June 13, 2026 10:20 am

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IDFC बैंक घोटाला: ED ने हरियाणा के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार को किया गिरफ्तार, 645 करोड़ रुपये के गबन की जांच तेज

रमेश गोयत
चंडीगढ़,11 जून। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए हरियाणा के विकास एवं पंचायत निदेशक कार्यालय में तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट नरेश कुमार को 10 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 645 करोड़ रुपये के कथित सरकारी धन गबन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की चल रही जांच के दौरान की गई।
ईडी की जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन तथा चंडीगढ़ और पंचकूला स्थित दो निजी स्कूलों के IDFC फर्स्ट बैंक खातों से करीब 645 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि का गबन किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में विक्रम वाधवा, रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की कथित मिलीभगत सामने आई है।

शेल कंपनियों के जरिए हुआ करोड़ों का खेल
ईडी के मुताबिक सरकारी धन को विभिन्न फर्जी और मध्यस्थ कंपनियों के माध्यम से बाहर निकाला गया। इनमें स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, आर.एस. ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं के नाम सामने आए हैं। इन कंपनियों के खातों में सरकारी विभागों से सीधे धनराशि ट्रांसफर की गई, जिसके बाद रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाने का प्रयास किया गया।

नरेश कुमार पर 1.20 करोड़ रुपये लेने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार नरेश कुमार को शेल कंपनी स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से सीधे धनराशि प्राप्त हुई। ईडी का दावा है कि उन्होंने न केवल अपने और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में करीब 1.20 करोड़ रुपये प्राप्त किए, बल्कि गबन की गई रकम को नकद में बदलने, छिपाने और आगे पहुंचाने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
ईडी ने आरोप लगाया है कि नरेश कुमार कथित तौर पर सरकारी धन की हेराफेरी में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे थे और अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) के सृजन, लेयरिंग और छिपाने में उनकी अहम भूमिका रही।

ज्वेलर्स के जरिए नकदी में बदली गई रकम
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि शेल कंपनियों से सैकड़ों करोड़ रुपये विभिन्न ज्वेलर्स के खातों में ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि इन बैंकिंग लेनदेन के बदले संबंधित ज्वेलर्स ने नकद राशि उपलब्ध कराई। इसके बाद रिभव ऋषि और उसके सहयोगियों ने यह नकदी विभिन्न सरकारी अधिकारियों सहित अन्य लाभार्थियों तक पहुंचाई।
ईडी अब पूरे मनी ट्रेल का पता लगाने, अन्य लाभार्थियों की पहचान करने तथा कथित गबन की रकम से खरीदी गई संपत्तियों का पता लगाने में जुटी हुई है।

14 जून तक ईडी रिमांड
ईडी ने नरेश कुमार को 10 जून को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर विशेष अदालत (PMLA) में पेश किया। अदालत ने उन्हें 14 जून 2026 तक चार दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
इससे पहले इसी मामले में रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
ईडी ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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