के बाद वहां एक गाड़ी प्रकट हुई जिस पर मारूति आल्टो लिखा हुआ था। गाड़ी की हालत कुछ कुछ खस्ता थी। मैं इसे देख कर सहम भी गया और भांप भी गया कि इसी के जरिए मुझ जैसे भारी भरकम काया वाले व्यक्ति की चंडीगढ डिलीवरी की जानी है। चंूकि पहले ही देर हो चुकी थी और विकल्पों का नितांत ही अभाव था सो मैं झट से अपनी टैची लेकर इसमें बैठ लिया। इस गाड़ी में बैठते ही मेरी सवेरे से शाम तक की हैलीकाप्टर की सवारी-पायलट-एस्कार्ट की सारी खुमारी उतर गई। गाड़ी के ड्राइवर और उनके एक सहयोगी के संग मैंने आल्टो में चंडीगढ का रूख किया। इस नायाब प्रबंध के लिए सैनी साहब का धन्यवाद किया और उनको जीत की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए अपनी राह ली।

इसी दौरान मैंने चंडीगढ वापसी के सफर को कुछ सुविधाजनक बनाने के लिए अपने एक मित्र को फोन किया। उन्होंने बरवाला के नजदीक से अपनी बड़ी एसयूवी में मुझे पिक किया। और मैं इस आल्टो को टाटा बाय बाय कह के चला आया। बाद में नतीजा आया तो नायब सिंह सैनी विजयी हुए। फिर वो अवसर भी आया जब उनको हरियाणा सरकार में मंत्री बनाया गया। वो कुरूक्षेत्र से सांसद भी बने, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भी और फिर सीमए भी। सीएम बनने के बाद वो मर्सडीज जीएलएस में सफर करते हैं। यंू समझिए कि उनके पैदल से मर्सडीज तक की यात्रा का मैं साक्षात गवाह रहा हंू। अब ये तो किसी से छिपा नहीं कि अपने हरियाणा में अफसर लोग एमएलए-मंत्री को कितनी गंभीरता से लेते हैं।

मजे की बात ये है कि हरियाणा सरकार चलाने वाले जो सीनियर अधिकारीगण अपने अधीनस्थों को ये ज्ञान पेल रहे होते हैं कि एमएलए-मंत्रियों की सुननी चाहिए। उनके लिए फोन पर उपलब्ध होना चाहिए। वापस फोन करना चाहिए। इनमें से कई तो ऐसे हैं इन से ज्ञान तो चाहे कितना ही पिलवा लो लेकिन ये होते हैं मौके के यार। अगर सामने वाला नेता इनका फायदा-नुकसान करने की स्थिति में हैं तो झट से दंडवत हो जाएगें और अगर किसी भले आदमी में ये विशेषता नहीं है तो फिर उसको अ वे र्इं समझने में देर नहीं लगाते। मैंने अपने तीन दशक से ज्यादा के पत्रकारिता के जीवन में ऐसा बार बार होते हुए, लगातार होते हुए देखा है। और अब भी ये सिलसिला यंू ही जारी है।

पहले फोन नहीं उठाया.. फिर महिमामंडन में जुटे
खैर..

वापस मुददे पर लौटते हैं। शरीफ स्वभाव के सैनी बेशक हरियाणा सरकार में मंत्री हो गए थे,लेकिन हरियाणा की अफसरशाही तो अलग ही ट्रैक पर रहती है। एक दफा साक्षात मैंने ऐसा खुद देखा और महसूस किया। हुआ यंू कि मैं एक अधिकारी के साथ डिनर पर था। तभी उन अधिकारी के मोबाइल फोन पर कई फोन आए। उन अफसर ने मुझे ये बताया कि मंत्री सैनी का फोन है और उन्होंने ये आशंका जाहिर की कि उनका फोन रिसीव करने से इस हसीन शाम में खलल पड़ सकता है। बाद में जब सैनी सीएम हो गए तो उन्हीं अफसर साहिबान को अपने विभाग के एक कार्यक्रम में मैंने नायब सिंह की शान में कसीदे पढते हुए देखा। उनकी खूबियां गिनाते हुए सुना है। बाद में जब मैंने उनको पुरानी बात याद करवाई तो वो आंख दबा कर मेरी हथेली को खुजा कर कहने लगे कि ये हमारा धंधा है। हमारी रोजी रोटी है। हमें सीएम की जय जयकार करनी ही पड़ती है।

इधर वापस शुक्रवार की प्रैस वार्ता पर आते हैं। तो हरियाणा निवास में सीएम सैनी अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनवा रहे थे। विपक्ष पर तोहमत लगा रहे थे। कभी बंगाल की सीएम रही ममता बनर्जी पर तो कभी पंजाब के सीएम भगवंत मान का मजाक उड़ा रहे थे। उनके ये सब करने का असर ये हुआ कि कार्यक्रम नीरस सा नहीं रहा। इसमें स्पंदन पैदा हो गया था। आमतौर पर जब सरकारी उपलब्धियां गिनाई जाती है तो कार्यक्रम बोरिंग हो जाया करता है,लेकिन विपक्ष पर सैनी इस्टाइल के मजाकिया हमलावर तेवरों से इसमें छौंक सा लग गया था। जब जब सैनी विपक्ष पर हमलावर होते, त्यों त्यों हरियाणा की अफसरशाही के मुस्कराते हुए चेहरे,बार बार गर्दन हिलाते हुए चेहरे उनको अपनी ओर से आश्वस्त कर रहे थे कि सर जी,क्या सिक्सर मारा है आप ने। हमें अपनी सैनी सीएम साहब पर नाज है। और अफसरशाही के इस अंदाज पर जो लोग किंतु-परंतु करते हैं मेरी नजर में वो अक्ल से पैदल हैं। मतलब आप अफसरों से क्या अपेक्षा करते हैं? क्या वो अपने सीएम को सम्मान ना दें? क्या वो उनको अदब से पेश ना आएं? हो सकता है इज्जत देने लेने के इस चक्कर में वो ज्यादा बहक जाते हों। मगर ये तो उनकी डयूटी का हिस्सा ही है। वो तो अपनी डयूटी ही बजा रहे हैं। कोई गुनाह थोड़े ही कर रहे हैं। अपने बादशाह के लिए दरबारियों के इन्हीं जज्बातों पर हसरत मोहानी ने कभी लिखा होगा..
हम क्या करें,अगर तेरी आरजू न करें
दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या

पत्रकारों ने भी भरपूर साथ निभाया
और जैसा कि होता है कि इस तरह के हालात में हम पत्रकार भी कहां पीछे रहते हैं? तब तवा गर्म हो तो हम भी फुलका सेकने को उतारू रहते है। हम भी शिददत से पूरा साथ निभाते हैं। हम तो बने ही भरपूर इंसाफ करने के लिए हैं। हम में से ज्यादातर का अब ये मिजाज हो चला है कि अगर सामने वाला सत्ता में हो-ताकतवर हो तो फिर हम बैठते कहां हैं…रेंगते हैं। तो सैनी से इस पत्रकार वार्ता में सवाल भी हरियाणा की बजाय पंजाब के हालात पर पूछे जा रहे थे ताकि विपक्ष पर मोहब्बत लुटाने का जो आगाज उन्होंने किया है, उसमें किसी किस्म की रूकावट नहीं आनी चाहिए। इस से पुन: ये साबित हुआ कि न केवल हरियाणा की अफसरशाही, न केवल हरियाणा सरकार, बल्कि हरियाणा की पत्रकारिता भी बहुत सुरक्षित, संरक्षित,समृद्ध और मजबूत हाथों में है। वक्त क्या होता है और जब ये बदलता है तो क्या होता है, इसे यंू भी एक अन्य उदाहरण के जरिए समझा जा सकता है। नायब सिंह सैनी अब जब कभी किसी भी राज्य में चुनाव प्रचार के लिए जाते हैं और जब वहां के नतीजे आते हैं तो प्रचार तंत्र एक दम सक्रिय हो जाता है। जैसे कि नायब सिंह सैनी बंगाल में छह विधानसभा सीट पर चुनाव में प्रचार के लिए गए। इनमें से चार पर भाजपा को जीत मिल गई। ऐसा माना जाता है.. ऐसा मानना ही पड़ेगा..इसके अलावा कोई चारा भी नहीं है कि इन सीटों पर जीत में नायब सिंह सैनी का भारी भरकम योगदान है। हो सकता है कि शायद खुद सैनी को ये न मालूम हो कि वो बंगाल विजय में कितना बड़ा योगदान दे आए हैं। उनको भी कई दफा हम पत्रकार ही बताते हैं कि वो कितने बड़े चाणक्य हैं। इस माहौल में कभी कभी यंू भी लगने लगता है कि अगर सैनी न होते तो हमारे इस हरियाणा का क्या होता?कहीं इसका अस्तित्व तो नहीं मिट जाता? मगर चिंता मत करिए.. इस तरह के कार्यक्रम अनादि काल से चले आ रहा है। मेरे पास तो कुछ दशक का ही अनुभव है। भजनलाल शासन से ये परंपरा देखता आ रहा हंू,लेकिन हम से पुराने लोग और उन पुरानों से और ज्यादा पुराने लोग ये बताते हैं कि सत्ता में सिर्फ लोग बदलते हैं,चेहरे बदलते हैं,पार्टी बदलती है,लेकिन व्यवस्था नहीं बदलती। और चाटुकारिता उसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है। अलग अलग युगों में इसका तरीका बेशक बदलता रहा हो,लेकिन भाव, सार, मकसद, मनोरथ समान ही रहता है। ऐसे में जब तक सृष्टि है चाटुकारिता रहेगी। ये ही शाश्वत है। अजय है। अजर है। अमर है। तो अपनी मुट्ठी भींच कर एक दफा जोर से कहिए..नायब सिंह सैनी की जय। शायद इसी हालात पर कभी निदा फाजली ने लिखा था..

मन बैरागी,तन अनुरागी,कदम-कदम दुश्वारी है
जीवन जीना सहल न जानो,बहुत बड़ी फनकारी है
औरों जैसे होकर भी हम बाइज्जत हैं बस्ती में
कुछ लोगों का सीधापन है,कुछ अपनी कलाकारी है

बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
Author: बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो

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