चंडीगढ़। अब हरा-भरा लॉन केवल खूबसूरती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संदेश, पहचान और ब्रांडिंग का सशक्त माध्यम भी बनेगा। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर द्वारा विकसित अनोखे ऑटोनॉमस रोबोट ‘ग्रास प्रिंटर’ को भारत सरकार से पेटेंट मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ पीयू ने ऑटोमेटेड लैंडस्केपिंग और रोबोटिक्स के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।
तकनीक का कमाल: घास से बनेंगे अक्षर और डिजाइन
ग्रास प्रिंटर एक स्मार्ट रोबोटिक लॉन मूवर की तरह काम करता है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि यह घास को अलग-अलग ऊंचाई पर काटकर लॉन पर अक्षर, चिन्ह और आकर्षक डिजाइन तैयार करता है। घास की ऊंचाई में बने अंतर से विज़ुअल कंट्रास्ट बनता है, जो दूर से भी साफ दिखाई देता है। इससे बड़े मैदान और लॉन एक चलते-फिरते मैसेज बोर्ड में तब्दील हो जाते हैं।
2018 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट, 2020 में पेटेंट आवेदन
डिज़ाइन इनोवेशन सेंटर के प्रमुख प्रो. नवीन अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। कोविड-19 महामारी के कारण प्रगति में देरी हुई, जिसके बाद 2020 में पेटेंट के लिए आवेदन किया गया। उन्होंने कहा कि यह इनोवेशन पूरी रिसर्च टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
ट्रेनिंग मोड और स्मार्ट नेविगेशन
ग्रास प्रिंटर में विशेष ट्रेनिंग मोड दिया गया है। इसके जरिए रोबोट पहले पूरे क्षेत्र को मैप करता है, फिर स्वतः रास्ता तय कर काम करता है। यह ऊर्जा का कुशल उपयोग करता है और कार्य पूरा होने के बाद अपने शुरुआती स्थान पर लौट आता है, जिससे यह पूरी तरह ऑटोनॉमस और स्मार्ट सिस्टम बन जाता है।
कहां होगा उपयोग
प्रो. अग्रवाल के अनुसार, ग्रास प्रिंटर का उपयोग एयरपोर्ट, स्पोर्ट्स स्टेडियम, कॉर्पोरेट पार्क, पब्लिक गार्डन और यूनिवर्सिटी कैंपस जैसी जगहों पर किया जा सकता है। यहां लॉन मेंटेनेंस के साथ-साथ ब्रांडिंग, दिशा-निर्देश और संदेश प्रदर्शित करना आसान होगा।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
पीयू की वाइस चांसलर प्रो. रेनू विग ने इस पेटेंट को विश्वविद्यालय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह इनोवेशन आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है और दर्शाता है कि विश्वविद्यालयों में हो रही रिसर्च किस तरह आम जगहों को स्मार्ट, उपयोगी और रचनात्मक बना सकती है।
मोबाइल ऐप से आसान नियंत्रण
ग्रास प्रिंटर को मोबाइल ऐप के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। उपयोगकर्ता ऐप में टेक्स्ट या डिजाइन डालता है और रोबोट बिना ज्यादा मानवीय हस्तक्षेप के अपने आप काम पूरा कर देता है। इससे समय, ऊर्जा और श्रम की बचत होती है और तकनीकी प्रशिक्षण न रखने वालों के लिए भी यह सिस्टम उपयोगी साबित होता है।















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