बाबूगिरी हिंदी ब्यूरो
चंडीगढ़, 23 जून। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब हरियाणा के वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंच गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार देर रात तक हरियाणा कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से लंबी पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी अधिकारी से घोटाले में कथित भूमिका, बैंक अधिकारियों से संपर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सवालों के जवाब तलाश रही है।
मामले में सीबीआई की कार्रवाई तेज होने के बाद हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े अधिकारियों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के आधार पर सीबीआई कभी भी संबंधित अधिकारी की गिरफ्तारी का फैसला ले सकती है।
सीबीआई इससे पहले भी उक्त अधिकारी से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी सरकारी खातों से कथित तौर पर हुई बड़ी रकम की निकासी और इसमें शामिल अधिकारियों व बैंक कर्मचारियों के बीच संभावित गठजोड़ की जांच कर रही है।
आरके सिंह आईएएस न्यायिक हिरासत में भेजे गए
इस मामले में गिरफ्तार किए गए हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी आरके सिंह को सीबीआई कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इससे पहले सीबीआई ने मामले में एक आईएएस अधिकारी और एक आईएफएस अधिकारी को गिरफ्तार किया था। अब जांच का दायरा अन्य अधिकारियों तक भी बढ़ता नजर आ रहा है।
657 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान
जांच एजेंसियों के अनुसार यह कथित घोटाला हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के बैंक खातों से जुड़ा है। आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर खातों से अनियमित तरीके से धनराशि ट्रांसफर कराई।
जांच के मुताबिक हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के बैंक खातों से बड़ी रकम की निकासी की गई। सीबीआई ने अपनी जांच में करीब 657 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का अनुमान जताया है।
वहीं, समानांतर जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मामले में करीब 645 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात कही है। एजेंसियां अब लेनदेन की पूरी कड़ी, लाभार्थियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।












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