कांच के टुकड़ों को लोग अब हीरा बताने लगे हैं,
सुना है..मिट्टी के दीये,सूरज को रास्ता दिखाने लगे हैं
हरियाणा के मंत्री जनसेवा का शायद ही कोई अवसर चूकते हों। इस नेक काम में वो अधिकारियों को भी अपने साथ मिलाने के लिए व्याकुल रहते हैं। एक मंत्री तो और भी गजब कर रहे हैं। इनके परिचय के लिए बतला दें कि ये अपनी लग्जरी जीवन शैली-रसिक तबियत के लिए दूर दूर तक जाने वाले और पहचान वाले हैं। सरकारी संसाधनों को निर्ममता से चूसने के इन कैबिनेट मंत्री के इस्टाईल व इनोवेटिव आइडियाज से इनके संगी साथी मंत्री प्रेरणा पाते रहते हैं। इन मंत्री ने पिछले दिनों गजब ही किया। इन्होंने एक आईएएस अधिकारी को अपने सरकारी आवास पर बुलाया। इन मंत्री के भतीजे ने इन अधिकारी की गाड़ी में 50 लाख रूपए रखवा दिए। साथ ही इन अधिकारी को सूचित किया कि आपकी गाड़ी में सामान रखवा दिया गया है। ये सुन कर ये अधिकारी चौंक गए। उन्होंने गाड़ी चैक किया तो वहां एक बैग में 50 लाख मिले। ये अधिकारी तमतमाते हुए ये नोटों से भरा हुआ बैग इन मंत्री को वापस सौंप आए। आइंदा से ऐसी हरकत उनके साथ ना करने को चेता आए। खूब खरी खोटी सुना आए। अपने हरियाणा में ऐसे कांड होते रहते हैं। ये तो सुनते थे कि अफसर लोग नेताओं-मंत्रियों को पैसा कमवाते हैं,लेकिन ये कम ही सुनने को आया था जब खुद मंत्री ही अफसरों को रिश्वत की रकम जमैटो-स्विगी के डिलीवरी ब्वाय बन कर पहुंचाते हों। उस पर गजब ये कि इन आईएएस अधिकारी ने नोटों के बैग को ठोकर मार दी। ऐसे अफसर हरियाणा में अब विरले ही हैं। कोई कोई ही है। जानकारी के लिए बतला दें कि ये आईएएस अधिकारी आयुक्त व प्रशासकीय सचिव के रैंक में हैं।
वीआईपी कल्चर
हम सब काफी किस्मत वाले हैं कि हमारे रहनुमा अपनी प्रजा के लिए अत्यंत चिंतित रहते हैं। अब देश पर जैसे ही संकट की आहट हुई खर्च कम करने के लिए सभी बड़े लोगों ने अपनी काफिले की गाड़ियां कम कर दी। उनके इस बोल्ड डिसीजन का सोशल मीडिया पर काफी प्रचार प्रसार करवाया जा रहा है। ऐसा बताया गया है कि बचत करने और दिखाने का ये कार्यक्रम साल भर तक चलेगा। क्या इस कार्यक्रम को स्थाई बनाने पर विचार नहीं किया जा सकता है? इस समय देश में वीआईपी कल्चर से आम आदमी काफी दुखी है। हमारे पड़ौसी मुल्क नेपाल में जो नई सरकार आई है उसने अपने यहां से वीआईपी कल्चर को जड़ मूल से ध्वस्त कर दिया है। मगर दुर्भाग्य से अपने यहां इस मुददे पर सिर्फ बातें बनाई गई। काम इस पर नहीं हो पाया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों काफी वायरल हो रहा है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक जज के लिए सड़क पर ट्रैफिक रोक लिया गया है। लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने से व्यथित एक बुजुर्ग व्यक्ति इस वीडियो में कह रहा है कि आम आदमी लाइन में लगा है एक कथित वीआईपी के लिए। जो सुप्रीम कोर्ट का जज है। सरकारी नौकर है। ये जनता जो टैक्स देती है वो इस जाम को खुलने का इंतजार कर रही है। एक तथाकथित वीआईपी के लिए पूरा पुलिस का अमला वर्दी में खड़ा है। उसकी खिदमत में खड़ा है। ये कानून नौकरशाहों की चापलूसी को समर्पित क्यों है? ये सवाल जनता कब पूछेगी? जनता जिस दिन पूछेगी इस भारत में भी नेपाल की ही तरह क्रांति होगी। मंत्रियों के मकान फूकें जाएंगे और अफसरों को देश छोड़ कर विदेश में भागना पड़ेगा। आम आदमी जो टैक्स देता है वो परेशान है। ये व्यवस्था के नाम पर अव्यवस्था जनता के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है? इस वीडियो में आगे दिखाया गया है कि इस बुजुर्ग के पास से जब एक अन्य वृद्ध व्यक्ति गुजरता है तो वो पूछते है कि आपको क्या लगता है कि एक तथाकथित वीआईपी के लिए जनता को भरी तपती दोपहरी में सड़क पर रोक दिया गया है,क्या ये सही है? क्या जनता के साथ यही कुछ होना चाहिए? वो वृद्ध बातों पर प्रतिक्रिया दिए बिना आगे बढ जाते है। इस पर भाषण दे रहे ये बुजुर्ग कहते हैं कि आपकी बोलती बंद क्यों हो गई है? यही मजबूरी है कि इस देश का आदमी व्यवस्था में विसंगति के खिलाफ बोलता नहीं और इसलिए वो भुगतता रहता है और इसीलिए हम भी भुगत रहे हैं। भविष्य में भी भुगतते ही रहेंगे। आप इन बुजुर्ग की बात से कितने सहमत हैं? इस हालात पर कहा जा सकता है..
पत्थरों के शहर में अब आईने टूटने लगे हैं
लोग सच बोलने वालों से रूठने लगे हैं
गलती से मिस्टेक
हरियाणा सरकार में गलती से मिस्टेक होती रहती है। अच्छा ये है कि सरकार तुरंत ही इन गलतियों में सुधार भी कर लेती है। जैसे कि उद्योग मंत्री राव नरबीर को रिवाड़ी में कष्ट निवारण समिति का प्रभारी मंत्री लग दिया। अब रिवाड़ी जिले की अटेली विधानसभा सीट से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की बेटी आरती राव विधायक हैं। वो हरियाणा सरकार में मंत्री भी हैं। राव नरबीर और राव इंद्रजीत का सियासत में 36 का आंकड़ा है। ऐसा माना जाता है कि राव इंद्रजीत के दखल-नाराजगी के बाद सरकार ने राव नरबीर को रिवाड़ी से हटा कर झज्जर जिले का प्रभारी बना दिया। अब नरबीर इस जिले में शिददत से कष्टों का निवारण करेंगे।
फरीदाबाद नगर निगम
फरीदाबाद के सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने अफसरों को श्राप दे दिया है कि जो जनता की खून पसीने की कमाई का पैसा खाएगा उनको कीड़े पड़ेगे। रिश्वत का पैसा इन अफसरों को रास नहीं आएगा और उनको, उनके परिवार और बच्चों को कष्ट उठाने पडेÞगे। उनको भुगतना पड़ेगा। मंत्री के इस बेबाक अंदाज पर सोशल मीडिया में मिश्रत प्रतिक्रिया आई है। विपक्ष ने जहां इसे मुददा बनाते हुए कहा कि जब भाजपा के लोग ही कह रहे हैं कि सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है तो फिर किसी और के कहने की जरूतर ही क्या है? कुछ लोग कह रहे हैं कि इस बयान में मंत्री की बेबसी और लाचारी नजर आ रही है कि उनकी आंखों के सामने फरीदाबाद नगर निगम में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है और वो इसके कसूरवार अफसरों को सजा नहीं दिलवा पा रहे। लोग मंत्री जी से पूछ रहे हैं कि चंूकि अब वो सिस्टम का हिस्सा हैं तो उनको ऐसे बयान देने की बजाय करप्ट लोगों को सबक सिखाना चाहिए। हो सकता है कि इस बयान के जरिए मंत्री जी जनता से एडवांस में ही अपनी ईमानदारी का सर्टिफिकेट लेना चाह रहे हों कि इस करप्शन से उनका रत्ती भर का वास्ता नहीं है। जो जैसा करेगा, वैसा भुगतेगा। गुर्जर के इस अंदाज पर कहा जा सकता है..
शहर में बस्तियां और भी हैं,
ईमानदारी के अलावा मेरी गलतियां और भी हैं
आज की भाजपा-अजेय भाजपा
भाजपा को भाजपा बनाने वाले कौन से तत्व हैं? क्यों भाजपा इन दिनों लगभग अजेय है.. इसको कुछ उदाहरणों से समझने की कोशिश करते हैं। पहला उदाहरण-पंचकूला नगर निगम के वार्ड नंबर 12 से निर्दलीय उम्मीदवार ओमवती चुनाव प्रचार में लगी हुई थी। अचानक से उनको खबर मिली कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उनके आवास पर पहुंचे हुए हैं। वो अपना चुनाव प्रचार छोड़ कर अपने आवास पर पहुंची। ओमवती पहले भी कई दफा निर्दलीय पार्षद रह चुकी हैं और फिर भाजपा में शामिल हो गई थी। उनको निगम चुनाव में टिकट की उम्मीद थी,लेकिन पार्टी ने यहां से राकेश जगौता को अपना उम्मीदवार बना दिया। इस से नाराज ओमवती निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरी। भाजपा संगठन को ये फीडबैक मिला कि ओमवती के चुनाव लड़ने से पार्टी प्रत्याशी को नुकसान हो सकता है। ये मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया। मुख्यमंत्री ओमवती को मनाने के लिए खुद मैदान में उतरे। उनकी कोशिश सफल हुई और भाजपा यहां से विजयी हुई। दूसरा उदाहरण ये है कि आप सोचिए कि मुख्यमंत्री ने सोनीपत नगर निगम क्षेत्र में कितनी जनसभाओं-बैठकों को संबोधित किया होगा? भाजपा संगठन ने सैनी से सोनीपत में 22 कार्यक्रमों के लिए समय मांगा और मुख्यमंत्री ने 22 कार्यक्रम ही वहां किए। एक भी कम नहीं। तीसरा उदाहरण-अंबाला से नगर निगम की मेयर पद की उम्मीदवार अक्षिता सैनी चुनाव प्रचार में लगी हुई थी। एक जगह उनको कुछ लोग मिले कि हम भाजपा को वोट देने के लिए तो तैयार हैं,लेकिन कोई जिम्मेदार आदमी हमें ये भरोसा दे कि भाजपा हमारा ख्याल रखेगी। अक्षिता को इस मामले में सबसे जिम्मेदार व्यक्ति लगे भाजपा के प्रभारी सतीश पूनिया। अक्षिता ने उनको फोन किया। पूनिया के फोन में अक्षिता का नंबर सेव नहीं था। अंजान नंबर से काल थी,लेकिन पूनिया ने फोन रिसीव किया तो अक्षिता ने उनको अपना परिचय दिया कि कुछ लोग भाजपा में जिम्मेदार व्यक्ति से बात करना चाहते हैं। पूनिया ने उन लोगों की पूरी बात सुनी, मदद का भरोसा दिया और उनसे भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की। पूनिया ने नवनिर्वाचित मेयर-पार्षदों को भविष्य में जीत का मंत्र देते हुए कहा कि उनसे लोगों की उम्मीदें-अपेक्षा इतनी बढ गई हैं कि अगर किसी के मकान के आगे किसी गाय ने गोबर कर दिया तो लोग ये चाहते हैं कि मंत्री सारे काम छोड़ कर खुद कस्सी से गोबर हटाए। हमें इन लोगों के भरोसे पर खरा उतरना है। पंचकूला में इन नव निर्वाचित पार्षदों-मेयरों को संबोधित करते हुए लोगों का भरोसा टूटने नहीं देना है। पूनिया ने कहा कि पंचकूला से मेयर बने श्यामलाल बंसल तो इतनी मासूमियत से टिकट मांग रहे थे उनकी व्यथा सुन कर चुनाव समिति में हर किसी का दिल पसीज गया। बंसल कहने लगे कि पहले तो तीन दफा विपरीत हालात में मुझे विधानसभा का उम्मीदवार बनाया गया। तीन दफा हार लिया अब तो एक दफा मुझे जीत के माहौल में भी उम्मीदवार बना दो। सोनीपत से मेयर बने राजीव जैन पर चुटकी लेते हुए पूनिया ने कहा कि इनके साथ तो बुरी बनी। विधानसभा चुनाव में टिकट ये खुद के लिए चाह रहे थे कि हालात ऐसे बने कि पार्टी ने इनकी बीवी कविता जैन को उम्मीदवार बना दिया। फिर इनकी बीवी मंत्री बन गई। इनकी हालात तो ये हो गई कि बीवी के पीछे डायरी लेकर चलने लगे। अगर बीवी चुनाव जीत जाए तो खुद की मेहनत और अगर हार जाए तो कहेगी कि पति के कारण चुनाव हार गई। अब राजीव जैन दूसरी दफा मेयर बन गए है। दूसरी दफा मेयर बनने से भी इनका स्टेटस मंत्री जैसा सा ही हो गया है। जानकारी के लिए बतला दें कि 14 मई के इस कार्यक्रम में यंू तो पूरी सरकार ही पंचकूला पंचकमल के भाजपा कार्यालय पहुंची हुई थी,लेकिन लोगों में सबसे ज्यादा सैल्फी लेने का क्रेज राज्यसभा सांसद कार्तिक शर्मा के साथ दिखा। कार्तिक ने भी किसी को निराश नहीं किया और खुल्ले मन से अपने समर्थकों से बतियाए। कोई उनका कुर्ता खींच कर इधर ले जा रहा था, तो कोई बांह पकड़ कर किसी ओर कोने में बतिया रहा था।
किश्तों में बेइज्जती
हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र को अचानक से ये ज्ञान हो गया है कि ईवीएम की गड़बड़ी के कारण ही कांग्रेस चुनाव हार रही है। उन्होंने ईवीएम के खिलाफ प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। वो चुनाव मतपत्र से करवाने की मांग कर रहे हैं। आखिरकार राव नरेंद्र को जब पता है कि ईवीएम के जरिए कांग्रेस को फिर से हरवाया जाएगा तो उन्होंने चुनाव का बायकाट करने के विकल्प को तव्वजो क्यों नहीं दी? अगर वो ऐसा करते तो कांग्रेस की किश्तों में हो रही इस बेइज्जती से बचा जा सकता था।
तरोड़-मरोड़
ये मीडिया वाले अजीब लोग हैं। किसी के कहे को पहले तो तरोड़ते हैं और फिर मरोड़ भी देते हैं। जब तक सामने वाले को पता लगता है तब तो बहुत देर हो चुकी होती है। राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा पूर्व सीएम भजनलाल की शान में कसीदे पढ रही थी। उनकी खूबियों का बखान कर रही थी। न जाने इन पत्रकारों को क्या हुआ कि उन्होंने रेखा शर्मा के इस बयान को तोड़ मरोड़ दिया। कुछ दिन बाद रेखा शर्मा की वीडियो सोशल मीडिया पर प्रकट हुई और उन्होंने कहा कि ये पत्रकारों ने ठीक नहीं किया। ये नहीं होना चाहिए था। उनके बयान को तोड़ना और मरोड़ना नहीं चाहिए था। इसके बाद मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी ये जानकारी सांझा कर दी कि उनकी सरकार तो भजनलाल के दिखाए हुए रास्ते का ही अनुसरण कर रही है।उन्हीं की नीतियों पर कुलांचे भर रही है। इतना सुनते ही भजनलाल के लाल कुलदीप बिश्नोई की आंख भर आई और उन्होंने कह दिया कि रेखा शर्मा से उनको कोई गिला शिकवा नहीं है। पत्रकारों को रेखा का कहा तरोड़ना और मरोड़ना नहीं चाहिए था। इसी से उनको पीड़ा हुई थी।













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