साहब बोले- हमने तो विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया था, फिर बारिश तैयारियों की खबर कैसे बन गई?
हॉस्टल परियोजनाओं का निरीक्षण करने निकले थे चीफ इंजीनियर, लेकिन सुर्खियों में आ गई ‘बरसात तैयारी’
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 14 जून। साहब बोले- हमने तो विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया था, फिर बारिश तैयारियों की खबर कैसे बन गई? आपने हमारी खबर ही गलत लिख दी! यह कहना है इंजीनियरिंग विंग के कई अधिकारियों का।
यूटी इंजीनियरिंग विभाग के मुख्य अभियंता के हालिया दौरे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जिस दौरे को विभाग की ओर से मानसून तैयारियों और जलभराव रोकने के प्रयासों के रूप में प्रचारित किया गया, अब उसी को लेकर विभाग के अंदर और बाहर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार शनिवार को मुख्य अभियंता अपने अधिकारियों के साथ शहर में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, निर्माणाधीन परियोजनाओं तथा उन प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण करने निकले थे जिनका जल्द ही उद्घाटन और लोकार्पण होना है। बताया जा रहा है कि कई परियोजनाएं ऐसी हैं जिनका उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।
लेकिन निरीक्षण के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में पूरे दौरे को मानसून तैयारियों, रोड गलियों की सफाई, डी-सिल्टिंग और जलभराव रोकने की कवायद के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया।
फोटो ने खड़े किए सवाल
सबसे ज्यादा चर्चा उस तस्वीर को लेकर हो रही है जिसमें मुख्य अभियंता और अधिकारी सुखना चो क्षेत्र में खड़े दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यदि दौरे का मुख्य उद्देश्य विकास परियोजनाओं का निरीक्षण था तो फिर मानसून तैयारियों को प्रमुखता देकर तस्वीरें और प्रेस नोट क्यों जारी किया गया?
सूत्रों का दावा है कि शहर में चल रहे प्रोजेक्ट्स के निरीक्षण के दौरान रास्ते में पड़ने वाले एक स्थान पर मानसून तैयारियों से संबंधित एक औपचारिक फोटो खिंचवाई गई थी। बाद में उसी फोटो को आधार बनाकर पूरे दौरे का फोकस बदल दिया गया।
विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि वास्तविक दौरा विभिन्न निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स और उन कार्यों का था जिन्हें आगामी दिनों में जनता को समर्पित किया जाना है। लेकिन प्रेस नोट पढ़ने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा दिन केवल बरसात की तैयारियों की समीक्षा में ही बिताया गया हो।
सवालों के घेरे में सूचना तंत्र
इस घटनाक्रम के बाद विभाग के सूचना तंत्र पर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि प्रोजेक्ट निरीक्षण ही मुख्य उद्देश्य था तो जनता को वही जानकारी दी जानी चाहिए थी। सरकारी विभागों की पारदर्शिता तभी मजबूत होगी जब वास्तविक गतिविधियों और जारी किए जाने वाले प्रेस नोट में समानता दिखाई दे।
जानकारी के अनुसार मुख्य अभियंता ने अधिकारियों के साथ सबसे पहले शहर में चल रहे विकास कार्यों और आगामी समय में जनता को समर्पित की जाने वाली परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान विशेष रूप से पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) स्थित कुरुक्षेत्र हॉस्टल और सेक्टर-46 स्थित गवर्नमेंट कॉलेज के हॉस्टल ब्लॉक का दौरा किया गया।
इन दोनों परियोजनाओं में चल रहे निर्माण, फिनिशिंग, विद्युत, प्लंबिंग और अन्य तकनीकी कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर भी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
विद्यार्थियों के लिए तैयार हो रही बड़ी सुविधाएं
सूत्रों के अनुसार मुख्य अभियंता ने निर्माण कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि हॉस्टल परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा किया जाए ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को आवासीय सुविधाओं का लाभ मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि कार्यों में तेजी जरूरी है, लेकिन गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फिर मानसून तैयारियां कैसे बन गईं मुख्य खबर?
दौरे के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में मानसून तैयारियों, रोड गलियों की सफाई, डी-सिल्टिंग और जल निकासी व्यवस्था को प्रमुखता दी गई। इसके बाद कई लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि यदि दौरे का मुख्य उद्देश्य हॉस्टल और अन्य विकास परियोजनाओं का निरीक्षण था तो फिर समाचारों में मानसून तैयारियों को सबसे आगे क्यों रखा गया?
चर्चा का विषय बनी सुखना चो क्षेत्र की वह तस्वीर, जिसमें अधिकारी निरीक्षण करते दिखाई दे रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पूरे दिन के कार्यक्रम में विकास परियोजनाओं का निरीक्षण प्रमुख एजेंडा था, जबकि मानसून तैयारियों से जुड़ी तस्वीर और कुछ मिनटों की औपचारिक समीक्षा ने पूरी कवरेज का रुख बदल दिया।
फोटो से ज्यादा चर्चा प्रेस नोट की
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि परियोजनाओं के निरीक्षण और निर्माण कार्यों की समीक्षा की बजाय प्रेस नोट में मानसून तैयारियों को प्रमुखता देने से वास्तविक कार्यक्रम की तस्वीर धुंधली हो गई। इससे यह धारणा बनी कि पूरा दौरा केवल बरसात की तैयारियों की समीक्षा के लिए किया गया था।
हालांकि विभाग का कहना है कि मानसून तैयारियों और विकास कार्यों दोनों की समीक्षा की गई थी। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या महत्वपूर्ण निर्माण परियोजनाओं की प्रगति और विद्यार्थियों से जुड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पर्याप्त महत्व मिला?
एक दर्जन गाड़ियों का काफिला, ईंधन बचत के संदेश पर सवाल
सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के दौरान कई सरकारी वाहन काफिले के रूप में विभिन्न स्थानों तक पहुंचे। बताया जा रहा है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी एक ही वाहन में सफर कर रहे थे, जबकि उनकी निर्धारित सरकारी गाड़ियां ड्राइवरों द्वारा अलग से काफिले के साथ चलाई जा रही थीं।
यदि ऐसा हुआ है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया लगातार ईंधन बचत, संसाधनों के बेहतर उपयोग और सरकारी खर्चों में संयम का संदेश देते हैं, तब निरीक्षण दौरों में बड़े वाहन काफिलों की आवश्यकता और औचित्य क्या है?
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
हमारे पास फ़ोटो व प्रेस नोट इंजीनियरिंग विंग से आया था
राजीव तिवारी निदेशक जनसम्पर्क विभाग चंडीगढ़ यूटी ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि हमारे पास फ़ोटो व प्रेस नोट इंजीनियरिंग विंग से आया था। निरीक्षण कहा कब किसने किया था। इसकी जानकारी विभाग के अधिकारी ही दे सकते है।














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