June 21, 2026 10:18 pm

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CHANDIGARH NEWS: ट्रांसफर पॉलिसी पर उठे गंभीर सवाल, संवेदनशील सीटों पर वर्षों से जमे कर्मचारियों के बीच अब होमगार्ड जवान की ‘बाबूगिरी’ भी चर्चा में

विजिलेंस के तीन साल वाले नियम पर अमल नहीं होने के आरोप, मलाईदार शाखाओं में वर्षों से कायम व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 16 जून। यूटी प्रशासन के डीसी, एडीसी, एसडीएम, आरसीएस, तहसील, सब-रजिस्ट्रार और अन्य पब्लिक डीलिंग कार्यालयों में ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विजिलेंस विभाग जहां संवेदनशील सीटों पर तीन साल से अधिक समय से जमे कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा मांग रहा है, वहीं प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि कई शाखाओं में वर्षों से एक जैसी व्यवस्था कायम है और कुछ कर्मचारी लंबे समय से प्रभावशाली सीटों पर बने हुए हैं।
मामला सिर्फ नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। अब एक ऐसा मामला भी सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक ढांचे पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन के एक कार्यालय में तैनात एक होमगार्ड जवान पिछले 10 साल से भी अधिक समय तक क्लर्कीय कार्य करता रहा और हाल ही में उसी व्यवस्था के बीच सेवानिवृत्त भी हो गया।

होमगार्ड की नौकरी, लेकिन काम बाबू का!
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार संबंधित होमगार्ड जवान की मूल तैनाती सुरक्षा और सहयोग संबंधी कार्यों के लिए थी, लेकिन वर्षों तक वह कार्यालय की एक महत्वपूर्ण शाखा में बैठकर फाइलों, पत्राचार, रिकॉर्ड और अन्य कार्यालयी कामकाज को संभालता रहा।
बताया जा रहा है कि उसकी सीट कार्यालय के एक प्रमुख हिस्से में पिलर के साथ स्थित थी और लंबे समय से वहीं से कामकाज संचालित होता था। कर्मचारियों के बीच स्थिति ऐसी बन गई थी कि कई लोग उसे होमगार्ड जवान नहीं बल्कि नियमित बाबू या क्लर्क ही मानते थे।
सूत्रों का दावा है कि कार्यालय में आने वाले अनेक लोगों को यह तक पता नहीं था कि जिस व्यक्ति से वे वर्षों से कार्यालयी कार्यों के लिए संपर्क कर रहे हैं, वह नियमित लिपिकीय कर्मचारी नहीं बल्कि होमगार्ड विभाग का जवान है।

रिटायरमेंट के बाद भी चर्चा में तैनाती
जानकारी के अनुसार संबंधित होमगार्ड जवान पिछले महीने सेवानिवृत्त हो चुका है। लेकिन उसके रिटायर होने के बाद अब उसकी वर्षों लंबी तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यदि ट्रांसफर और रोटेशन पॉलिसी लागू थी तो फिर एक ही व्यक्ति इतने लंबे समय तक उसी व्यवस्था में कैसे बना रहा।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब विजिलेंस विभाग विभिन्न कार्यालयों से संवेदनशील और गैर-संवेदनशील पदों पर वर्षों से जमे कर्मचारियों का रिकॉर्ड मांग रहा है।

डीसी, एडीसी, एसडीएम, RLA, और तहसील कार्यालयों में भी चर्चा
सूत्रों के अनुसार डीसी कार्यालय, एडीसी कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, आरएलए, आरसीएस कार्यालय, राजस्व शाखा, सब-रजिस्ट्रार शाखा, मैरिज ब्रांच, स्थापना शाखा और तहसील कार्यालयों में भी कई कर्मचारी वर्षों से एक जैसी व्यवस्थाओं में कार्यरत हैं।
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि कुछ मामलों में कर्मचारियों का ट्रांसफर होने के बावजूद कुछ समय बाद उन्हें दोबारा प्रभावशाली और पब्लिक डीलिंग वाली शाखाओं में तैनात कर दिया जाता है। इसी वजह से ट्रांसफर पॉलिसी के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

विजिलेंस की सख्ती से बढ़ी बेचैनी
जानकारी के अनुसार विजिलेंस विभाग ने पिछले चार महीनों में कई बार विभागों को पत्र भेजकर ऐसे कर्मचारियों की जानकारी मांगी है जो तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही सीट पर कार्यरत हैं।
विभागों से पूछा गया है कि:
तीन साल से अधिक समय से एक ही सीट पर कितने कर्मचारी हैं।
पिछले तीन वर्षों में कितनों का ट्रांसफर किया गया।
वर्तमान में कितने कर्मचारी उसी सीट पर कार्यरत हैं।
जिनका स्थानांतरण नहीं हुआ, उसके पीछे क्या कारण हैं।
सूत्रों का कहना है कि कई विभागों में इस कवायद के बाद हलचल बढ़ गई है और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
आउटसोर्स और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल
प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पारदर्शिता सुनिश्चित करनी है तो केवल नियमित कर्मचारियों की तैनाती ही नहीं, बल्कि आउटसोर्स, अनुबंध, प्रतिनियुक्ति और अन्य व्यवस्थाओं के तहत कार्यरत कर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए।
होमगार्ड जवान का मामला इसी बहस को और तेज कर रहा है कि आखिर महत्वपूर्ण और संवेदनशील शाखाओं में वर्षों तक एक जैसी व्यवस्था क्यों बनी रहती है और उसकी समय-समय पर समीक्षा क्यों नहीं होती।

उठ रहे हैं बड़े सवाल
क्या संवेदनशील सीटों पर तीन साल की सीमा का पालन हो रहा है?
क्या प्रभावशाली शाखाओं में वर्षों से जमे कर्मचारियों की समीक्षा होगी?
क्या होमगार्ड जवान को लंबे समय तक क्लर्कीय कार्य सौंपने की जांच होगी?
क्या आउटसोर्स और अन्य व्यवस्थाओं के तहत तैनात कर्मियों का भी ऑडिट होगा?
क्या विजिलेंस की रिपोर्ट के बाद बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिलेगा?
विजिलेंस द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और प्रशासनिक हलकों में चल रही चर्चाओं के बीच अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन सवालों पर क्या कदम उठाता है। यदि रोटेशन और ट्रांसफर पॉलिसी को सख्ती से लागू किया जाता है तो आने वाले समय में कई कार्यालयों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

RAMESH GOYAT
Author: RAMESH GOYAT

With over 20 years of experience in Hindi journalism, Ramesh Goyat has served as District Bureau Chief in Kaithal and worked with the Haryana , Punjab , HP and UT Bureau in Chandigarh. Coming from a freedom fighter family, he is known for his fast, accurate, and credible reporting. Through Babugiri Hindi, he aims to deliver impartial and fact-based news to readers.

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