एग्रीस्टैक, डिजिटल राजस्व सुधार और भूमि मामलों को मिलेगी तेज़ रफ्तार
चंडीगढ़, 8 जनवरी। जन-सुविधाओं को सुदृढ़ करने और नागरिक-केंद्रित शासन को और मजबूत करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने राज्यव्यापी विशेष अभियान ‘जलसा-ए-आम’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत राज्यभर में लंबित म्यूटेशन मामलों का समयबद्ध निपटान किया जाएगा। साथ ही एग्रीस्टैक के क्रियान्वयन, डिजिटल राजस्व सुधारों, भूमि विभाजन मामलों, अंतर-राज्य सीमा चिह्नांकन और शीतलहर से निपटने की तैयारियों को भी गति दी जाएगी।
इन पहलों की समीक्षा और औपचारिक घोषणा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपायुक्तों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में की।
जनवरी के चार शनिवारों को होगा ‘जलसा-ए-आम’
‘जलसा-ए-आम’ अभियान 10, 17, 24 और 31 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, ताकि म्यूटेशन मामलों का त्वरित और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित हो सके। डॉ. मिश्रा ने उपायुक्तों को अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए, जिससे अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित हो।
वर्तमान में राज्य की 143 तहसीलों और 7,104 गांवों में कुल 1,89,635 म्यूटेशन आवेदन लंबित हैं। इनमें से 10 दिनों से अधिक समय से लंबित 50,794 मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से फरीदाबाद, पलवल और अंबाला जिलों पर फोकस रहेगा। राज्य सरकार ऑटो-म्यूटेशन प्रणाली की ओर भी कदम बढ़ा रही है, जिसके लिए मौजूदा बैकलॉग का निपटान आवश्यक बताया गया है।
भूमि विभाजन मामलों में तेजी के निर्देश
लंबे समय से लंबित भूमि विभाजन मामलों पर चिंता जताते हुए डॉ. मिश्रा ने पंजाब भूमि राजस्व अधिनियम की प्रतिस्थापित धारा 111ए के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए। इसके तहत प्रत्येक सहायक कलेक्टर (द्वितीय श्रेणी) को प्रति माह न्यूनतम 12 मामलों, जबकि कम कार्यभार वाले तहसीलदारों को 20 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य दिया गया है।
त्रि-स्तरीय निगरानी और ADR व्यवस्था लागू
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला, मंडल और राज्य स्तर पर त्रि-स्तरीय मासिक समीक्षा प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तंत्र शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके तहत सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों को अनुबंध आधार पर गांव-स्तरीय शिविरों में तैनात किया जाएगा।
प्रत्येक सफलतापूर्वक सुलझे मामले पर 10,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा, जिसे दोनों पक्ष समान रूप से वहन करेंगे।
डिजिटल राजस्व प्रशासन में बड़ी उपलब्धियां
डॉ. मिश्रा ने बताया कि हरियाणा में अब तक 60 लाख से अधिक भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू होने के बाद 83,379 संपत्ति विलेख पेपरलेस मोड में पंजीकृत हो चुके हैं।
कुल 1,17,931 विलेखों में से 90,711 को स्वीकृति मिली है, जो 76.9 प्रतिशत स्वीकृति दर दर्शाता है। दो बार से अधिक लौटाए गए मामलों को स्वतः वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
ततिमा डिजिटलीकरण लगभग पूरा
5 जनवरी 2026 तक 6,351 जियो-रेफरेंस्ड गांवों में 60.43 लाख ततिमा रिकॉर्ड पूरे किए जा चुके हैं।
महेंद्रगढ़: 99.7% कार्य पूर्ण
भिवानी: 3.82 लाख रिकॉर्ड
जींद: 4.28 लाख रिकॉर्ड
शेष जिलों को 31 जनवरी 2026 तक कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
एग्रीस्टैक के तहत किसानों का डेटा अपडेट
एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत 98 लाख से अधिक किसानों के डेटा बकेट तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें से 5.12 लाख नामांकन पूरे हो चुके हैं। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि एग्रीस्टैक शिविरों में PPP-ID और आधार सीडिंग एक साथ की जाए।
पीएम-किसान लाभार्थियों को प्राथमिकता देते हुए कृषि विभाग के माध्यम से एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे।
अंतर-राज्य सीमा चिह्नांकन में प्रगति
हरियाणा–उत्तर प्रदेश सीमा पर कुल 1,221 में से 535 सीमा स्तंभ स्थापित किए जा चुके हैं।
सोनीपत: 74.6% कार्य पूर्ण
इसके बाद पलवल और करनाल
शेष कार्य 18 फरवरी 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
शीतलहर से निपटने की तैयारी, नागरिकों से अपील
डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्य में IMD के दिशानिर्देशों के अनुसार कोल्ड वेव एक्शन प्लान लागू किया गया है। चिकित्सा सामग्री और गर्म कपड़ों से लैस जिला-स्तरीय आपात टीमें सक्रिय हैं, जो 24 घंटे के भीतर प्रतिक्रिया देंगी।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अकेले रहने वाले बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवारों का विशेष ध्यान रखें। हाइपोथर्मिया और फ्रॉस्टबाइट के लक्षणों पर जागरूकता फैलाने के लिए सामुदायिक स्तर पर शिविर लगाने का भी आग्रह किया गया। किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन 112 पर तुरंत सूचना देने की अपील की गई है।











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